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पराली जलाने से खत्म होती है भूमि की उर्वरा शक्ति

Wed, 11 Nov 2020 12:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 12:47 AM IST
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Burning stubble ends the fertility of the land
चंदौली। खेतों में पराली जलाने से मिट्टी की जैविक उर्वरा शक्तियां खत्म हो जाती है। साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में किसानों को पराली जलाने के बजाए अवशेष प्रबंधन करें। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सदर ब्लाक केे बनौली खुर्द गांव में आयोजित जागरूकता गोष्ठी में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के उपायों के बारे में बताया।
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गोष्ठी में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि पराली जलाने से खेत में मौजूद जैविक शक्तियां खत्म हो जाती हैं। कहा कि फसल के अवशेष से कंपोस्ट खाद बनाकर किसान दोगुना फयदा उठा सकते है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. समीर पांडेय ने कहा कि खेत में भौतिक रासायनिक क्रियाओं को बढ़ाने के लिए कंपोस्ट खादों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कहा कि कंपोस्ट खाद बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को अनुदान देकर नैडेप का निर्माण कराया जा रहा है। इससे किसानों को रासायनिक खादों के प्रयोग की जरूरत नहीं होगी। कहा कि अगर किसान के द्वारा खेत में पाराली जलाया गया तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का प्राविधान है। ऐसे में फसल की कटाई के दौरान कंबाइन मशीन का प्रयोग करके किसान अवशेष प्रबंधन कर सकता है। इस दौरान डॉ. रितेश गंगवार, डॉ. दिनेश कुमार यादव, डा. कृष्ण मुरारी पांडेय रहे।
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रिपोर्ट- रविकांत सिंह
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