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जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति ही मोक्ष

Mon, 07 Sep 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली Updated Mon, 07 Sep 2015 01:56 AM IST
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Moksha is liberation from the cycle of birth
स्वामी अड़गड़ानन्द महाराज के कृपापात्र मास्टर बाबा ने श्रीकृष्ण
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जन्माष्टमी पर आयोजित गीता पाठ के समापन पर बनौली खुर्द गांव में सत्संग में भक्तों को आशीर्वचन दिया।

 मास्टर बाबा ने कहा कि जन्म वही सराहनीय है जिसमें मृत्यु न हो और मृत्यु वही सराहनीय है, जिसमें पुनर्जन्म न हो। आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाए, वही मोक्ष है।

इसके लिए सद्गुरु की शरण में जाना आवश्यक है। सांसारिक जीवन मनुष्य को मिलते रहते हैं, लेकिन मोक्ष की प्राप्ति के लिए गुरु के शरण में आना जरूरी है।

उन्होंने नारायण-बालि प्रसंग पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा कि एक परमात्मा के प्रति अपने को समर्पित कर देना नारायण बलि है।

यह तभी सम्भव है, जब सद्गुरु का मार्गदर्शन मिले। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।



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