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Chandauli News: बुद्ध ने दिखाई शांति, अहिंसा और करुणा की राह
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इलिया। क्षेत्र के घुरहूपुर पहाड़ी पर स्थित गुफा में रविवार को महात्मा बुद्ध अष्टधातु की प्रतिमा विधि विधान के साथ स्थापित की गई। यह प्रतिमा वियतनाम से आई है, जिसका वजन करीब डेढ़ क्विंटल है।
समारोह में वियतनाम से आई वेन बोधिचित्त फाउंडेशन की डायरेक्टर फाम थाई फुंग वान ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा की राह दिखाई है। उन्होंने कहा था कि सभी जीव समान हैं। सभी के प्रति दया और करुणा रखनी चाहिए। हमेशा सत्य बोलना चाहिए और न्याय के लिए लड़ना चाहिए। साथ ही स्वयं को जानना और सुधारना चाहिए। महात्मा बुद्ध ने सहिष्णुता की राह पर चलने की बात कही थी। आज सारी दुनिया में उनके संदेशों की चर्चा होती है। भारत के लोग भाग्यशाली हैं, जो बुद्ध की धरा पर पैदा हुए।
श्रीलंका से आए भंते अशोक वंश ने कहा कि बुद्ध के विचार वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं। बुद्ध ने दुनिया को सत्य, न्याय, कर्म, नैतिकता, शांति व सहिष्णुता का संदेश दिया। इस मौके पर वियतनाम से आई नागेन थाई होवा, ट्रान थाई हुवांग, नगुवेन वान, घुरहूपुर बौद्ध संसाधन के अध्यक्ष वशिष्ठ सिंह मौर्य और महेंद्र राजभर आदि मौजूद थे।
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समारोह में वियतनाम से आई वेन बोधिचित्त फाउंडेशन की डायरेक्टर फाम थाई फुंग वान ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा की राह दिखाई है। उन्होंने कहा था कि सभी जीव समान हैं। सभी के प्रति दया और करुणा रखनी चाहिए। हमेशा सत्य बोलना चाहिए और न्याय के लिए लड़ना चाहिए। साथ ही स्वयं को जानना और सुधारना चाहिए। महात्मा बुद्ध ने सहिष्णुता की राह पर चलने की बात कही थी। आज सारी दुनिया में उनके संदेशों की चर्चा होती है। भारत के लोग भाग्यशाली हैं, जो बुद्ध की धरा पर पैदा हुए।
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श्रीलंका से आए भंते अशोक वंश ने कहा कि बुद्ध के विचार वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं। बुद्ध ने दुनिया को सत्य, न्याय, कर्म, नैतिकता, शांति व सहिष्णुता का संदेश दिया। इस मौके पर वियतनाम से आई नागेन थाई होवा, ट्रान थाई हुवांग, नगुवेन वान, घुरहूपुर बौद्ध संसाधन के अध्यक्ष वशिष्ठ सिंह मौर्य और महेंद्र राजभर आदि मौजूद थे।
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