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Chandauli News: बिना मानक के चल रहे 200 से ज्यादा कोचिंग सेंटर, सिर्फ 30 का पंजीयन
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पीडीडीयू नगर। जिले में मानक को दरकिनार कर जगह-जगह कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। 200 से ज्यादा कोचिंग सेंटर चल रहे हैं लेकिन सिर्फ 30 का पंजीयन कराया गया है। इन संस्थानों में छात्र-छात्राओं से मनमाना फीस तो वसूली जा रही है लेकिन शौचालय, पार्किंग और सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई। वहीं, अग्निशमन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन ने 10 वर्षों में इनकी कभी जांच नहीं की। कोचिंग संस्थानों की मनमानी और अफसरों की लापरवाही कभी कोई हादसा हुआ तो भारी पड़ सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली में बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इससे भी ज्यादा लापरवाही चंदौली जिले में देखने को मिल रही है। यहां मानक को दरकिनार कर बिना पंजीयन के कोचिंग सेंटरों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। गलियों और मुहल्लों में दो सौ से ज्यादा कोचिंग सेंटर चल रहे हैं लेकिन सिर्फ 30 संचालकों ने पंजीकरण कराया है। वहीं, ज्यादातर कोचिंग सेंटरों में न तो कुशल शिक्षक हैं और न कोई इंतजाम हैं। किसी संस्थान ने अग्निशमन विभाग से न तो एनओसी ली है और न अग्निशमन यंत्र रखे हैं। बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, पेयजल और पार्किंग तक के इंतजाम नहीं हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण अवैध कोचिंग सेंटर फल-फूल रहे हैं।
इनसेट
पंजीयन कराने पर 25 हजार तक देना पड़ता है शुल्क
कोचिंग सेंटर का पंजीयन कराने के लिए शुल्क जमा करना होता है। 49 बच्चों से कम वाले कोचिंग सेंटर का पंजीयन कराने पर दस हजार रुपये शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। वहीं, 49 बच्चों से ज्यादा वाले संस्थान के पंजीकरण कराने पर 25 हजार रुपये शुल्क लगता है। संवाद
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कोट-- -
कोचिंग सेंटर के संचालन के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। समय-समय पर इसकी जानकारी दी जाती है। पंजीकरण के बिन चल रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - दल सिंगार यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
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देश की राजधानी दिल्ली में बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इससे भी ज्यादा लापरवाही चंदौली जिले में देखने को मिल रही है। यहां मानक को दरकिनार कर बिना पंजीयन के कोचिंग सेंटरों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। गलियों और मुहल्लों में दो सौ से ज्यादा कोचिंग सेंटर चल रहे हैं लेकिन सिर्फ 30 संचालकों ने पंजीकरण कराया है। वहीं, ज्यादातर कोचिंग सेंटरों में न तो कुशल शिक्षक हैं और न कोई इंतजाम हैं। किसी संस्थान ने अग्निशमन विभाग से न तो एनओसी ली है और न अग्निशमन यंत्र रखे हैं। बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, पेयजल और पार्किंग तक के इंतजाम नहीं हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण अवैध कोचिंग सेंटर फल-फूल रहे हैं।
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पंजीयन कराने पर 25 हजार तक देना पड़ता है शुल्क
कोचिंग सेंटर का पंजीयन कराने के लिए शुल्क जमा करना होता है। 49 बच्चों से कम वाले कोचिंग सेंटर का पंजीयन कराने पर दस हजार रुपये शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। वहीं, 49 बच्चों से ज्यादा वाले संस्थान के पंजीकरण कराने पर 25 हजार रुपये शुल्क लगता है। संवाद
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कोट
कोचिंग सेंटर के संचालन के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। समय-समय पर इसकी जानकारी दी जाती है। पंजीकरण के बिन चल रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - दल सिंगार यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक