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Chandauli News: चंद्रप्रभा सेंचुरी से गायब हो गए सारस, जीव गणना में नहीं मिली उपस्थिति

Sat, 10 Jan 2026 12:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:47 AM IST
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Cranes have disappeared from the Chandraprabha Sanctuary; their presence was not found in the wildlife census
सारस, फाइलफोटो - फोटो : बंदी की मौत के बाद जिला अस्पताल में पुलिसकर्मी से घटना की जानकारी लेते परिजन।
राजदरी। प्रकृति के लगातार बिगड़ते मिजाज और मानवीय हस्तक्षेप के चलते जहां वनों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है, वहीं वनों में निवास करने वाले वन्य जीव और पक्षी भी धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए हैं। कभी पक्षियों के कलरव से गूंजने वाली चंद्रप्रभा सेंचुरी आज वीरानगी का दंश झेल रही है। यहां हाल में कराए गए वन्य जीव गणना में सारस पक्षी की उपस्थिति नहीं मिली। विंध्य पर्वत मालाओं की गोद में बसी चंद्रप्रभा की सुरम्य वादियों को वर्ष 1957 में सेंचुरी का दर्जा दिया गया था। इसका उद्देश्य यह था कि लगभग 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस वन्य जीव बिहार में जीव-जंतुओं को सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण मिल सके।
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वर्तमान में यहां हिरन, तेंदुआ, लकड़ बग्घा जैसे वन्य जीव भी हाशिये पर पहुंच गए हैं। यही हाल पक्षियों का भी है। चंद्रप्रभा सेंचुरी क्षेत्र कभी गिद्ध, चील, तोता, मैना, कठफोड़वा, वन मुर्गी सहित कई प्रजातियों के पक्षियों का सुरक्षित आश्रय स्थल हुआ करता था। वर्तमान समय में गिद्ध पूरी तरह विलुप्त हो चुके हैं, जबकि अन्य पक्षियों की संख्या भी न के बराबर रह गई है। राष्ट्रीय पक्षी मोर, जो कभी यहां बड़ी संख्या में देखा जाता था, अब अपने अस्तित्व को लेकर संकट में है। हाल में कराए गए वन्य जीव गणना में सारस पक्षी की उपस्थिति नहीं मिली।
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छिछले तालाब में मिलते हैं सारस
राजदरी। सारस पक्षी सामान्यतः छिछले तालाबों, दलदली क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास पाए जाते हैं, जहां उन्हें भोजन और सुरक्षित वातावरण मिलता है। चंद्रप्रभा सेंचुरी क्षेत्र में जलस्रोतों के सूखने, तालाबों के गहराने और प्राकृतिक ढांचे में बदलाव के कारण सारस के अनुकूल परिस्थितियां समाप्त होती जा रही हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में सारस पक्षियों की उपस्थिति लगभग समाप्त हो गई है।
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सारस पक्षी छिछले जलाशयों और खुले प्राकृतिक क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। चंद्रप्रभा सेंचुरी में जलस्रोतों की स्थिति में बदलाव और मानवीय गतिविधियों के कारण इनकी संख्या में गिरावट आई है। वन विभाग संरक्षण की दिशा में प्रयासरत है। - बी शिव शंकर, डीएफओ, चंदौली
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