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Chandauli News: श्वसन तंत्र में संक्रमण के शिकार हो रहे बच्चे, महिला अस्पताल में रोज पहुंच रहे 60 से 70 मरीज
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पीडीडीयू नगर। मौसम बदलने और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से बच्चे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण (अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन) की चपेट में आ रहे हैं। राजकीय महिला अस्पताल की ओपीडी में रोज 110 से 120 बच्चे आ रहे हैं, जिनमें से 60-70 बच्चों में यह समस्या मिल रही है। इनमें ज्यादातर की उम्र पांच वर्ष से कम होती है।
कई दिनों से मौसम बार-बार बदल रहा है। दिन में तेज धूप तो सुबह और रात गलन हो रही है। इसका असर नवजातों शिशुओं से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। ये बच्चे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण के शिकार हो रहे है। राजकीय महिला अस्पताल में हर रोज 110 से 120 बच्चे आते हैं। इनमें 60 से 70 बच्चे श्वसन तंत्र के ऊपर भाग में संक्रमण से पीड़ित मिल रहे हैं।
इन बच्चों में बुखार, गले में खराश, जुकाम, खांसी और आंखाें में जलन की समस्या होती है। ऐसे बच्चों अस्पताल में नेबुलाइजर देना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चों के इलाज के साथ उनकी समुचित देखभाल बहुत जरूरी है। बच्चों को सीधे हवा के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। उनके हाथ-पैर और कान को ढककर रखें। संक्रमण होने पर बच्चों का भाप अवश्य दें।
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इनसेट-
ध्यान नहीं देने पर बढ़ जाता है खतरा
अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन पर ध्यान नहीं देने पर बच्चों में संक्रमण की समस्या गंभीर हो सकती है। समय पर समुचित इलाज नहीं हुआ तो यह संक्रमण एलआरटीआई (लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन) में बदल जाता है। डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन के बाद बच्चों में निमोनिया और श्वसन तंत्र की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
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कमजोर शिशुओं को कंगारू मदर केयर की जरूरत
बदलते मौसम में रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन का खतरा उन नवजातों में ज्यादा रहता है, जो जयादा कमजोर होते हैं। डॉ. एसके चतुर्वेदी के बताया कि जिन शिशुओं को वजन ढाई किलो से कम होता है, उन्हें कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। इसके तहत बच्चे के कपड़े उतारकर मां उसे अपने शरीर से चिपका लेती है। यानी मां और बच्चे की स्किन एक-दूसरे के संपर्क में रहे। यह प्रकिया जितनी ज्यादा होगी, उससे बच्चे का बेहतर विकास होगा। उसे भूख लगेगी और वजन भी बढ़ेगा।
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बरतें सावधानी
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- बच्चों को सीधे हवा के संपर्क में आने से बचाएं।
- बच्चों के हाथ-पैर और कान ढककर रखें।
- संकमण होने पर बच्चों का भाप अवश्य दें।
- बच्चों के तौलिया, बिस्तर आदि साझा करने से बचें।
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कोट--
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- मौसम बदलने बच्चों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन की समस्या बढ़ी है। अस्पताल में रोज 60 से 70 बच्चे इससे पीड़ित आ रहे हैं। इनमें नवजात शिशु से लेकर पांच साल तक के बच्चों की संख्या ज्यादा है। - डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय महिला अस्पताल, पीडीडीयू नगर
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कई दिनों से मौसम बार-बार बदल रहा है। दिन में तेज धूप तो सुबह और रात गलन हो रही है। इसका असर नवजातों शिशुओं से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। ये बच्चे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण के शिकार हो रहे है। राजकीय महिला अस्पताल में हर रोज 110 से 120 बच्चे आते हैं। इनमें 60 से 70 बच्चे श्वसन तंत्र के ऊपर भाग में संक्रमण से पीड़ित मिल रहे हैं।
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इन बच्चों में बुखार, गले में खराश, जुकाम, खांसी और आंखाें में जलन की समस्या होती है। ऐसे बच्चों अस्पताल में नेबुलाइजर देना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चों के इलाज के साथ उनकी समुचित देखभाल बहुत जरूरी है। बच्चों को सीधे हवा के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। उनके हाथ-पैर और कान को ढककर रखें। संक्रमण होने पर बच्चों का भाप अवश्य दें।
इनसेट-
ध्यान नहीं देने पर बढ़ जाता है खतरा
अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन पर ध्यान नहीं देने पर बच्चों में संक्रमण की समस्या गंभीर हो सकती है। समय पर समुचित इलाज नहीं हुआ तो यह संक्रमण एलआरटीआई (लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन) में बदल जाता है। डॉ. एसके चतुर्वेदी ने बताया अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन के बाद बच्चों में निमोनिया और श्वसन तंत्र की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
कमजोर शिशुओं को कंगारू मदर केयर की जरूरत
बदलते मौसम में रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन का खतरा उन नवजातों में ज्यादा रहता है, जो जयादा कमजोर होते हैं। डॉ. एसके चतुर्वेदी के बताया कि जिन शिशुओं को वजन ढाई किलो से कम होता है, उन्हें कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। इसके तहत बच्चे के कपड़े उतारकर मां उसे अपने शरीर से चिपका लेती है। यानी मां और बच्चे की स्किन एक-दूसरे के संपर्क में रहे। यह प्रकिया जितनी ज्यादा होगी, उससे बच्चे का बेहतर विकास होगा। उसे भूख लगेगी और वजन भी बढ़ेगा।
बरतें सावधानी
- बच्चों को सीधे हवा के संपर्क में आने से बचाएं।
- बच्चों के हाथ-पैर और कान ढककर रखें।
- संकमण होने पर बच्चों का भाप अवश्य दें।
- बच्चों के तौलिया, बिस्तर आदि साझा करने से बचें।
कोट
- मौसम बदलने बच्चों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इंफेक्शन की समस्या बढ़ी है। अस्पताल में रोज 60 से 70 बच्चे इससे पीड़ित आ रहे हैं। इनमें नवजात शिशु से लेकर पांच साल तक के बच्चों की संख्या ज्यादा है। - डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय महिला अस्पताल, पीडीडीयू नगर