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किसानों ने भरी हुंकार
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:22 AM IST
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किसान पंचायत को संबोधित करते अध्यक्ष जैराम सिंह।
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किसान विकास मंच के तत्वावधान में स्थानीय ब्लाक परिसर में रविवार को किसान महापंचायत बैठी। जिसमें किसानों ने धान खरीद से लेकर खाद, बीज, पानी की समस्याओं को आंदोलन के लिए हुंकार भरी।
किसान विकास मंच के अध्यक्ष जयराम सिंह ने कहा कि किसानों को फसल का लाभ नहीं मिल पाता है। अकसर सरकारी मशीनरी धान में नमी या बोरा का बहाना बनाकर मुकर जाती हैं या फिर जो किसान धान बेच लेते हैं, उनसे नमी के नाम पर दो से तीन किलो धान प्रति कुंतल अतिरिक्त लिया जाता है। वशिष्ठ सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में चंदौली धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है लेकिन धान खरीद की जब बात आती है तो शासन द्वारा कोटा निर्धारण के समय छह प्रतिशत धान खरीद की बात आ जाती है। तब 95 प्रतिशत उपज किसान क्या करेगा। किसानों को उत्पादन कर लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। युवा किसान प्रेमनारायण सिंह ने कहा कि देश में जितनी भी वस्तुओं का उत्पाद कंपनी में होता है, उसका मूल्य उत्पादक तय करता है लेकिन अनाज का मूल्य निर्धारण सरकार करती है। विश्वबंधु परशुराम सिंह ने कहा कि सरकारें किसान का शोषण करने में थोड़ा भी देर नहीं कर रही हैं।
इसलिए किसान एकजुट होकर सरकार से मांग करें कि क्रय समितियां गांवों में जाकर धान खरीद करें। तभी किसानों को उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। वहीं पंचायत को रमेश सिंह, श्याम लाल मौर्य, रामअवध सिंह, सेचू सिंह, नथुनी सिंह, लालचंद्र एड. वीरेंद्र पाल आदि किसानों ने संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता लक्ष्मण पटेल व संचालन रामअवध सिंह ने किया।
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किसान विकास मंच के अध्यक्ष जयराम सिंह ने कहा कि किसानों को फसल का लाभ नहीं मिल पाता है। अकसर सरकारी मशीनरी धान में नमी या बोरा का बहाना बनाकर मुकर जाती हैं या फिर जो किसान धान बेच लेते हैं, उनसे नमी के नाम पर दो से तीन किलो धान प्रति कुंतल अतिरिक्त लिया जाता है। वशिष्ठ सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में चंदौली धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है लेकिन धान खरीद की जब बात आती है तो शासन द्वारा कोटा निर्धारण के समय छह प्रतिशत धान खरीद की बात आ जाती है। तब 95 प्रतिशत उपज किसान क्या करेगा। किसानों को उत्पादन कर लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। युवा किसान प्रेमनारायण सिंह ने कहा कि देश में जितनी भी वस्तुओं का उत्पाद कंपनी में होता है, उसका मूल्य उत्पादक तय करता है लेकिन अनाज का मूल्य निर्धारण सरकार करती है। विश्वबंधु परशुराम सिंह ने कहा कि सरकारें किसान का शोषण करने में थोड़ा भी देर नहीं कर रही हैं।
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इसलिए किसान एकजुट होकर सरकार से मांग करें कि क्रय समितियां गांवों में जाकर धान खरीद करें। तभी किसानों को उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। वहीं पंचायत को रमेश सिंह, श्याम लाल मौर्य, रामअवध सिंह, सेचू सिंह, नथुनी सिंह, लालचंद्र एड. वीरेंद्र पाल आदि किसानों ने संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता लक्ष्मण पटेल व संचालन रामअवध सिंह ने किया।
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