पीडीडीयू नगर। ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में 20 मई को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को स्थानीय दवा विक्रेता समिति ने समर्थन देने का निर्णय लिया है। मंगलवार को आयोजित बैठक में समिति पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल व्यापारिक हितों का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है। समिति के संगठन मंत्री विकास सिंह ने कहा कि दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है, जिसे बिना पर्याप्त नियंत्रण और चिकित्सकीय निगरानी के ऑनलाइन बेचा जा सके। उन्होंने कहा कि दवा व्यापार केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा और नैतिक जिम्मेदारी का क्षेत्र है, जहां मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विकास सिंह ने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन संबंधी नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं करते। इससे दवाओं के गलत उपयोग, ओवरडोज और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के दवा उपलब्ध कराना गंभीर चिंता का विषय है। दवा विक्रेताओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई ऑनलाइन दवा आपूर्ति से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की। उनका कहना है कि अब परिस्थितियां सामान्य हो चुकी हैं, इसलिए ई-फार्मेसी से जुड़े नियमों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। समिति ने सरकार से ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर सख्त नियंत्रण लागू करने और छोटे व मध्यम दवा विक्रेताओं के हितों की रक्षा करने की मांग की है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।