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लेखपाल के पिता को पुलिस द्वारा उठाए जाने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
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सकलडीहा। बलुआ थाना के बछौली गांव में पिछले दिनों जिला प्रशासन से बिना अनुमति लिए डा. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा रखने व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में 50 नामजद सहित डेढ़ सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। शुक्रवार की देर रात बलुआ पुलिस मामले में आरोपी क्षेत्र के एक लेखपाल के कुचमन गांव उसके घर पहुंची। लेखपाल के घर पर नहीं मिलने पर पुलिस उसके पिता को अपने साथ ले गई। इससे नाराज लेखपाल संघ के सदस्यों व ग्रामीणों ने शनिवार को तहसील में प्रदर्शन किया। साथ ही तहसीलदार से हिरासत में लिए गए लेखपाल के पिता को छोड़ने की मांग की।
वहीं पुलिस का कहना था कि बछौली गांव क निवर्तमान प्रधानपति द्वारा पिछले एक जनवरी को जिला प्रशासन की अनुमति लिए बिना डा. आंबेडकर की मूर्ति रख दी गई थी। इसकी जानकारी होने पर बलुआ एसओ ने प्रधानपति को बुलाकर मूर्ति हटाने को कहा लेकिन तीन दिन बाद भी मूर्ति नहीं हटने पर चार जनवरी को प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मूर्ति हटाने पहुंचे। आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने मूर्ति हटाने की बजाय अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए पुलिस से हाथापाई की थी। इससे गांव में तनाव व्याप्त हो गया था। चौकी प्रभारी मोहरगंज की लिखित शिकायत पर बलुआ थाने में 50 नामजद सहित 150 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी मूर्ति नहीं हटने पर शुक्रवार की देर रात पुलिस ने क्षेत्रीय लेखपाल के घर पर छापेमारी की। यहां लेखपाल के नहीं मिलने पर उसके पिता को अपने साथ लेकर चली आई। इससे क्षुब्ध लेखपाल संघ के सदस्यों ने शनिवार को तहसीलदार डा. वंदना मिश्रा से मिलकर पिता को छोड़ने का आग्रह किया। वही ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर बलुआ पुलिस द्वारा तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया। थाना प्रभारी बलुआ सूर्यप्रताप सिंह ने ग्रामीणों के आरोप को निराधार बताते हुए पिता को पूछताछ के लिए थाने पर ले जाने की बात कही है।
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वहीं पुलिस का कहना था कि बछौली गांव क निवर्तमान प्रधानपति द्वारा पिछले एक जनवरी को जिला प्रशासन की अनुमति लिए बिना डा. आंबेडकर की मूर्ति रख दी गई थी। इसकी जानकारी होने पर बलुआ एसओ ने प्रधानपति को बुलाकर मूर्ति हटाने को कहा लेकिन तीन दिन बाद भी मूर्ति नहीं हटने पर चार जनवरी को प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मूर्ति हटाने पहुंचे। आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने मूर्ति हटाने की बजाय अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए पुलिस से हाथापाई की थी। इससे गांव में तनाव व्याप्त हो गया था। चौकी प्रभारी मोहरगंज की लिखित शिकायत पर बलुआ थाने में 50 नामजद सहित 150 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी मूर्ति नहीं हटने पर शुक्रवार की देर रात पुलिस ने क्षेत्रीय लेखपाल के घर पर छापेमारी की। यहां लेखपाल के नहीं मिलने पर उसके पिता को अपने साथ लेकर चली आई। इससे क्षुब्ध लेखपाल संघ के सदस्यों ने शनिवार को तहसीलदार डा. वंदना मिश्रा से मिलकर पिता को छोड़ने का आग्रह किया। वही ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर बलुआ पुलिस द्वारा तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया। थाना प्रभारी बलुआ सूर्यप्रताप सिंह ने ग्रामीणों के आरोप को निराधार बताते हुए पिता को पूछताछ के लिए थाने पर ले जाने की बात कही है।
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