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जमीन के अभाव में दम तोड़ रही गांवों में खेल मैदान बनाने की योजना
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सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के जरिए खेल मैदान बनाने की योजना थी। खेल मैदानों को चिह्नित करने के लिए शासन से डीएम को पत्र भेजा गया था। डीएम ने सभी खंड विकास अधिकारियों को खेल मैदान के लिए जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया था लेकिन जमीन के अभाव में जिले के 734 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनाने की शासन की योजना दम तोड़ रही है।
खेल मैदान बनाने का उद्देश्य था कि खेलकूद से बच्चों की सेहत सुधरे। साथ ही ग्रामीणों को मार्निंग वॉक की सुविधा मिल सके। वहीं कई वर्ष बीतने के बाद भी राजस्व विभाग मैदानों के लिए अभी तक जमीन नहीं खोज सका है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में मनरेगा से मैदान बनाने के लिए लगभग एक बीघा जमीन की आवश्यकता है। विडंबना यह है कि जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनाने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। इसलिए प्रक्रिया अधर में लटकी है। मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने के लिए खेल मैदान का समतलीकरण कराने व मिट्टी भराई करानी थी।
जिले की 734 ग्राम पंचायतों में बनने हैं मैदान
जिले में 734 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनना है। ग्राम पंचायतों की काफी जमीन है। पंचायतों की अनदेखी की वजह से दबंगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रखा है। यहां तक कि पंचायत भवनों में भी भूसा व उपले रखे हैं। डीएम संजीव सिंह ने निरीक्षण के दौरान दुर्व्यवस्था देखी थी। इसको लेकर ब्लाक के अधिकारियों, सचिव व सफाईकर्मी पर गाज भी गिरी थी।
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सड़क पर दौड़ लगाते हैं युवा
ग्रामीण क्षेत्रों के खेल मैदान आज भी देखरेख के अभाव में उपेक्षा के शिकार हैं। कई खेल मैदान झाड़-झंखाड़ से पटे है। इसके चलते गांवों में करीब एक दशक से खेल गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं और प्रतिभावान युवा सड़कों पर दौड़ लगाते नजर आते हैं। वहीं अन्य खेलों के खिलाड़ियों की प्रतिभा भी मैदान नहीं होने से दम तोड़ रही है।
अभिलेखों में दर्ज हैं 302 खेल मैदान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार चकिया विकासखंड में 40, शहाबगंज में 42, सदर में 19, बरहनी में 25, सकलडीहा में 28, चहनियां में 41, धानापुर में 37, नौगढ़ में 33 व नियामताबाद के 37 गांवों में खेल मैदान दर्ज हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सच्चाई जानने के लिए अधिकारियों को भौतिक सत्यापन कराने की जरूरत है।
खिलाड़ियों बोले
ताराजीवनपुर। कोरी गांव के पूर्व भारतीय खिलाड़ी मो. सलीम बताते हैं कि खेल मैदान की कमी के कारण होनहार खिलाड़ियों की प्रतिभा दबी रह जा रही है। अगर खेल मैदान होता तो खिलाड़ियों में काफी उत्साह देखने को मिलता। कोरी गांव के खिलाड़ी राकेश तिवारी ने बताया कि शासन द्वारा भले ही प्रत्येक गांव में खेल मैदान की स्वीकृति मिल चुकी हो लेकिन हकीकत यह है कि आज तक कहीं भी खेल मैदान नहीं बनाया जा सका है। सैदपुरा गांव के भीम सिंह ने बताया कि खेत खलिहान से गांव के होनहार खिलाड़ियों ने जनपद व प्रदेश का नाम रोशन किया है। धूसखास गांव निवासी दिनेश गोंड ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए भले ही शासन द्वारा खेल मैदान के लिए स्वीकृति दे दी गई हो लेकिन हकीकत यह है कि कहीं खेल मैदान नहीं बनाया गया है।
ग्राम पंचायतों में मनरेगा खेल मैदान बनाने की योजना है। जिला प्रशासन ग्राम पंचायतों में जमीन ढूंढकर उपलब्ध कराए तो खेल मैदान बनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों में इसके लिए जमीन का अभाव है। - आर राम्या, उपायुक्त मनरेगा
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खेल मैदान बनाने का उद्देश्य था कि खेलकूद से बच्चों की सेहत सुधरे। साथ ही ग्रामीणों को मार्निंग वॉक की सुविधा मिल सके। वहीं कई वर्ष बीतने के बाद भी राजस्व विभाग मैदानों के लिए अभी तक जमीन नहीं खोज सका है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में मनरेगा से मैदान बनाने के लिए लगभग एक बीघा जमीन की आवश्यकता है। विडंबना यह है कि जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनाने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। इसलिए प्रक्रिया अधर में लटकी है। मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने के लिए खेल मैदान का समतलीकरण कराने व मिट्टी भराई करानी थी।
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जिले की 734 ग्राम पंचायतों में बनने हैं मैदान
जिले में 734 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनना है। ग्राम पंचायतों की काफी जमीन है। पंचायतों की अनदेखी की वजह से दबंगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रखा है। यहां तक कि पंचायत भवनों में भी भूसा व उपले रखे हैं। डीएम संजीव सिंह ने निरीक्षण के दौरान दुर्व्यवस्था देखी थी। इसको लेकर ब्लाक के अधिकारियों, सचिव व सफाईकर्मी पर गाज भी गिरी थी।
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सड़क पर दौड़ लगाते हैं युवा
ग्रामीण क्षेत्रों के खेल मैदान आज भी देखरेख के अभाव में उपेक्षा के शिकार हैं। कई खेल मैदान झाड़-झंखाड़ से पटे है। इसके चलते गांवों में करीब एक दशक से खेल गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं और प्रतिभावान युवा सड़कों पर दौड़ लगाते नजर आते हैं। वहीं अन्य खेलों के खिलाड़ियों की प्रतिभा भी मैदान नहीं होने से दम तोड़ रही है।
अभिलेखों में दर्ज हैं 302 खेल मैदान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार चकिया विकासखंड में 40, शहाबगंज में 42, सदर में 19, बरहनी में 25, सकलडीहा में 28, चहनियां में 41, धानापुर में 37, नौगढ़ में 33 व नियामताबाद के 37 गांवों में खेल मैदान दर्ज हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सच्चाई जानने के लिए अधिकारियों को भौतिक सत्यापन कराने की जरूरत है।
खिलाड़ियों बोले
ताराजीवनपुर। कोरी गांव के पूर्व भारतीय खिलाड़ी मो. सलीम बताते हैं कि खेल मैदान की कमी के कारण होनहार खिलाड़ियों की प्रतिभा दबी रह जा रही है। अगर खेल मैदान होता तो खिलाड़ियों में काफी उत्साह देखने को मिलता। कोरी गांव के खिलाड़ी राकेश तिवारी ने बताया कि शासन द्वारा भले ही प्रत्येक गांव में खेल मैदान की स्वीकृति मिल चुकी हो लेकिन हकीकत यह है कि आज तक कहीं भी खेल मैदान नहीं बनाया जा सका है। सैदपुरा गांव के भीम सिंह ने बताया कि खेत खलिहान से गांव के होनहार खिलाड़ियों ने जनपद व प्रदेश का नाम रोशन किया है। धूसखास गांव निवासी दिनेश गोंड ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए भले ही शासन द्वारा खेल मैदान के लिए स्वीकृति दे दी गई हो लेकिन हकीकत यह है कि कहीं खेल मैदान नहीं बनाया गया है।
ग्राम पंचायतों में मनरेगा खेल मैदान बनाने की योजना है। जिला प्रशासन ग्राम पंचायतों में जमीन ढूंढकर उपलब्ध कराए तो खेल मैदान बनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों में इसके लिए जमीन का अभाव है। - आर राम्या, उपायुक्त मनरेगा