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झाड़-झंखाड़ से पटी दर्जनों माइनर सिंचाई में बनीं हैं बाधक
Wed, 26 Jun 2019 10:05 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
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Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jun 2019 10:05 AM IST
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आषाढ़ माह आरंभ होने के साथ ही किसानों के कदम धान की नर्सरी डालने के लिए खेतों की ओर बढ़ने लगे हैं। खेतों की ओर बढ़ रहे उनके पांव तब ठिठकने लग रहे हैं जब वे नहरों को सूखा और झाड़-झंखाड़ से पटा देख रहे हैं। जिले की कई नहरें व माइनर अभी भी झाड़ियों से पटी हैं जबकि सिंचाई विभाग का दावा है कि बीते नवंबर माह में नहरों की सफाई करा दी गई है।
जिले में छोटी-बड़ी कुल 370 नहरें हैं जिनसे लगभग 12219 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि की सिंचाई की जाती है। वहीं बाढ़ व सूखे से निबटने के लिए शासन की ओर से नौगढ़, मूसाखांड, चंद्रप्रभा बांध सहित लतीफशाह बीयर का निर्माण कराया गया है। इनसे जुड़ी नहरों के अलावा नरायनपुर पंप कैनाल व कर्मनाशा नदी पर बने लिफ्ट कैनाल के माध्यम से नहरों में पानी छोड़ा जाता है। जिले की अधिकांश नहरों के झाड़-झंखाड़ से पटे होने के कारण टेल के खेतों के किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि ऐसे में उनके खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा।
वहीं धानापुर रजवाहा के नीचे भुपौली लिफ्ट कैनाल से निकली लगभग एक दर्जन माईनर झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी हैं। इससे खेतों में पानी पहुचने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। भोपौली लिफ्ट कैनाल का पानी माइनरों में वापसी नहीं होने के कारण टेल पर ओवर हो जाता है। इससे फसलें अक्सर डूब जाती हैं। इससे बघरी, विरासराय, सिसौड़ा कला, रामरूपदासपुर आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो जाती है।
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किसानों का कहना है कि आवाजापुर रजवाहा के नीचे हेतमपुर माईनर भदाहू, खड़ान, कांधरपुर, कवई खरिहनिया, अहिकौरा, पुराने कमालपुर, जमुर्खा, जनौली, रैथा, महुरा आदि माइनरों की सफाई न होने से किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता। हर सीजन में किसानों में पानी को लेकर विवाद हो जाता है। किसान नेता सुभाष राय, चंद्रभान राय, जयप्रकाश मौर्य, सुजीत सिंह आदि ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सिंचाई विभाग से नहरों की सफाई कराने की मांग की है।
धान की फसल कटने और गेहूं की रोपाई के बीच के समय में नहरों की सफाई करा दी जाती है। पिछले वर्ष भी सफाई करा दी गई थी। इसके बावजूद यदि शिकायत मिली तो नहरों व माइनरों की सफाई करा दी जाएगी। जेपी वर्मा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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जिले में छोटी-बड़ी कुल 370 नहरें हैं जिनसे लगभग 12219 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि की सिंचाई की जाती है। वहीं बाढ़ व सूखे से निबटने के लिए शासन की ओर से नौगढ़, मूसाखांड, चंद्रप्रभा बांध सहित लतीफशाह बीयर का निर्माण कराया गया है। इनसे जुड़ी नहरों के अलावा नरायनपुर पंप कैनाल व कर्मनाशा नदी पर बने लिफ्ट कैनाल के माध्यम से नहरों में पानी छोड़ा जाता है। जिले की अधिकांश नहरों के झाड़-झंखाड़ से पटे होने के कारण टेल के खेतों के किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि ऐसे में उनके खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा।
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वहीं धानापुर रजवाहा के नीचे भुपौली लिफ्ट कैनाल से निकली लगभग एक दर्जन माईनर झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी हैं। इससे खेतों में पानी पहुचने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। भोपौली लिफ्ट कैनाल का पानी माइनरों में वापसी नहीं होने के कारण टेल पर ओवर हो जाता है। इससे फसलें अक्सर डूब जाती हैं। इससे बघरी, विरासराय, सिसौड़ा कला, रामरूपदासपुर आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो जाती है।
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किसानों का कहना है कि आवाजापुर रजवाहा के नीचे हेतमपुर माईनर भदाहू, खड़ान, कांधरपुर, कवई खरिहनिया, अहिकौरा, पुराने कमालपुर, जमुर्खा, जनौली, रैथा, महुरा आदि माइनरों की सफाई न होने से किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता। हर सीजन में किसानों में पानी को लेकर विवाद हो जाता है। किसान नेता सुभाष राय, चंद्रभान राय, जयप्रकाश मौर्य, सुजीत सिंह आदि ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सिंचाई विभाग से नहरों की सफाई कराने की मांग की है।
धान की फसल कटने और गेहूं की रोपाई के बीच के समय में नहरों की सफाई करा दी जाती है। पिछले वर्ष भी सफाई करा दी गई थी। इसके बावजूद यदि शिकायत मिली तो नहरों व माइनरों की सफाई करा दी जाएगी। जेपी वर्मा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।