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मुंशी प्रेमचंद के योगदान पर चर्चा
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 02 Aug 2016 02:01 AM IST
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जयंती पर उपस्थित लोग
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती अनेक स्थानों पर रविवार को मनाई गई। जिसमें विभिन्न संगठनों ने उनके साहित्यिक योगदान पर चर्चा की। ।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से नगर के लाठ नंबर दो स्थित संस्था के संयुक्त मंत्री अमित श्रीवास्तव के आवास पर आयोजित गोष्ठी में प्रेमचंद को याद किया गया। मुख्य अतिथि संस्था के राजनीतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 1905 में भारतीय पत्रकारिता में एक नयी क्रांति आई और प्रेमचंद को अमर कथाकार, उपन्यास सम्राट के रूप में स्वीकार किया जाने लगा। उनके ग्रंथों की तुलना गीता और रामचरित मानस की तरह समाज को नई दिशा प्रदान करती है। जिलाध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद को भारत रत्न देने की मांग की। नगर अध्यक्ष विनय कुमार और नीरज वर्मा ने उन्हें महान साहित्यकार बताया। संजीव कुमार ने मुंशी प्रेमचंद् के आवास को राष्ट्रीय साहित्य धरोहर घोषित करने की मांग की। कैलाश लाल, गुलाब लाल, रतन लाल, राजेश प्रसाद, वाईपी श्रीवास्तव, शिवजी प्रसाद, आशीष कुमार, अवधेश लाल, ओमप्रकाश आदि उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन अमित श्रीवास्तव ने किया।
कायस्थ समाज के लोगों की पराहुपुर स्थित वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के आवास पर हुई गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद को महान साहित्यकार बताया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश सचिव शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने मुंशी जी के पहली हिन्दी कहानी सौत को मील का पत्थर बताया। संजय कुबेर, अभिषेक नारायण, अक्षय कुमार सिन्हा आदि उपस्थित रहे। अस्मिता नाट्य संस्थान की ओर से चतुर्भुजपुर स्थित अंबेडकर स्मारक में मुंशी प्रेमचंद के कहानी सवा सेर गेहूं का मंचन किया गया।
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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से नगर के लाठ नंबर दो स्थित संस्था के संयुक्त मंत्री अमित श्रीवास्तव के आवास पर आयोजित गोष्ठी में प्रेमचंद को याद किया गया। मुख्य अतिथि संस्था के राजनीतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 1905 में भारतीय पत्रकारिता में एक नयी क्रांति आई और प्रेमचंद को अमर कथाकार, उपन्यास सम्राट के रूप में स्वीकार किया जाने लगा। उनके ग्रंथों की तुलना गीता और रामचरित मानस की तरह समाज को नई दिशा प्रदान करती है। जिलाध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद को भारत रत्न देने की मांग की। नगर अध्यक्ष विनय कुमार और नीरज वर्मा ने उन्हें महान साहित्यकार बताया। संजीव कुमार ने मुंशी प्रेमचंद् के आवास को राष्ट्रीय साहित्य धरोहर घोषित करने की मांग की। कैलाश लाल, गुलाब लाल, रतन लाल, राजेश प्रसाद, वाईपी श्रीवास्तव, शिवजी प्रसाद, आशीष कुमार, अवधेश लाल, ओमप्रकाश आदि उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन अमित श्रीवास्तव ने किया।
कायस्थ समाज के लोगों की पराहुपुर स्थित वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के आवास पर हुई गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद को महान साहित्यकार बताया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश सचिव शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने मुंशी जी के पहली हिन्दी कहानी सौत को मील का पत्थर बताया। संजय कुबेर, अभिषेक नारायण, अक्षय कुमार सिन्हा आदि उपस्थित रहे। अस्मिता नाट्य संस्थान की ओर से चतुर्भुजपुर स्थित अंबेडकर स्मारक में मुंशी प्रेमचंद के कहानी सवा सेर गेहूं का मंचन किया गया।
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