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सड़क चमकी, छांव उजड़ी: 12 यात्री प्रतीक्षालय ध्वस्त, चार साल से इंतजार

Mon, 06 Jul 2026 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:23 AM IST
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Roads Gleam, Shelters Gone: 12 Passenger Waiting Sheds Demolished; Four-Year Wait Continues
पीडीडीयू नगर के जीटीआर ब्रिज के किनारे यात्री प्रतीक्षालय पर हुआ कब्जा। संवाद
पीडीडीयू नगर। नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना ने यातायात को नई रफ्तार दी, लेकिन सार्वजनिक सुविधाओं का ढांचा बिखर गया। चौड़ीकरण के दौरान नगर के 12 यात्री प्रतीक्षालय ध्वस्त कर दिए गए, लेकिन चार वर्ष बाद भी उनकी जगह नए प्रतीक्षालय नहीं बन सके। 2018 के पहले जो प्रतिक्षालय बने थे वहां लोगों ने कब्जा कर लिया है और नशेडियों का अड्डा बन गया है। ऐसे में बस का इंतजार करने वाले यात्रियों को धूप, बारिश और उमस के बीच खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ रहा है।
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पीडीडीयू जंक्शन जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशन के कारण नगर में प्रतिदिन लगभग 20 हजार बाहरी यात्रियों का आवागमन होता है, जो वाराणसी, चंदौली, बिहार, मिर्जापुर और सोनभद्र के लिए बस व ऑटो से आगे की यात्रा करते हैं। लेकिन प्रतीक्षालयों के अभाव में उन्हें सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। प्रतीक्षालयों को चौड़ीकरण के दौरान प्रमुख बस स्टॉप और सार्वजनिक स्थानों से हटा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि परियोजना पूरी होने के बाद आधुनिक प्रतीक्षालय बनाए जाएंगे, लेकिन यह उम्मीद अब तक अधूरी है।
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54 लाख की लागत से बने प्रतीक्षालय चार साल में ही हो गए बेकार
वर्ष 2018 में सांसद निधि से जनपद के 56 स्थानों पर यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए थे। इनमें पीडीडीयू नगर में 12 प्रतीक्षालय शामिल थे, जिन पर लगभग 54 लाख रुपये खर्च हुए थे। प्रत्येक प्रतीक्षालय की लागत करीब 4.50 लाख रुपये थी और उनमें 21 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। लेकिन 2022 में सड़क चौड़ीकरण शुरू होने के बाद सभी प्रतीक्षालय बुलडोजर की जद में आ गए।
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अब स्थिति यह है कि यात्रियों के लिए न बैठने की व्यवस्था बची है और न ही धूप-बारिश से बचाव का कोई इंतजाम। गर्मी में लोग पेड़ों और दुकानों की छांव तलाशते हैं, जबकि बारिश में दुकानों के शेड ही सहारा बनते हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को झेलनी पड़ रही है।
प्रतीकों से पहचान भी मिट गई, तस्वीरें और शिलापट्ट गायब
यात्री प्रतीक्षालयों पर लगाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और तत्कालीन सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के चित्र और शिलापट्ट भी चौड़ीकरण के बाद अधिकांश स्थानों से गायब हो गए।
केस-1:

प्रतीक्षालय पर बना लिया निजी आशियाना
वर्ष 2013 में तत्कालीन नगर पालिका चेयरमैन रेखा जायसवाल ने जीटीआर ब्रिज के पास पक्का यात्री प्रतीक्षालय बनवाया था। यहां रोजाना करीब सौ यात्री रुकते थे। लेकिन अब उस प्रतीक्षालय पर कब्जा कर लिया गया है। शिलापट्ट पर ‘यात्री प्रतीक्षालय’ लिखा है, लेकिन भीतर कमरा बनाकर उसे घर की तरह उपयोग किया जा रहा है। वहां खाना बनाया जाता है, चारपाइयां बिछी रहती हैं और घरेलू सामान रखा है। अब यात्री वहां कुछ पल रुक भी नहीं सकते।
केस-2:
नशेड़ियों के जमावड़े से उपयोग लायक नहीं प्रतीक्षालय
इलिया कस्बे के काली मंदिर के पास 2018 से पहले बना प्रतीक्षालय भी अपनी उपयोगिता खो चुका है। यहां दिन-रात नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। परिसर में बोतलें और गंदगी फैली रहती हैं, जिससे महिलाएं और छात्राएं वहां रुकने से कतराती हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। इलिया चौकी प्रभारी अरविंद यादव का कहना है कि समय-समय पर जांच की जाती है और असामाजिक तत्व मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की प्रतिक्रिया
पहले बैठने और धूप-बारिश से बचने की सुविधा थी, अब सड़क किनारे खड़ा रहना पड़ता है।--सुधीर यादव, पीडीडीयू नगर
महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है, जल्द नए प्रतीक्षालय बनने चाहिए।-- अशोक पाल, पीडीडीयू नगर
करोड़ों की परियोजना में यात्री सुविधाओं की अनदेखी हुई है, पुराने प्रतीक्षालयों से कब्जा हटना चाहिए।-- रामफल चौहान, पीडीडीयू नगर
सड़क किनारे भीड़ बढ़ने से दुर्घटना का खतरा रहता है, आधुनिक प्रतीक्षालय जरूरी हैं।--अशोक कुमार, पीडीडीयू नगर
कोट

सड़क चौड़ीकरण के बाद जहां स्थान उपलब्ध है, वहां नए यात्री प्रतीक्षालय बनाने की योजना पर काम किया जाएगा। — सोनू किन्नर, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद, पीडीडीयू नगर

पीडीडीयू नगर के जीटीआर ब्रिज के किनारे यात्री प्रतीक्षालय पर हुआ कब्जा। संवाद

पीडीडीयू नगर के जीटीआर ब्रिज के किनारे यात्री प्रतीक्षालय पर हुआ कब्जा। संवाद

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