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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Defying Age old Satyanarayan walks 16 km barefoot Nandlal still cultivates 10 bighas of land everyday

उम्र को मात: 96 की उम्र में नंगे पांव 16 किमी चलते हैं सत्यनारायण, 93 में भी 10 बीघे की खेती करते हैं नंदलाल

Fri, 02 Oct 2026 05:54 AM IST
Aman Vishwakarma अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।
अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 02 Oct 2026 05:54 AM IST
सार

सादगी, नियमित श्रम और सकारात्मक सोच के सहारे बुजुर्ग उम्र को मात दे रहे हैं। 96 वर्षीय सत्यनारायण चौहान रोज नंगे पांव करीब 16 किलोमीटर चलते हैं। वहीं 93 वर्षीय नंदलाल आज भी खुद 10 बीघे खेत में खेती करते हैं। दोनों बुजुर्गों की आंख, कान और दांत दुरुस्त हैं। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

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Defying Age old Satyanarayan walks 16 km barefoot Nandlal still cultivates 10 bighas of land everyday
सत्यनारायण और नंदलाल। - फोटो : संवाद

विस्तार

उम्र बढ़ने के साथ कदम भले ही धीमे पड़ जाएं, लेकिन चंदौली के कुछ बुजुर्गों ने उम्र को अपनी सक्रियता के आड़े नहीं आने दिया। कोई 96 वर्ष की उम्र में रोजाना 16 किलोमीटर नंगे पांव पैदल चलता है तो कोई 93 साल की उम्र में दस बीघे से अधिक खेत की निगरानी खुद करता है। कोई किताबों के बीच दिन गुजार रहा है तो कोई घर के कामों में हाथ बंटाकर खुद को सक्रिय रखे हुए है। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर ऐसे बुजुर्गों की दिनचर्या न केवल प्रेरणादायी है, बल्कि बदलती जीवनशैली के बीच सादगी, श्रम और सकारात्मक सोच का संदेश भी देती है।

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केस 1- 30 वर्षों से बाहर का पानी तक नहीं मिला, निमंत्रण और भोज से भी दूरी
नियामताबाद विकासखंड के भुजहुआ गांव निवासी सत्यनारायण चौहान 96 वर्ष के हैं। इस उम्र में जहां कई लोग चलने-फिरने में भी सहारे के मोहताज हो जाते हैं, वहीं सत्यनारायण की दिनचर्या आज भी किसी स्वस्थ युवा से कम नहीं है। वह रोजाना करीब 16 किलोमीटर नंगे पांव पैदल चलते हैं। उनकी आंखों पर चश्मा नहीं है, कान से सुनने में परेशानी नहीं है और 32 दांत भी आज तक उनके साथ हैं। 

सत्यनारायण रोज सुबह करीब नौ बजे घर से खाना खाकर मुगलसराय के लिए निकल जाते हैं फिर शाम को पैदल घर लौटते हैं। खास बात यह है कि इस पूरे सफर के दौरान वह बाहर का पानी तक नहीं पीते। न रास्ते में कुछ खाते हैं। सत्यनारायण बताते हैं कि किसी के निमंत्रण या भोज में भी जाना पड़ता है तो भोजन करने से परहेज करते हैं। 

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कहते हैं कि रोजाना पैदल चलने से शरीर का पूरा व्यायाम हो जाता है। जवानी के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि उस समय वह रोजाना करीब पांच लीटर दूध पी जाते थे। अब उम्र बढ़ने के साथ भोजन भी सादा कर लिया है। सुबह-शाम मुख्य रूप से दाल-रोटी ही खाते हैं। सत्यनारायण का पारिवारिक जीवन भी बड़ा है। उन्होंने दो शादियां कीं। पहली पत्नी के निधन के बाद 54 वर्ष की उम्र में उन्होंने दूसरी शादी की। 

दोनों पत्नियों से उनके 16 बच्चे हैं, जिनमें 11 बेटे और पांच बेटियां हैं। 22 नाती-पोतों वाले बड़े परिवार के बीच रहने के बावजूद उनकी दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है। जब उनसे 96 वर्ष की उम्र में भी खुद को फिट रखने का राज पूछा गया तो वह कहते हैं, “सादा खाना खाइए, बाहर की चीजों से बचिए और शरीर को काम में लगाए रखिए। खाली बैठने से शरीर भी कमजोर होता है।”

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केस 2- 93 की उम्र में भी 10 बीघे से अधिक खेती की खुद करते हैं
चंदौली के कंदवा थाना क्षेत्र के आनंदपुर रेवसां गांव निवासी नंदलाल प्रसाद शास्त्री की उम्र 93 वर्ष है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वह दस बीघे से अधिक खेती की जिम्मेदारी खुद संभालते हैं। खेत में फसल की स्थिति देखने से लेकर समय-समय पर पानी और खाद की व्यवस्था तक पर उनकी नजर रहती है।

नंदलाल की सुबह करीब पांच बजे होती है। उठने के बाद स्नान करते हैं। इसके बाद योग, प्राणायाम और ध्यान करते हैं। नाश्ते में चना लेने के बाद खेतों की ओर निकल जाते हैं। वह रोज खेत पहुंचकर अपनी फसल देखते हैं और उसकी जरूरत के अनुसार पानी, खाद आदि की व्यवस्था कराते हैं।

खेत से लौटने के बाद उनका ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बीतता है। उनका कहना है कि शरीर को सक्रिय रखने के साथ मन को भी सक्रिय रखना जरूरी है। वह आज भी खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं। कहते हैं कि आंख, कान और दांत सभी ठीक हैं।

नंदलाल के अनुसार स्वस्थ रहने का सबसे बड़ा कारण हमेशा आनंदित और प्रसन्न रहना है। वह कहते हैं, “जीवन है तो संघर्ष और परेशानियां भी रहेंगी। परेशानी के कारण अपने आनंद को छोड़ देना ठीक नहीं है। हर परिस्थिति में प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिए।”

केस 3- 91 में भी रोज एक किमी पैदल चलते हैं रामप्रसाद
नियामताबाद विकासखंड के कूढ़े खुर्द गांव निवासी और पूर्व रेलकर्मी रामप्रसाद यादव 91 वर्ष के हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने खुद को सक्रिय रखा है। वह रोजाना करीब एक किलोमीटर पैदल टहलते हैं। इसके बाद समय का बड़ा हिस्सा किताबें पढ़ने में बिताते हैं।

रामप्रसाद का कहना है कि शरीर को पूरी तरह आराम देने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहना चाहिए। वह घर के छोटे-बड़े कामों में भी परिवार के सदस्यों का हाथ बंटाते हैं। नियमित पैदल चलना और पढ़ने की आदत उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

उनके परिवार के लोग बताते हैं कि रामप्रसाद आज भी लंबे समय तक एक जगह बैठने के बजाय कुछ न कुछ करते रहते हैं। किताब पढ़ने से उनका मन भी लगा रहता है और रोजाना टहलने से शरीर सक्रिय रहता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और सकारात्मक सोच बुजुर्गों को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को सक्रिय रखना जरूरी है। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, योग-प्राणायाम करना और घर का संतुलित भोजन लेना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव से बचाव और नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है, इसलिए उम्रदराज लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार ही व्यायाम या पैदल चलना चाहिए। - डॉ. एसके चतुर्वेदी, वरिष्ठ चिकित्सक, राजकीय महिला चिकित्सालय

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