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फोन होता रहा नहीं आए चिकित्सक, बीमार की हुई मौत 5
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पीडीडीयू नगर। पूर्व मध्य रेलवे के जिस लोको मंडलीय अस्पताल में मरीजों की सेवा में उम्र गुजार दी और सेवा निवृत्त होकर घर लौटे श्रवण कुमार ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कभी बीमार होने पर उसी अस्पताल में उसे इलाज के अभाव में दम तोड़ना होगा। बुधवार की शाम सीने में दर्द होने पर उसे परिवार वालों ने लोको अस्पताल पीडीडीयू नगर में भर्ती कराया। लेकिन इस दौरान वहां कोई चिकित्सक नहीं था। अस्पताल के स्टाफ चिकित्सक को फोन करते रहे मगर नहीं आए और रिटायर्ड रेलकर्मी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। इससे नाराज रेलकर्मियों ने अस्पताल गेट पर बृहस्पतिवार को प्रदर्शन किया। लापरवाह चिकित्सक को हटाने की मांग की। मौके पर पहुंचे डीपीओ ने कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। वहीं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा है।
पूर्व मध्य रेलवे लोको मंडलीय अस्पताल में कुक पद से छह माह पहले सेवानिवृत्त हुए सरवन कुमार (60) अस्पताल के पीछे तारनपुर में मकान बनाकर रह रहा था। बुधवार की देर शाम उसके सीने में तेज दर्द शुरू हुआ तो परिवार वाले उसे लेकर लोको मंडलीय अस्पताल में पहुंचे। अस्पताल में संविदा चिकित्सक डॉ. समीरा की इमरजेंसी ड्यूटी थी लेकिन वह अस्पताल में नहीं थी। सरवन की हालत गंभीर देख अस्पताल कर्मियों ने आईसीयू में भर्ती कर प्राथमिक उपचार शुरू किया। इस दौरान अस्पताल कर्मियों के साथ परिवार वालों ने भी डॉक्टर को फोन लगाया लेकिन वह नहीं पहुंचीं। देर रात सरवन की मौत हो गई। इससे परिवार वाले आक्रोशित हो गए। परिवार वालों का कहना है कि पूरा जीवन अस्पताल में मरीजों की सेवा में बिता दी, क्या पता था कि यही अस्पताल धोखा दे देगा। बृहस्पतिवार की सुबह ईसीआरकेयू के नेता भी पहुंच गए और लापरवाह संविदा चिकित्सक को हटाने की मांग के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। मौके पर पहुंचे मंडल कार्मिक अधिकारी गोपाल मंडल ने यूनियन नेताओं से वार्ता की और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रदर्शन करने वालों में सुभाष सिंह, अशोक सिंह, सीबी राय, रमेश सिंह, ईआर सिंह, सुरत सेटठी, एसपी सिन्हा, जीवनाथ यादव रहे।
रिटायर्ड रेलकर्मी के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है। परिवार वालों और यूनियन के पदाधिकारियों के बयान के आधार पर संविदा चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट डीआरएम को भेज दी गई है। अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। डॉ. आरके मिश्र मुख्य चिकित्साधीक्षक
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पीडीडीयू नगर। चिकित्सकों की लापरवाही से सेवानिवृत्त रेलकर्मी की मौत के बाद परिवार वालों का रो रोकर हाल बेहाल हो गया। पत्नी मीना देवी बार बार यही कह रही थी कि काश डॉक्टर मिल गए होते तो पति जिंदा होते। इलाज नहीं कर सकते तो कम से कम समय से पति को रेफर ही कर दिया होता तो जान बच सकती थी। बेटी सुमन और बेटा सोनू दोनों बीएड कर रहे हैँ। पिता की मौत से दोनों का रोकर हाल बेहाल रहा।
पीडीडीयू नगर। अस्पताल में इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक के न पहुंचने पर किसी की मौत की यह पहली घटना नहीं है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले ही रेलकर्मी राम नरेश की माता की तबीयत खराब थी। अस्पताल लाने पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक नहीं मिलीं। कई बार इसकी सूचना दी गई लेकिन चिकित्सक नहीं पहुंचीं। इसकी शिकायत हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा यह भी है कि संविदा चिकित्सक के पति डीआरएम आफिस में अच्छे पद पर तैनात हैं। इस वजह से चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।
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पूर्व मध्य रेलवे लोको मंडलीय अस्पताल में कुक पद से छह माह पहले सेवानिवृत्त हुए सरवन कुमार (60) अस्पताल के पीछे तारनपुर में मकान बनाकर रह रहा था। बुधवार की देर शाम उसके सीने में तेज दर्द शुरू हुआ तो परिवार वाले उसे लेकर लोको मंडलीय अस्पताल में पहुंचे। अस्पताल में संविदा चिकित्सक डॉ. समीरा की इमरजेंसी ड्यूटी थी लेकिन वह अस्पताल में नहीं थी। सरवन की हालत गंभीर देख अस्पताल कर्मियों ने आईसीयू में भर्ती कर प्राथमिक उपचार शुरू किया। इस दौरान अस्पताल कर्मियों के साथ परिवार वालों ने भी डॉक्टर को फोन लगाया लेकिन वह नहीं पहुंचीं। देर रात सरवन की मौत हो गई। इससे परिवार वाले आक्रोशित हो गए। परिवार वालों का कहना है कि पूरा जीवन अस्पताल में मरीजों की सेवा में बिता दी, क्या पता था कि यही अस्पताल धोखा दे देगा। बृहस्पतिवार की सुबह ईसीआरकेयू के नेता भी पहुंच गए और लापरवाह संविदा चिकित्सक को हटाने की मांग के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। मौके पर पहुंचे मंडल कार्मिक अधिकारी गोपाल मंडल ने यूनियन नेताओं से वार्ता की और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रदर्शन करने वालों में सुभाष सिंह, अशोक सिंह, सीबी राय, रमेश सिंह, ईआर सिंह, सुरत सेटठी, एसपी सिन्हा, जीवनाथ यादव रहे।
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रिटायर्ड रेलकर्मी के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है। परिवार वालों और यूनियन के पदाधिकारियों के बयान के आधार पर संविदा चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट डीआरएम को भेज दी गई है। अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। डॉ. आरके मिश्र मुख्य चिकित्साधीक्षक
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पीडीडीयू नगर। चिकित्सकों की लापरवाही से सेवानिवृत्त रेलकर्मी की मौत के बाद परिवार वालों का रो रोकर हाल बेहाल हो गया। पत्नी मीना देवी बार बार यही कह रही थी कि काश डॉक्टर मिल गए होते तो पति जिंदा होते। इलाज नहीं कर सकते तो कम से कम समय से पति को रेफर ही कर दिया होता तो जान बच सकती थी। बेटी सुमन और बेटा सोनू दोनों बीएड कर रहे हैँ। पिता की मौत से दोनों का रोकर हाल बेहाल रहा।
पीडीडीयू नगर। अस्पताल में इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक के न पहुंचने पर किसी की मौत की यह पहली घटना नहीं है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले ही रेलकर्मी राम नरेश की माता की तबीयत खराब थी। अस्पताल लाने पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक नहीं मिलीं। कई बार इसकी सूचना दी गई लेकिन चिकित्सक नहीं पहुंचीं। इसकी शिकायत हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा यह भी है कि संविदा चिकित्सक के पति डीआरएम आफिस में अच्छे पद पर तैनात हैं। इस वजह से चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।