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Chandauli News: सामुदायिक शौचालयों पर लटक रहा ताला, ग्रामीण परेशान
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धीना। बरहनी विकासखंड स्थित धीना क्षेत्र के कई गांव में बनने वाले सामुदायिक शौचालय तीन वर्ष बीतने के बाद भी आधे-अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की उपेक्षा के कारण इन गांवों के सामुदायिक शौचालयों का केवल ढांचा ही दिख रहा है। ताला न खुलने के कारण अभी तक ये शौचालय उपयोग में नहीं आए हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि सरकारी आंकड़ों में इन सामुदायिक शौचालयों को पूर्ण मान लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन सामुदायिक शौचालयों की नियमित सफाई के नाम पर समूह की महिलाओं की ड्यूटी भी लगी है। इन महिलाओं को छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय व तीन हजार रुपये की सफाई की सामग्री का भी दी जा रही है। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी जांच करा कर कार्रवाई करने की बात करते हैं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सामुदायिक शौचालयों का निर्माण चार लाख 76 हजार रुपये की लागत से गांव की जनता की सुविधा के लिए शुरू कराया गया था। बावजूद इसके, कहीं ले आउट हुआ तो कहीं नींव तक का ही काम पूरा हो सका है। पंचायत चुनाव की घोषणा होने के बाद ग्राम प्रधानों के खाता संचालन पर रोक लगा दी गई। इसके बाद कुछ गांव के सामुदायिक शौचायलयों के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ब्लॉक के कर्मचारियों को दे दी गई। ब्लॉक के कर्मचारियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा कार्य किया कि तीन वर्ष बाद भी या तो शौचालय आधे अधूरे बने हैं यह फिर उपयोग में नहीं आते।
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धन की कमी आ रही आड़े
ग्राम सभा डेढ़गावां व खझरा के सामुदायिक शौचालय अभी भी आधे अधूरे हैं। ब्लॉक के अधिकारियों ने ग्राम प्रधानों पर कार्य पूर्ण करने का दबाव बनाया तो कुछ प्रधानों ने कार्य शुरू कराया पर ब्लॉक से पैसा न मिलने पर आधा-अधूरा छोड़ दिया है। डेढ़गावां के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह का कहना है कि ब्लॉक के अधिकारी पैसा नहीं दे रहे हैं तो कार्य कैसे पूरा कराया जाए।
शौचालयों पर ताला लटकने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - राजेश नायक, बीडीओ बरहनी
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गौर करने वाली बात यह है कि सरकारी आंकड़ों में इन सामुदायिक शौचालयों को पूर्ण मान लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन सामुदायिक शौचालयों की नियमित सफाई के नाम पर समूह की महिलाओं की ड्यूटी भी लगी है। इन महिलाओं को छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय व तीन हजार रुपये की सफाई की सामग्री का भी दी जा रही है। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी जांच करा कर कार्रवाई करने की बात करते हैं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
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सामुदायिक शौचालयों का निर्माण चार लाख 76 हजार रुपये की लागत से गांव की जनता की सुविधा के लिए शुरू कराया गया था। बावजूद इसके, कहीं ले आउट हुआ तो कहीं नींव तक का ही काम पूरा हो सका है। पंचायत चुनाव की घोषणा होने के बाद ग्राम प्रधानों के खाता संचालन पर रोक लगा दी गई। इसके बाद कुछ गांव के सामुदायिक शौचायलयों के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ब्लॉक के कर्मचारियों को दे दी गई। ब्लॉक के कर्मचारियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा कार्य किया कि तीन वर्ष बाद भी या तो शौचालय आधे अधूरे बने हैं यह फिर उपयोग में नहीं आते।
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धन की कमी आ रही आड़े
ग्राम सभा डेढ़गावां व खझरा के सामुदायिक शौचालय अभी भी आधे अधूरे हैं। ब्लॉक के अधिकारियों ने ग्राम प्रधानों पर कार्य पूर्ण करने का दबाव बनाया तो कुछ प्रधानों ने कार्य शुरू कराया पर ब्लॉक से पैसा न मिलने पर आधा-अधूरा छोड़ दिया है। डेढ़गावां के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह का कहना है कि ब्लॉक के अधिकारी पैसा नहीं दे रहे हैं तो कार्य कैसे पूरा कराया जाए।
शौचालयों पर ताला लटकने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - राजेश नायक, बीडीओ बरहनी