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चकिया न्यायालय भवन का मुख्य न्यायाधीश ने किया ई-लोकार्पण 19-25-17
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चंदौली। चकिया में नव निर्मित न्यायालय भवन का शनिवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने इलाहाबाद से ई-लोकार्पण किया। इस दौरान वहां न्यायमूर्ति बालकृष्ण नारायण, न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति वीके बिरला, महानिबंधक उच्च न्यायालय अजय श्रीवास्तव मौजूद रहे। वहीं चंदौली में जिला जज गौरव कुमार श्रीवास्तव, डीएम नवनीत सिंह चहल, एसपी हेमंत कुटियाल सहित चंदौली और चकिया के बार के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
02-95 वर्ष पूर्व चकिया में हुई थी मुंसिफ कोर्ट की स्थापना
बनारस स्टेट के रामनगर चीफ कोर्ट से जुड़ा था मुंसिफ कोर्ट
चकिया। आजादी के पूर्व अंग्रेजी शासनकाल में पूर्व बनारस स्टेट के चकिया जिले में न्यायिक व्यवस्था के लिए वर्ष 1925 में मुंसिफ न्यायालय की स्थापना की गई थी। उसी दौरान तत्कालीन काशी नरेश द्वारा मुंसिफ कोर्ट का भवन एवं मुंसिफ मजिस्टेऊट आवास एवं कार्यालय बनवाया गया। तब से लेकर आज तक उसी 95 वर्ष पुराने भवन में ही मुंसिफ न्यायालय का संचालन होता है। यह न्यायालय आजादी के पूर्व रामनगर चीफ कोर्ट से जुड़ा हुआ था तथा काशी नरेश द्वारा नियुक्त न्यायाधीश मामलों की सुनवाई कर फैसला देते थे। वही अधिकांश मामलो को निस्तारित करने का अधिकार काशी नरेश के पास सुरक्षित था। शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोविंद माथूर द्वारा ई-उद्घाटन के माध्यस से मुंसिफ न्यायालय परिसर में तीन न्यायालयों, उनके कार्यालय एवं न्यायाधीशो के आवास का उद्घाटन किये जाने के बाद पुराने भवन की जगह अब नये भव्य भवन में चकिया के फौजदारी व दीवानी के वादो को सुना जायेगा। ई-उद्घाटन के बाद चकिया बार एसोसिएशन के अध्यक्षवैजनाथ प्रसाद राय ने बताया कि एसीजेएम, एक अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन का न्यायालय बनने से चकिया क्षेत्र के दुर्गम पर्वतीय वन क्षेत्रो के वादकारियों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना मजबूत हो गयी है।
6 थानो के वादकारियों के मामलो का होगा फैसला
चकिया। शनिवार को चकिया मुंसिफ न्यायालय परिसर में बने भव्य अदालत भवन के उद्घाटन के साथ ही चकिया में 2 अतिरिक्त न्यायाधीशो के बैठने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय के भवन में एक एसीजेएम, एक सिविल जज जूनियर डिवीजन का अतिरिक्त न्यायालय काम करेगा। जिसमें चकिया, शहाबगंज, इलिया, बबुरी, नौगढ़ तथा चकरघट्टा थानो के फौजदारी एवं दीवानी मामलो की सुनवाई होंगी।
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इनसेट
मुंसिफ न्यायालय का पुराना भवन हेरिटेज के रूप में रहेगा सुरक्षित
चकिया। वर्ष 1925 में पूर्व काशी नरेश द्वारा निर्मित मुंसिफ न्यायालय का भवन अपने स्थान पर सुरक्षित रहेगा। इस भवन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हेरिटेज न्यायालय भवन के रूप में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। इस भवन का भी रंगरोगन एवं साज-सज्जा की गई है।
लगभग 18 हजार मामले है पेंडिंग
चकिया। चकिया सिविल जज जूनियर डिवीजन के न्यायालय में दीवानी तथा फौजदारी के कुल 18 हजार के आस-पास मामले लम्बित है। इसलिए लम्बे समय से चकिया में अतिरिक्त कोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही थी। नये न्यायालय भवन का उद्घाटन होने के बाद अब मामलो के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गयी है।
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02-95 वर्ष पूर्व चकिया में हुई थी मुंसिफ कोर्ट की स्थापना
बनारस स्टेट के रामनगर चीफ कोर्ट से जुड़ा था मुंसिफ कोर्ट
चकिया। आजादी के पूर्व अंग्रेजी शासनकाल में पूर्व बनारस स्टेट के चकिया जिले में न्यायिक व्यवस्था के लिए वर्ष 1925 में मुंसिफ न्यायालय की स्थापना की गई थी। उसी दौरान तत्कालीन काशी नरेश द्वारा मुंसिफ कोर्ट का भवन एवं मुंसिफ मजिस्टेऊट आवास एवं कार्यालय बनवाया गया। तब से लेकर आज तक उसी 95 वर्ष पुराने भवन में ही मुंसिफ न्यायालय का संचालन होता है। यह न्यायालय आजादी के पूर्व रामनगर चीफ कोर्ट से जुड़ा हुआ था तथा काशी नरेश द्वारा नियुक्त न्यायाधीश मामलों की सुनवाई कर फैसला देते थे। वही अधिकांश मामलो को निस्तारित करने का अधिकार काशी नरेश के पास सुरक्षित था। शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोविंद माथूर द्वारा ई-उद्घाटन के माध्यस से मुंसिफ न्यायालय परिसर में तीन न्यायालयों, उनके कार्यालय एवं न्यायाधीशो के आवास का उद्घाटन किये जाने के बाद पुराने भवन की जगह अब नये भव्य भवन में चकिया के फौजदारी व दीवानी के वादो को सुना जायेगा। ई-उद्घाटन के बाद चकिया बार एसोसिएशन के अध्यक्षवैजनाथ प्रसाद राय ने बताया कि एसीजेएम, एक अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन का न्यायालय बनने से चकिया क्षेत्र के दुर्गम पर्वतीय वन क्षेत्रो के वादकारियों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना मजबूत हो गयी है।
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6 थानो के वादकारियों के मामलो का होगा फैसला
चकिया। शनिवार को चकिया मुंसिफ न्यायालय परिसर में बने भव्य अदालत भवन के उद्घाटन के साथ ही चकिया में 2 अतिरिक्त न्यायाधीशो के बैठने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय के भवन में एक एसीजेएम, एक सिविल जज जूनियर डिवीजन का अतिरिक्त न्यायालय काम करेगा। जिसमें चकिया, शहाबगंज, इलिया, बबुरी, नौगढ़ तथा चकरघट्टा थानो के फौजदारी एवं दीवानी मामलो की सुनवाई होंगी।
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मुंसिफ न्यायालय का पुराना भवन हेरिटेज के रूप में रहेगा सुरक्षित
चकिया। वर्ष 1925 में पूर्व काशी नरेश द्वारा निर्मित मुंसिफ न्यायालय का भवन अपने स्थान पर सुरक्षित रहेगा। इस भवन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हेरिटेज न्यायालय भवन के रूप में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। इस भवन का भी रंगरोगन एवं साज-सज्जा की गई है।
लगभग 18 हजार मामले है पेंडिंग
चकिया। चकिया सिविल जज जूनियर डिवीजन के न्यायालय में दीवानी तथा फौजदारी के कुल 18 हजार के आस-पास मामले लम्बित है। इसलिए लम्बे समय से चकिया में अतिरिक्त कोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही थी। नये न्यायालय भवन का उद्घाटन होने के बाद अब मामलो के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गयी है।