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गीता का बताया मर्म

Thu, 12 Mar 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली Updated Thu, 12 Mar 2015 02:04 AM IST
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Described the importance of the Gita
नगर स्थित श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर प्रांगण में बुधवार को गीता पाठ के
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समापन पर सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के कृपापात्र मास्टर बाबा ने उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन दिया। जिसमें यथार्थ गीता के प्रसंगों पर प्रकाश डाला।


उन्होंने कहा कि परमात्मा प्राप्त करने के लिए प्रेम नितांत आवश्यक है। बिना प्रेम के परमात्मा की प्राप्ति नहीं की जा सकती है। पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए नौ बार जन्म लिया।

नवरात्र का इसी कारण विशेष महत्व है। बताया कि भगवान को प्राप्त करने के लिए इंद्रियों को वश में करना होगा। चैत्र महीने में मनुष्य का चित्त चेतने लगता है। चैत्र नवरात्र के छह महीने बाद कार्तिक महीने में फिर नवरात्र आता है। इसी नवरात्र में मोह रूपी रावण का अंत होता है।

भगवत पथ में चलकर सद्गुरु की प्राप्ति होती है। यथार्थ गीता में परमात्मा को पाने की सारी विधि बताई गई है। इसका अध्ययन तीन से चार दफा करना चाहिए। इस अवसर पर सीताराम विश्वकर्मा, राजा राम, रघुवर सिंह, दीनानाथ, पंकज सिंह, राणा सिंह, दुलारे आदि उपस्थित रहे।
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