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अधूरे पड़े सीएचसी को पूरा कराने के लिए सांसद ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
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पीडीडीयू नगर। जिले के चहनियां, बरहनी, नियामताबाद और शहाबगंज में अधूरे पड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चंदौली सांसद और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय की नजर गई है। उन्होंने दस वर्षों से निर्माणाधीन सीएचसी को पूरा कराकर चालू कराने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वस्थ्य मंत्री को भी पत्र के माध्यम से इस समस्या से अवगत कराया है।
पत्र के माध्यम से मांग किया कि चंदौली में 10 वर्षों से अपूर्ण चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जो चहनियां, बरहनी, नियमताबाद (चंदासी) एवं शाहाबगंज को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर चालू किया जाए। पत्र के माध्यम से डॉ. पांडेय ने योजना अवधि में कार्य पूरा न करने के लिए दोषी अधिकारी और कर्मचारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने, चारो अपूर्ण सीएचसी की मानक, गुणवत्ता के अनुरूप खर्च धनराशि की जांच प्रतिष्ठित आईआईटी अथवा किसी तटस्थ संस्था से कराने की मांग की। कहा कि चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पूरा कराने के लिए क्रिटिकल गैप से धनराशि आवंटित कर काम पूरा कराया जाए। इसका समायोजन बाद में निर्माण एजेंसी के लाभांश से अथवा उत्तरदाई अधिकारी से वसूली करके कराया जाए। जांच जल्दी पूरा करने के प्रयास किया जाए। जब तक चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरा नहीं होते हैं तब तक उनके हिस्से की आवंटित स्वास्थ्य सुविधाएँ एवं स्टॉफ का आवंटन न रोका जाए बल्कि निर्माण स्थल के समीप के पीएचसी अथवा रिक्त सार्वजनिक भवन में स्थाई रूप से कार्य प्रारंभ कराया जाए। इससे लोगों को तात्कालिक रूप से उसका लाभ मिल सके।
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पत्र के माध्यम से मांग किया कि चंदौली में 10 वर्षों से अपूर्ण चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जो चहनियां, बरहनी, नियमताबाद (चंदासी) एवं शाहाबगंज को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर चालू किया जाए। पत्र के माध्यम से डॉ. पांडेय ने योजना अवधि में कार्य पूरा न करने के लिए दोषी अधिकारी और कर्मचारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने, चारो अपूर्ण सीएचसी की मानक, गुणवत्ता के अनुरूप खर्च धनराशि की जांच प्रतिष्ठित आईआईटी अथवा किसी तटस्थ संस्था से कराने की मांग की। कहा कि चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पूरा कराने के लिए क्रिटिकल गैप से धनराशि आवंटित कर काम पूरा कराया जाए। इसका समायोजन बाद में निर्माण एजेंसी के लाभांश से अथवा उत्तरदाई अधिकारी से वसूली करके कराया जाए। जांच जल्दी पूरा करने के प्रयास किया जाए। जब तक चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरा नहीं होते हैं तब तक उनके हिस्से की आवंटित स्वास्थ्य सुविधाएँ एवं स्टॉफ का आवंटन न रोका जाए बल्कि निर्माण स्थल के समीप के पीएचसी अथवा रिक्त सार्वजनिक भवन में स्थाई रूप से कार्य प्रारंभ कराया जाए। इससे लोगों को तात्कालिक रूप से उसका लाभ मिल सके।
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