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जमानत का आधार बनाएं मुचलका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Sun, 11 Oct 2015 01:12 AM IST
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अशांति फैलाने की आशंका पर पाबंद किए गए लोगों के जमानत में खतौनी के साथ दो गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने से नाराज होकर अधिवक्ताओं ने शनिवार को एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। इस नियम को एसडीएम का नया कानून बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। बाद में ज्ञापन सौंपा गया।
पंचायत चुनाव के दौरान अशांति फैलाने वालों को चिह्नित करते हुए पुलिस ने धारा 107/116(3) में लोगों को पाबंद किया है। शनिवार को बार के अध्यक्ष अरुण कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक दल एसडीएम कार्यालय पर शिकायत करने पहुंचा, लेकिन इसकी भनक लगते ही एसडीएम वहां से खिसक गये। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने घंटों एसडीएम कार्यालय पर घेराव करते हुए डटे रहे।
बार के अध्यक्ष अरूण कुमार का कहना है कि पुलिस द्वारा बेवजह सम्मातिन ग्रामीणों को पाबंद कर रही हैं। एक आंकड़ा के तहत बताया कि एक गांव में कम से कम 25 से तीस लोगों को पाबंद किया गया है। उन्होंने मांग किया कि आरोपियों की जमानत पूर्व की भांति मात्र मुचलका के माध्यम से किया जाये। इस मौके पर प्रशांत कुमार, रामजनम बागी, अब्दूल रसीद अहमद, महेन्द्र प्रताप, सरजन राम, नरसिंह, विरेन्द्र कुमार, दशरथ यादव आदि रहे।
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पंचायत चुनाव के दौरान अशांति फैलाने वालों को चिह्नित करते हुए पुलिस ने धारा 107/116(3) में लोगों को पाबंद किया है। शनिवार को बार के अध्यक्ष अरुण कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक दल एसडीएम कार्यालय पर शिकायत करने पहुंचा, लेकिन इसकी भनक लगते ही एसडीएम वहां से खिसक गये। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने घंटों एसडीएम कार्यालय पर घेराव करते हुए डटे रहे।
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बार के अध्यक्ष अरूण कुमार का कहना है कि पुलिस द्वारा बेवजह सम्मातिन ग्रामीणों को पाबंद कर रही हैं। एक आंकड़ा के तहत बताया कि एक गांव में कम से कम 25 से तीस लोगों को पाबंद किया गया है। उन्होंने मांग किया कि आरोपियों की जमानत पूर्व की भांति मात्र मुचलका के माध्यम से किया जाये। इस मौके पर प्रशांत कुमार, रामजनम बागी, अब्दूल रसीद अहमद, महेन्द्र प्रताप, सरजन राम, नरसिंह, विरेन्द्र कुमार, दशरथ यादव आदि रहे।
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