पीडीडीयू नगर। सुख समृद्धि और संतान की रक्षा की कामना से महिलाओं ने रविवार को संकट चतुर्थी व्रत किया। शाम के वक्त विघ्न विनाशक की पूजा कर तिल के लड्डुओं का भोग लगाया और चंद्र को अर्घ्य दिया। भगवान गणेश के संतान की रक्षा की कथा सुनकर भगवान की आरती उतारी।
माघ मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा का महत्व है। इसी क्रम में रविवार को महिलाओं ने दिन भर निराजल व्रत रखा। शाम के वक्त पुरोहितों को बुलाकर भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा की। विधि विधान को फूल, फल, नैवेद्य, धूप, दीप अर्पित किया। तिल के लड्डुओं का भोग लगाया। रात नौ बजकर 19 मिनट पर चंद्रोदय होने पर फलों से चंद्र को अर्घ्य दिया। इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारी। पं. कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि कथा है कि एक नगर में कुम्हार रहता था। एक बार उसका बर्तन नहीं पक रहा था। इस पर उसने पंडितो से पूछा तो उपाय सुझाया गया कि बच्चे की बली देने पर बर्तन पक जाएंगे। इस पर कुम्हार ने एक बुढ़िया के पांच वर्ष के बच्चे को आंवा में डाल दिया। वहीं बुढ़िया बच्चे के न मिलने पर भगवान गणेश से प्रार्थना की। नगर के आरपीएफ कॉलोनी, गया कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी, प्लांट डिपो, मानसनगर, सेंट्रल कॉलोनी सहित अन्य रेलवे कॉलोनियों के साथ चतुर्भुजपुर, काली महाल, शाहकुटी, कैलाशपुरी, रविनगर, अलीनगर, परशुरामपुर, नई बस्ती सहित अन्य इलाकों में रात के वक्त महिलाओं ने पूजा कर चांद के दर्शन किए और अर्घ्य दिया।