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अब सात समंदर पार भी ब्लैक राइस बन रहा पसंद, आस्ट्रेलिया के बाद अब इन देशों में भेजने की तैयारी

Tue, 01 Dec 2020 11:11 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंदौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंदौली Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Tue, 01 Dec 2020 11:11 PM IST
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Now black rice is also becoming a choice across the seven seas
कंदवा क्षेत्र में काला चावल की फसल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

चंदौली जिले की पहचान बने चुके ब्लैक राइस की मांग अब सात समंदर पार भी होने लगी है। औषधीय गुणों से भरपूर चावल को पिछले वर्ष आस्ट्रेलिया भेजा गया था। अब इसकी मांग देखते हुए खाड़ी देशों में बाजार की संभावना बढ़ गई है। अब वहां भी चावल को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। देश के साथ विदेशों में मांग बढ़ने से यहां के किसान खुश हैं कि इससे उनकी आय  बढ़ेेगी।  

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ब्लैक राइस की कीमत 80 रुपये से प्रति किलो से अधिक कीमत मिलने से इसकी खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल छह सौ कुंतल चावल आस्ट्रेलिया भेजा गया था। इतना ही  चावल खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष पांच सौ किसानों ने 250 हेक्टेयर में ब्लैक राइस की खेती की थी। अब उपज का अधिक मूल्य मिलने लगा है तो खेती करने वाले किसान भी बढ़ गए हैं। वर्तमान खरीफ के सीजन में एक हजार किसानों ने 500 हेक्टेयर में काले चावल की खेती की है। किसानों को उम्मीद है कि इस वर्ष उन्हें इसे बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही, पिछले वर्ष की तुलना में आमदनी भी अधिक होगी। 

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औषधीय गुणों के चलते मिली पहचान
काला चावल में तमाम औषधीय गुण मौजूद हैं। एंथ्रोसाइनिंग की वजह से इसका रंग काला है। वहीं, फाइबर, विटामिन-ई, जिंक और आयरन की भरपूर मात्रा है। इसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कैंसर व मधुमेह की बीमारी से निजात दिलाने में भी कारगर है।
 

चावल की गुणवत्ता हो चुकी है प्रमाणित
ब्लैक राइस में औषधीय गुण मौजूद है। इसकी पुष्टि इंडियन राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद, फूड टेक्नॉलाजी प्रयागराज और इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट बीएचयू ने जांच के बाद की है। चावल में एंथ्रोसाइनिंग, फाइबर, विटामिन-ई, जिंक व आयरन की भरपूर मात्रा है। इसके अलावा पौष्टिक गुण होने का भी दावा है। 

जिले का ब्रांड बनने के करीब  
ब्लैक राइस को कलेक्टिव मार्क मिल चुका है। यह उपलब्धि जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त पहल से मिली है। कलेक्टिव मार्क मिलने से काले चावल को चंदौली जिले के एक विशेष उत्पाद के रूप में मान्यता प्राप्त हो चुकी है। इससे उत्पाद की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में आने वाली दिक्कतें भी खत्म हो गई हैं।
 

पिछले वर्ष ब्लैक साइस की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज के बदले 85 रुपये प्रति कुंतल की दर से भुगतान किया गया था। खरीदे गए धान को कुटाई कराने के बाद छह सौ कुंतल संबंधित फर्म की ओर से आस्ट्रेलिया निर्यात किया गया था। आगे भी किसान ब्लैक राइस की खेती करने में रुचि ले रहे हैं। ऐसे में उत्पाद को विश्वस्तर पर पहुंचाने में प्रशासन जुटा हुआ है। 
राजीव कुमार भारती, उप कृषि निदेशक।

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