फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Ganpati Festival Vansh Narayan Ganesh idol from Mumbai village worshipping special celebration

गणपति उत्सव: मुंबई से गणेश प्रतिमा लेकर गांव आते हैं वंश नारायण, 13 साल से कर रहे पूजा; मनाते हैं खास उत्सव

Mon, 14 Sep 2026 06:11 AM IST
Aman Vishwakarma सुनील कुमार यादव, अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।
सुनील कुमार यादव, अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 14 Sep 2026 06:11 AM IST
सार

मुंबई की चकाचौंध छोड़ वंश नारायण पिछले 13 वर्षों से गणपति उत्सव पर गांव की मिट्टी में भक्ति का रंग घोल रहे हैं। वह हर साल मुंबई से गणपति की प्रतिमा लेकर गांव पहुंचते हैं। उनके लिए यह उत्सव केवल पूजा नहीं, बल्कि परिवार और गांव के अपनों से मिलने का अवसर भी बन गया है। बप्पा के साथ उनकी यह परंपरा जारी है।

विज्ञापन
Ganpati Festival Vansh Narayan Ganesh idol from Mumbai village worshipping special celebration
अपने परिवार के साथ वंश नारायण। - फोटो : संवाद

विस्तार

मुंबई की चकाचौंध भरी जिंदगी में रहने के बावजूद हथेरवा गांव की मिट्टी और अपनों का मोह वंश नारायण चौहान को हर साल अपनी ओर खींच लाता है। गणपति बप्पा उनके इस लौटने की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। मुंबई में गणेश उत्सव की भव्यता से प्रभावित होकर उन्होंने वर्ष 2013 में अपने गांव में गणपति उत्सव शुरू करने का संकल्प लिया था। तब शुरू हुआ यह सिलसिला 13 साल बाद भी पूरी आस्था और उत्साह के साथ जारी है। हर साल वह मुंबई से गणपति की प्रतिमा लेकर गांव पहुंचते हैं और ग्रामीणों के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं।

विज्ञापन




वंश नारायण के लिए गणेश उत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए गांव की मिट्टी से जुड़ने, परिवार और रिश्तेदारों से मिलने तथा बचपन की यादों को फिर से जीने का अवसर भी बन गया है। गणपति बप्पा की प्रतिमा के साथ उनका गांव लौटना अब पूरे गांव के लिए भी उत्सव का हिस्सा बन चुका है।

विज्ञापन

मुंबई की भव्यता ने गांव में उत्सव की जगाई इच्छा
वंश नारायण बताते हैं कि वर्ष 2007 में वह दसवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान पहली बार अपनी दीदी के यहां मुंबई घूमने गए थे। महानगर की जीवनशैली और वहां की चकाचौंध उन्हें काफी पसंद आई। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह रोजगार के लिए मुंबई चले गए और वहां इलेक्ट्रिशियन का काम करने लगे। इसी दौरान उनका विवाह ममता चौहान से हुआ। उनके दो बच्चे हर्षित और उत्कर्ष हैं।

मुंबई में रहने के दौरान उन्होंने अलग-अलग इलाकों में गणेश उत्सव का भव्य आयोजन देखा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, गणपति की विशाल प्रतिमाएं और पूजा में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ ने उन्हें प्रभावित किया। उनके मन में विचार आया कि जब मुंबई में इतने उत्साह से गणपति उत्सव मनाया जा सकता है तो अपने गांव में भी बप्पा की स्थापना कर उत्सव क्यों न मनाया जाए।

2013 में शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी
इसी सोच के साथ वर्ष 2013 में उन्होंने पहली बार गणपति की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव की शुरुआत की। करीब पांच वर्षों तक मुंबई में रहते हुए उन्होंने गणेश उत्सव मनाया। बाद में उत्तर प्रदेश की एक निजी टावर कंपनी में मेंटेनेंस का काम मिलने के बाद वह गांव में रहने लगे। इसके बावजूद मुंबई से उनका भावनात्मक जुड़ाव बना रहा।

गणेश उत्सव आया तो मुंबई से प्रतिमा लाने की परंपरा भी जारी रही।हर साल वह मुंबई से गणपति की प्रतिमा लेकर गांव पहुंचते हैं। रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ उनका और गणपति बप्पा की प्रतिमा का स्वागत करते हैं। वहां से प्रतिमा को पूरे उत्साह के साथ गांव ले जाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से गणपति की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू होती है।

विज्ञापन

12 घंटे हरिकीर्तन और भंडारे में जुटते हैं सैकड़ों लोग
गणेश उत्सव के दौरान गांव में धार्मिक माहौल देखते ही बनता है। 12 घंटे तक हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता है। आसपास के ग्रामीण भी इसमें शामिल होते हैं। इसके बाद भव्य भंडारे का आयोजन होता है। इसमें गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी सैकड़ों लोग पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। उत्सव के समापन पर भी माहौल देखते ही बनता है। श्रद्धालु डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए गणपति बप्पा की प्रतिमा को गांव से पास के तालाब तक ले जाते हैं। वहां विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसके बाद उत्सव की समाप्ति के साथ वंश नारायण फिर मुंबई लौट जाते हैं।

बप्पा के बहाने हर साल लौटता है परिवार से मिलने का मौका
वंश नारायण के लिए गणेश उत्सव अब एक ऐसी परंपरा बन चुका है, जिसका उन्हें पूरे साल इंतजार रहता है। मुंबई से गांव तक गणपति की प्रतिमा लाने की यह यात्रा उनके लिए आस्था के साथ भावनाओं की भी यात्रा है। बप्पा के बहाने वह हर साल अपने गांव, परिवार और पुराने परिचितों के बीच कुछ समय बिताते हैंउनका कहना है कि गणपति उत्सव ने उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखा है। महानगर में रहने के बावजूद गांव से दूरी महसूस नहीं होती, क्योंकि बप्पा के साथ हर साल गांव आने का अवसर मिल जाता है। यही वजह है कि 13 वर्षों से यह परंपरा बिना किसी रुकावट के जारी है।

ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत
मुंबई से गणपति की प्रतिमा लेकर गांव पहुंचे वंश नारायण का रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। इस दौरान डॉ. सीमा चौहान, सोनी चौहान, लक्ष्मीना चौहान, पंचम, अभय, मुरली सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed