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पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीका लगवाएं
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नियामताबाद। पालतू पशु को यदि चलने में तकलीफ हो रही है तो वह खुरपका, मुंहपका या ब्रूसेला से ग्रसित हो सकता है। इन रोगों का कोई उपचार नहीं है। सिर्फ टीकाकरण से ही उन्हें बचाया जा सकता है। यह बातें पशु चिकित्सक डा. आरपी सिंह ने मंगलवार को विकासखंड के महेवा गांव में आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि पशुओं में खुरपका व मुंहपका विषाणु से होने वाले रोग हैं। इनसे न सिर्फ उनको तकलीफ होती है बल्कि दूध उत्पादन में भी कमी होती है। मादा पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है। दो खुर वाले पशुओं में मुंह के अंदरूनी त्वचा में सूजन और छाले हो जाते हैं। इन छालों से अत्यधिक मात्रा में लार निकलती ह । पशुओं द्वारा लार चाट लेने से घाव में कीड़े भी उत्पन्न हो सकते हैं। इसका सबसे आसान लक्षण पशुओं को खाने-पीने व चलने में तकलीफ होती है। साथ ही इसके बाद इसमें पशु को तेज बुखार भी आता है। रोगग्रस्त पशुओं के संपर्क में आने से पानी व चारा खाने के बाद अन्य पशु भी संक्रमित हो सकते हैं। इसके अलावा ब्रूसेला पशुओं से मनुष्य में भी फैलने वाला रोग है। यह रोग दूध या दूध निकालने वाले व्यक्ति या पशु चिकित्सक के माध्यम से भी फैल सकता है। इस रोग के कारण मादा पशुओं का गर्भपात तक हो जाता है। वहीं मादा पशु हमेशा के लिए बांझ भी हो सकती है। इन बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं। चार से छह माह के मादा पशुओं का टीकाकरण कराकर रोग को फैलने से रोका जा सकता है। एक बार टीकाकरण हो जाने के बाद आजीवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इस मौके पर चंद्रशेखर, राजू, मोहन, कपिलदेव, सुनील, बृजेश, प्रवेश कुमार, सुभाष, रामजन्म, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट- अखिलेश सिंह
संपादन- धनंजय
बाइट- 1589
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उन्होंने कहा कि पशुओं में खुरपका व मुंहपका विषाणु से होने वाले रोग हैं। इनसे न सिर्फ उनको तकलीफ होती है बल्कि दूध उत्पादन में भी कमी होती है। मादा पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है। दो खुर वाले पशुओं में मुंह के अंदरूनी त्वचा में सूजन और छाले हो जाते हैं। इन छालों से अत्यधिक मात्रा में लार निकलती ह । पशुओं द्वारा लार चाट लेने से घाव में कीड़े भी उत्पन्न हो सकते हैं। इसका सबसे आसान लक्षण पशुओं को खाने-पीने व चलने में तकलीफ होती है। साथ ही इसके बाद इसमें पशु को तेज बुखार भी आता है। रोगग्रस्त पशुओं के संपर्क में आने से पानी व चारा खाने के बाद अन्य पशु भी संक्रमित हो सकते हैं। इसके अलावा ब्रूसेला पशुओं से मनुष्य में भी फैलने वाला रोग है। यह रोग दूध या दूध निकालने वाले व्यक्ति या पशु चिकित्सक के माध्यम से भी फैल सकता है। इस रोग के कारण मादा पशुओं का गर्भपात तक हो जाता है। वहीं मादा पशु हमेशा के लिए बांझ भी हो सकती है। इन बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं। चार से छह माह के मादा पशुओं का टीकाकरण कराकर रोग को फैलने से रोका जा सकता है। एक बार टीकाकरण हो जाने के बाद आजीवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इस मौके पर चंद्रशेखर, राजू, मोहन, कपिलदेव, सुनील, बृजेश, प्रवेश कुमार, सुभाष, रामजन्म, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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रिपोर्ट- अखिलेश सिंह
संपादन- धनंजय
बाइट- 1589