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‘पुल क्षतिग्रस्त है’ का बोर्ड लगाकर सिंचाई विभाग ने कर ली कोरमपूर्ति

Sun, 13 Nov 2022 05:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Nov 2022 05:00 AM IST
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Irrigation Department has done quorum by putting a board of 'bridge is damaged'
घोसवा क्षतिग्रस्त पुल का लगा बोर्ड - फोटो : CHANDAULI
कंदवा। क्षेत्र के घोसवा गांव के पास नारायनपुर पंप कैनाल से निकली नहर पर रेलिंग विहीन जर्जर और क्षतिग्रस्त पुलिया दुर्घटना को दावत दे रही है। लोग जान जोखिम में डालकर इस पर यात्रा करने को विवश हैं। सिंचाई विभाग ने पुलिया पर ‘पुल क्षतिग्रस्त है’ का बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लिया है। इसे लेकर लोगों में विभागीय अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रति काफी नाराजगी हैं।
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घोसवा गांव को सैयदराजा-जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाले बरहनी-घोसवा मार्ग पर नरायनपुर से निकली बड़ी नहर पर घोसवा गांव के पास बने पुल की रेलिंग और स्लैब करीब 10 वर्ष पूर्व टूट कर नहर में गिर गया था।
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रेलिंग विहीन क्षतिग्रस्त और जर्जर पुल से गिरकर अक्सर लोग घायल होते रहते हैं। लोगों ने विभागीय अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से कई बार पुल के मरम्मत की मांग की लेकिन पुल की मरम्मत नहीं हो सकी है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एक्सईएन सर्वेशचंद्र सिन्हा ने कहा कि पुलिया के मरम्मत के लिए कार्ययोजना शासन को भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही मरम्मत कार्य करा दिया जाएगा।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कई बार पुल का निरीक्षण किया और पुल के जल्द ही मरम्मत का वादा भी किया लेकिन आज तक वादा पूरा नहीं हो सका है। उन्हें शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार है। -अनुज सिंह, इमिलिया
पुलिया की हालत काफी खराब हो गई है। रेलिंग और स्लैब टूट कर नहर में गिर गए हैं। ग्रामीणों के काफी भाग दौड़ के बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यह पुलिया बरहनी व सकलडीहा ब्लॉक को आपस में जोड़ती है। - मुन्ना सिंह, घोसवा
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कई बार पुल का निरीक्षण किया और पुल के जल्द ही निर्माण का वादा भी किया लेकिन पुल तो बना नहीं लेकिन विभाग ने क्षतिग्रस्त पुल का बोर्ड जरूर लगा दिया है। - मनीष सिंह, जमुड़ा

क्षतिग्रस्त पुलिया पर 10 वर्ष बाद भी किसी जिम्मेदारा की नजर नहीं पड़ी है। किसानों को धान की कटाई के लिए खेतों तक हार्वेस्टर पहुंचाने में कई किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर करनी पड़ेगी। - सच्चिदानंद सिंह, घोसवा।
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