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ड्यूटी के लिए नोकझोंक
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Sat, 02 Apr 2016 01:34 AM IST
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महेंद्र टेक्निकल इंटर काॅलेज में परीक्षकों की ड्यूटी लगाते उप नियंत्रक।
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महेंद्र टेक्निकल कालेज स्थित बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन केंद्र पर शुक्रवार को ड्यूटी लगाने को लेकर शिक्षक आपस में उलझ गए। इस दौरान एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए। इसके चलते केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया और कुछ देर तक मूल्यांकन का कार्य प्रभावित रहा। बाद में शिक्षक जिला विद्यालय निरीक्षक से मिले और अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। डीआईओएस ने सभी को समझाकर मामला शांत कराया।
महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है। यहां इंटरमीडिएट की परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन कार्य चल रहा है। शुक्रवार को वित्तविहीन और मान्यताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की केमुआ-9 फार्म भरवाकर ड्यूटी लगाई जा रही थी। इसी दौरान विद्यालय के शिक्षकों का एक गुट प्रधानाचार्य और उपनियंत्रक मूल्यांकन डा. रामचंद्र शुक्ल के पास पहुंचा और ड्यूटी लगाने में मनमानी का आरोप लगाते हुए उनसे उलझ गया। आरोप लगाया कि बगैर योग्यता और वरीयता के परीक्षकों और उप प्रधान परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। विगत चार वर्षों से परीक्षकों को यात्रा भत्ता, कक्ष नियंत्रक, पत्राचार और कोठार का पैसा नहीं दिया गया है। उप प्रधान परीक्षकों की अनुपस्थिति में वरीयता क्रम को दरकिनार कर दूसरे अध्यापकों की ड्यूटी लगा दी जाती है। इसी बात को लेकर शिक्षकों के एक गुट ने खूब हो-हल्ला मचाया। इस बीच दोनों गुटों के बीच तू, तू, मैं, मैं भी हुई। इस दौरान वहां अध्यापकों की भीड़ जमा हो गई। और मूल्यांकन तथा केमुआ-9 का कार्य रुक गया। शिक्षक पास में ही स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मालती राय के यहां पहुंचे और समस्या से अवगत कराया।
वहीं इस मामले पर प्रधानाचार्य डा. रामचंद्र शुक्ल का कहना है कि विद्यालय के कुछ अध्यापक वाराणसी से आते हैं। वे लोग देर से विद्यालय पहुंचते हैं और पहले ही घर के लिए निकल जाते हैं। ऐसे लोगों को मूल्यांकन कार्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दी गईं हैं। विद्यालय के जिम्मेदार अध्यापकों को कोठार और कक्ष नियंत्रक का कार्य सौंपा गया है। जिससे कुछ लोग खुन्नस खाए हुए और कार्य में व्यवधान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है। यहां इंटरमीडिएट की परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन कार्य चल रहा है। शुक्रवार को वित्तविहीन और मान्यताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की केमुआ-9 फार्म भरवाकर ड्यूटी लगाई जा रही थी। इसी दौरान विद्यालय के शिक्षकों का एक गुट प्रधानाचार्य और उपनियंत्रक मूल्यांकन डा. रामचंद्र शुक्ल के पास पहुंचा और ड्यूटी लगाने में मनमानी का आरोप लगाते हुए उनसे उलझ गया। आरोप लगाया कि बगैर योग्यता और वरीयता के परीक्षकों और उप प्रधान परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। विगत चार वर्षों से परीक्षकों को यात्रा भत्ता, कक्ष नियंत्रक, पत्राचार और कोठार का पैसा नहीं दिया गया है। उप प्रधान परीक्षकों की अनुपस्थिति में वरीयता क्रम को दरकिनार कर दूसरे अध्यापकों की ड्यूटी लगा दी जाती है। इसी बात को लेकर शिक्षकों के एक गुट ने खूब हो-हल्ला मचाया। इस बीच दोनों गुटों के बीच तू, तू, मैं, मैं भी हुई। इस दौरान वहां अध्यापकों की भीड़ जमा हो गई। और मूल्यांकन तथा केमुआ-9 का कार्य रुक गया। शिक्षक पास में ही स्थित जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मालती राय के यहां पहुंचे और समस्या से अवगत कराया।
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वहीं इस मामले पर प्रधानाचार्य डा. रामचंद्र शुक्ल का कहना है कि विद्यालय के कुछ अध्यापक वाराणसी से आते हैं। वे लोग देर से विद्यालय पहुंचते हैं और पहले ही घर के लिए निकल जाते हैं। ऐसे लोगों को मूल्यांकन कार्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दी गईं हैं। विद्यालय के जिम्मेदार अध्यापकों को कोठार और कक्ष नियंत्रक का कार्य सौंपा गया है। जिससे कुछ लोग खुन्नस खाए हुए और कार्य में व्यवधान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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