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सिंचाई विभाग का नहरों के माध् यम से 38 तालाबों को भरने का दावा
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पीडीडीयू नगर। प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का तालाबों को नहरों के जरिए पानी पहुंचाकर भरने का निर्देश आने के बाद सिंचाई विभाग ने दावा किया है कि नहरों के माध्यम से जनपद के 38 तालाबों को पानी से भर दिया गया है। तालाबों में पानी भर जाने से ग्रामीणों के साथ पशु-पक्षियों की पानी की समस्या का काफी हद तक समाधान हो गया है। तालाबों को नरायनपुर पंप कैनाल सहित चंद्रप्रभा व मूसाखांड बांध के पानी से नहरों के माध्यम से भरा गया है। बावजूद इसके जिले के करीब छोटे-बड़े पांच सौ तालाब व पोखरे अभी भी पानी की बाट जोह रहे हैं।
विभागीय लापरवाही से जिले की अधिकांश नहरें झाड़-झंखाड़ों से पटी हैं। इससे तालाबों तक पानी पहुंचने में कठिनाई हो रही है। वहीं नरायनपुर पंप कैनाल से भी कम क्षमता से पानी छोड़े जाने से नहरों की तलहटी में ही पानी रह जा रहा है। इससे तालाबों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वर्तमान में पड़ रही अप्रत्याशित गर्मी, मौसम के बदलते ममिजाज व लगातार चढ़ते पारे से क्षेत्र के अधिकांश तालाबों का पानी सूख जाने से पशु-पक्षियों के सामने पीने के पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि सूख चुके तालाबों को प्रशासनिक स्तर से भले ही भरने की व्यवस्था के निर्देश जारी किए गए हों लेकिन इस दिशा में अभी तक कुछ विशेष कार्य नहीं किया जा सका है। सिंचाई विभाग नहरों के माध्यम से जिले में मात्र 38 तालाबों तक ही पानी पहुंचा सका है। जलशक्ति मंत्री ने तालाबों को भरे रखने का निर्देश तो जारी कर दिया है पर जिले में इसपर पूरी तरह अमल नहीं हो पा रहा है।
ताराजीवनपुर। क्षेत्र की लगभग समस्त माइनर झाड़-झंखाड से पूरी तरह पटी हुई है। भीषण गर्मी में ताल तलैया व तालाब सूखते जा रहे हैं जिससे पशु पक्षियों को भी पानी के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। शासन की ओर से सभी माइनरों व नहरों की साफ-सफाई कर तालाबों तक पानी पहुंचाने का निर्देश जारी होने के बाद भी इस दिशा में कार्य नहीं किया गया है।
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कंदवा। प्रदेश के जलशक्ति मंत्री के निर्देश के बाद भी क्षेत्र के पई, असना, अरंगी सहित कई अन्य गांवों के तालाबों में अब तक पानी नहीं भरा जा सका है। इससे प्यासे पशु-पक्षी पानी के अभाव में इधर- उधर भटकने को विवश हैं जबकि सिंचाई विभाग तालाबों को भरने का दावा कर रहा है।
जिले के तालाबों को भरने के लिए मिर्जापुर जिला स्थित नारायनपुर पंप कैनाल को चलाया तो गया है पर पानी नहरों की तलहटी में ही सिमटा है। इससे कुलावा नहीं पकड़ने से पानी का नहरों के रास्ते तालाबों में जाना संभव नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने जिलाधिकारी से और क्षमता से पंपों को चलाकर तालाबों को भरने की मांग की है।
जिले में नहरों के जरिए 38 प्रमुख तालाबों को पानी से भर दिया गया है। शेष को भी भरने के लिए नहरों की सफाई कराई जा रही है। वहीं कुछ तालाब ऐसे भी हैं जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन है। शीघ्र ही जिले के सभी प्रमुख तालाबों को पानी से भर दिया जाएगा। सर्वेशचंद्र सिन्हा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
कंदवा। भूगर्भ जल स्तर सुधारने और बरसाती पानी के संरक्षण और इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने खेत तालाब योजना संचालित की है। इस तकनीक से मनरेगा जॉब कार्डधारकों को रोजगार भी मिलेगा।
खेत तालाब भूगर्भ जल का स्तर सुधारने में भी सहायक साबित हो रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम पंचायत के तालाबों की खोदाई के साथ ही शासन ने लघु सीमांत किसानों के खेतों में खेत तालाब के निर्माण को भी अनुमति दी है। इससे गांव में मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों को रोजगार का एक नया जरिया मिला है। वहीं किसानों को भी सिंचाई के लिए बेहतर साधन मिलना शुरू हो गया है। खेत के एक हिस्से में बनने वाले खेत तालाब का मकसद बरसाती पानी को इसमें संरक्षित करके किसान अपने खेत में फसलों की सिंचाई के इस्तेमाल में ले सकते हैं। वहीं भूगर्भ जल स्तर में सुधार करने में खेत तालाब सहयोगी साबित होंगे। इस संबंध में एपीओ बरहनी आशीष कुमार सिंह ने बताया कि मनरेगा के तहत लघु सीमांत किसानों को अपने खेत में खेत तालाब बनवाने के लिए मनरेगा से प्रस्ताव बनवाना होगा। इसके लिए सिर्फ लघु सीमांत किसान, बीपीएल सूची में शामिल किसान, पट्टाधारक व अनुसूचित जाति व जनजाति के किसान आवेदन कर सकते हैं। इनका प्रस्ताव मंजूर होने के बाद खेत तालाब बनवाया जा सकेगा।
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विभागीय लापरवाही से जिले की अधिकांश नहरें झाड़-झंखाड़ों से पटी हैं। इससे तालाबों तक पानी पहुंचने में कठिनाई हो रही है। वहीं नरायनपुर पंप कैनाल से भी कम क्षमता से पानी छोड़े जाने से नहरों की तलहटी में ही पानी रह जा रहा है। इससे तालाबों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वर्तमान में पड़ रही अप्रत्याशित गर्मी, मौसम के बदलते ममिजाज व लगातार चढ़ते पारे से क्षेत्र के अधिकांश तालाबों का पानी सूख जाने से पशु-पक्षियों के सामने पीने के पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि सूख चुके तालाबों को प्रशासनिक स्तर से भले ही भरने की व्यवस्था के निर्देश जारी किए गए हों लेकिन इस दिशा में अभी तक कुछ विशेष कार्य नहीं किया जा सका है। सिंचाई विभाग नहरों के माध्यम से जिले में मात्र 38 तालाबों तक ही पानी पहुंचा सका है। जलशक्ति मंत्री ने तालाबों को भरे रखने का निर्देश तो जारी कर दिया है पर जिले में इसपर पूरी तरह अमल नहीं हो पा रहा है।
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ताराजीवनपुर। क्षेत्र की लगभग समस्त माइनर झाड़-झंखाड से पूरी तरह पटी हुई है। भीषण गर्मी में ताल तलैया व तालाब सूखते जा रहे हैं जिससे पशु पक्षियों को भी पानी के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। शासन की ओर से सभी माइनरों व नहरों की साफ-सफाई कर तालाबों तक पानी पहुंचाने का निर्देश जारी होने के बाद भी इस दिशा में कार्य नहीं किया गया है।
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कंदवा। प्रदेश के जलशक्ति मंत्री के निर्देश के बाद भी क्षेत्र के पई, असना, अरंगी सहित कई अन्य गांवों के तालाबों में अब तक पानी नहीं भरा जा सका है। इससे प्यासे पशु-पक्षी पानी के अभाव में इधर- उधर भटकने को विवश हैं जबकि सिंचाई विभाग तालाबों को भरने का दावा कर रहा है।
जिले के तालाबों को भरने के लिए मिर्जापुर जिला स्थित नारायनपुर पंप कैनाल को चलाया तो गया है पर पानी नहरों की तलहटी में ही सिमटा है। इससे कुलावा नहीं पकड़ने से पानी का नहरों के रास्ते तालाबों में जाना संभव नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने जिलाधिकारी से और क्षमता से पंपों को चलाकर तालाबों को भरने की मांग की है।
जिले में नहरों के जरिए 38 प्रमुख तालाबों को पानी से भर दिया गया है। शेष को भी भरने के लिए नहरों की सफाई कराई जा रही है। वहीं कुछ तालाब ऐसे भी हैं जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन है। शीघ्र ही जिले के सभी प्रमुख तालाबों को पानी से भर दिया जाएगा। सर्वेशचंद्र सिन्हा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
कंदवा। भूगर्भ जल स्तर सुधारने और बरसाती पानी के संरक्षण और इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने खेत तालाब योजना संचालित की है। इस तकनीक से मनरेगा जॉब कार्डधारकों को रोजगार भी मिलेगा।
खेत तालाब भूगर्भ जल का स्तर सुधारने में भी सहायक साबित हो रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम पंचायत के तालाबों की खोदाई के साथ ही शासन ने लघु सीमांत किसानों के खेतों में खेत तालाब के निर्माण को भी अनुमति दी है। इससे गांव में मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों को रोजगार का एक नया जरिया मिला है। वहीं किसानों को भी सिंचाई के लिए बेहतर साधन मिलना शुरू हो गया है। खेत के एक हिस्से में बनने वाले खेत तालाब का मकसद बरसाती पानी को इसमें संरक्षित करके किसान अपने खेत में फसलों की सिंचाई के इस्तेमाल में ले सकते हैं। वहीं भूगर्भ जल स्तर में सुधार करने में खेत तालाब सहयोगी साबित होंगे। इस संबंध में एपीओ बरहनी आशीष कुमार सिंह ने बताया कि मनरेगा के तहत लघु सीमांत किसानों को अपने खेत में खेत तालाब बनवाने के लिए मनरेगा से प्रस्ताव बनवाना होगा। इसके लिए सिर्फ लघु सीमांत किसान, बीपीएल सूची में शामिल किसान, पट्टाधारक व अनुसूचित जाति व जनजाति के किसान आवेदन कर सकते हैं। इनका प्रस्ताव मंजूर होने के बाद खेत तालाब बनवाया जा सकेगा।