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रैन बसेरे में नहीं पहुंच पा रहे लोग, सर्द हवाओं के बीच गुजर रही रात

Mon, 21 Dec 2020 01:08 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Dec 2020 01:08 AM IST
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Rain shelters empty, station and bus, spending the night staring at the stand
पीडीडीयू नगर। शीतलहर और गलन से बचने के लिए राहगीरों व असहाय लोगों के लिए रैन बसेरे बनाए गए हैं। इनमें गद्दे और कंबल भी रखे गए हैं। मगर इनका लोगों को लाभ नहीं मिल रहा। पीडीडीयू नगर में बाजार, स्टेशन और बस स्टैंड से साढ़े तीन किमी दूर रैन बसेरा बनाए गए हैं। वहीं चकिया में ताला लटका हुआ है। चंदौली में भी इंतजाम किए गए हैं मगर इसका लाभ सड़क पर रात गुजारने वालों को नहीं मिल पा रहा है। रविवार की रात जब अमर उजाला की टीम हकीकत जानने के लिए निकली तो पता चला कि पीडीडीयू नगर, चंदौली, चकिया और सैयदराजा में रैन बसेरों में इंतजाम किए गए हैं लेकिन दूरी होने और जानकारी के अभाव में असहाय और राहगीर वहां तक पहुंच नहीं पा रहे। लोग फुटपाथ तथा स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में रात बिताने को विवश हैं।
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पीडीडीयू नगर में दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। एक तो रैन बसेरा लाल बहादुर शास्त्री पार्क में बनाया गया है। यहां रविवार को शाम सवा सात बजे सिर्फ एक यात्री मिला। लोगों ने बताया कि हर दिन सिर्फ एक या दो ही यात्री यहां आते हैं। दूसरा रैन बसेरा अलीनगर में बना है, जहां शाम साढ़े सात बजे तक ठहरने के लिए कोई नहीं पहुंचा था। यहां कमरों में पलंग, गद्दे और कंबल तो रखे हुए थे लेकिन वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। स्टेशन से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित रैन बसेरे में जाने से यात्री कतरा रहे हैं। यात्री सर्द हवाओं के बीच रेलवे स्टेशन पर रात गुजारना मुनासिब समझ रहे हैं। शाम सात बजकर 50 मिनट पर रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों के दो समूह ऐसे मिले जिन्हें ट्रेन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ेगा लेकिन रैन बसेरे की जानकारी नहीं होने के कारण वहां नहीं जा पाए। आगरा के रहने वाले दिलीप को मुंबई जाना था। परिवार के साथ ट्रेन पकड़ने के लिए पीडीडीयू जंक्शन पर पहुंच तो गए लेकिन ट्रेन सोमवार की शाम को होने के कारण वह रेलवे स्टेशन परिसर में इंतजार करने केे लिए विवश थे। वहीं दूसरी तरफ मऊ के रहने वाले जितेंद्र अपने मित्रों के साथ भुवनेश्वर जाने के लिए पीडीडीयू जंक्शन पहुंचे थे। उनकी ट्रेन सोमवार को रात दो बजे थी। रैन बसेरे की जानकारी के अभाव में वह रेलवे स्टेशन पर ही इंतजार कर रहे थे। इसी प्रकार वृद्ध महिला दिलदार नगर से आई थी। उन्हें सुबह मछली लेकर दिलदार नगर जाना था। स्टेशन के बाहर वह कंबल ओढ़कर ट्रेन के आने का इंतजार कर रही थीं।
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चकिया। नगर पंचायत क्षेत्र में रैन बसेरा तो बना दिया गया लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते उस पर रविवार की शाम साढ़े पांच बजे तक ताला लटक रहा था। वहां कोई कर्मचारी भी मौके पर नहीं मिला। रैन बसेरे के प्रति अधिकारियों की लापरवाही के चलते लोग रात में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। यह हाल तब है जब शासन से लेकर स्थानीय प्रशासन रैन बसेरों को चाक चौबंद करने और वहां तक जरूरतमंदों को पहुंचाने के लिए जोर दे रहा है
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सैयदराजा/चंदौली। चंदौली और सैयदाराज नगर पंचायत में भी रैन बसेरेे खोले गए हैं लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में वहां कोई भी नहीं पहुंच पा रहा है। चंदौली नगर पंचायत में बने रैन बसेरे में शाम सात बजे तक कोई नहीं पहुंचा था। वहां कंबल और बेड की व्यवस्था रही मगर ठहरने वाला कोई राहगीर वहां नहीं मिला। यहीं हाल सैयदराजा में था। वहां भी नगर पंचायत में ही एक कमरे में दो बेड का रैन बसेरा बनाया गया है। लेकिन वहां भी कोई नहीं मिला। प्रशासनिक लापरवाही और जानकारी के अभाव में लोग वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
सकलडीहा। सड़क के किनारे जीवकोपार्जन करने वाले लोगों के लिए सर्द रातें गुजारना काफी कठिन हो रहा है। तहसील अधिकारियों के उदासीन रवैये के चलते अब तक वहां अलाव की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है। ऐसे में मलिन बस्ती, सीएचसी के पास व चौराहों पर अलाव नहीं जलाये गए हैं। अलाव के अभाव में राहगीरों को भी काफी मुसीबत हो रही है। समाज सेवी सेचन सिंह यादव, गोबिंद सोनकर, बाबूजान, केशव राजभर, प्रहलाद गुप्त ने तहसील प्रशासन के रवैये के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बाबत तहसीलदार वंदना मिश्रा ने बताया कि शीघ्र ही अलाव की व्यवस्था करा दी जाएगी।

पीडीडीयू नगर। मौसम ने अचानक से करवट ले ली है। बावजूद इसके नगर पालिका प्रशासन अब भी पारा और अधिक नीचे गिरने का इंतजार कर रहा है। नगर में कुल 65 स्थानों पर अलाव जलाये जाते थे। जबकि इस बर्ष अभी सिर्फ 20 से 25 स्थानों पर ही अलाव की व्यवस्था की गई है। नगर पालिका प्रशासन का यह हाल तब है जब कि पारा रात में न्यूनतम सात से आठ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। ऐसे में कई स्थानों पर लोग कागज, कूड़ा जलाकर खुद को गर्म रखने का प्रयास कर रहे हैं।
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