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Chandauli News: फर्जी वरासत निरस्त, 60 बीघा भूमि मंदिर को मिला वापस
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क्षेत्र के कटवा माफी गांव स्थित रामचंद्र मंदिर और विष्णु मंदिर की लगभग 60 बीघा भूमि विवाद का निपटारा हो गया है। न्यायालय ने फर्जी वरासत को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने संबंधित भूमि को पुनः रामचंद्र मंदिर एवं विष्णु मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
अभियोजन के अनुसार गांव निवासी दानकर्ता रामस्वरूप ने वर्ष 1945 में वक्फ डीड के माध्यम से अराजी संख्या 39, 25, 52, 62, 75 एवं 77 की भूमि मंदिर की स्थापना एवं उसके संचालन के लिए दान की थी। दान पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि उक्त भूमि से प्राप्त आय का उपयोग मंदिर में पूजा-पाठ, रखरखाव तथा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी गठित कर व्यवस्था संचालित करने की भी बात कही गई थी। समय बीतने के साथ दानकर्ता के कुछ परिजनों ने उक्त भूमि पर फर्जी तरीके से अपना नाम वरासत में दर्ज करा लिया। मामला सामने आने पर ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए न्यायालय की शरण ली। न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने शीला देवी समेत अन्य पक्षकारों की वरासत को निरस्त करते हुए भूमि को मूल दानपत्र के अनुसार रामचंद्र मंदिर एवं विष्णु मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया। फैसले के बाद मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों में खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि न्यायालय के निर्णय से मंदिर की संपत्ति सुरक्षित होगी तथा भूमि से होने वाली आय का उपयोग पुनः धार्मिक एवं जनहित के कार्यों में किया जा सकेगा। ग्रामीणों ने फैसले को न्याय की जीत बताया।
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अभियोजन के अनुसार गांव निवासी दानकर्ता रामस्वरूप ने वर्ष 1945 में वक्फ डीड के माध्यम से अराजी संख्या 39, 25, 52, 62, 75 एवं 77 की भूमि मंदिर की स्थापना एवं उसके संचालन के लिए दान की थी। दान पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि उक्त भूमि से प्राप्त आय का उपयोग मंदिर में पूजा-पाठ, रखरखाव तथा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी गठित कर व्यवस्था संचालित करने की भी बात कही गई थी। समय बीतने के साथ दानकर्ता के कुछ परिजनों ने उक्त भूमि पर फर्जी तरीके से अपना नाम वरासत में दर्ज करा लिया। मामला सामने आने पर ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए न्यायालय की शरण ली। न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने शीला देवी समेत अन्य पक्षकारों की वरासत को निरस्त करते हुए भूमि को मूल दानपत्र के अनुसार रामचंद्र मंदिर एवं विष्णु मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया। फैसले के बाद मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों में खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि न्यायालय के निर्णय से मंदिर की संपत्ति सुरक्षित होगी तथा भूमि से होने वाली आय का उपयोग पुनः धार्मिक एवं जनहित के कार्यों में किया जा सकेगा। ग्रामीणों ने फैसले को न्याय की जीत बताया।
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