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Chandauli News: घर का कोई सदस्य निराश दिखे तो अकेला न छोड़ें, प्यार से बात करें

Thu, 10 Sep 2026 12:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:44 AM IST
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If a family member looks depressed, do not leave them alone, talk to them lovingly.
डिजिटल युग में युवा बहुत जल्द तनाव और अवसाद के घेरे में आ जा रहे हैं। निराशा के कारण युवाओं में खुदकुशी की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ विभाग में हर दिन अवसाद से ग्रसित 30 लोग पहुंच रहे हैं। इसमें 15 युवा रहते हैं। विभाग में रोजाना खुदकुशी के प्रयास वाले पांच मामले पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जरा सी बात पर युवाओं के साथ कई मामलों में अधिक उम्र वाले भी आपा खो दे रहे हैं। निराश व्यक्ति को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। उससे प्यार से बात करना चाहिए।
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केस एक
23 फरवरी 2026 को गोपीगंज धनापुर दक्षिणी में 15 वर्षीय रमेश कन्नौजिया ने प्रेमिका के अनबन के बाद फंदे पर झूलकर जान दे दी। वह इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती से एक किशोरी से प्रेम करता था।
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केस दो
बीते 11 जून को औराई कोतवाली के महराजगंज क्षेत्र में पूर्वाेत्तर रेलवे के कटका स्टेशन के पास बुधवार की सुबह करीब साढ़े 10 बजे ट्रेन के सामने कूदकर मुकेश गौतम (25) निवासी चकोड़ा महराजगंज ने जान दे दी। वह काफी दिनों से परेशान चल रहा था।
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केस तीन
13 अगस्त 2026 को कोइरौना थाना क्षेत्र के कालिका नगर निवासी 24 वर्षीय राहुल सोनी उर्फ विट्टू ने सराय जगदीश हाल्ट पर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। वह घर का इकलौता था और दो महीने बाद उसकी शादी होने वाली थी।

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केस चार
सुरियावां थाना क्षेत्र के पट्टीबेजांव गांव में अगस्त 2026 में मोबाइल पर ज्यादा बात करने पर डांटे जाने के बाद दो सहेलियों (18 वर्षीय कविता और साधना) नेजहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उपचार के दौरान कविता की मौत हो गई थी।
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मुश्किल समय स्थायी नहीं होता: डॉ. अभिनव पांडेय
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.अभिनव पांडेय ने बताया कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते दबाव के चलते लोग डिप्रेशन के तेजी से शिकार हो रहे हैं। रोजाना 30 मरीजों में इसकी शिकायत मिल रही है। वहीं खुदकुशी के प्रयास के भी रोजाना चार मामले आ रहे हैं। इसमें ज्यादातर मामले या तो पारिवारिक कलह से जुड़े हैं या फिर माता-पिता, परिवार वालों की डांट से क्षुब्ध होकर किशोर-युवा इस तरह का कदम उठा रहे हैं। जिला अस्पताल के नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. अशोक पराशर ने बताया कि अवसाद, तनाव, पारिवारिक या आर्थिक परेशानियां, अकेलापन और निराशा व्यक्ति को आत्महत्या के विचार तक ले जा सकता हैं। कोई अपना बहुत परेशान या निराश दिखाई दे तो अलर्ट हो जाएं। उससे प्यार से बात करें, उसकी बात सुनें और उसे अकेला न छोड़ें। यदि वह आत्महत्या की बात करे, तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। उसे समझाएं कि वह जिंदगी से निराश न हो कभी भी हालात बदल सकते हैं।
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