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Chandauli News: सैयदराजा की गायत्री पीठ में ठहरा था भरत तिवारी, संकल्प टूट जाएगा बाबा कहकर ठुकरा दी थी कार की सवारी
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बिहार पुलिस ने 17 जून को एनकाउंटर में भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी को मार गिराया। भरत ने तीन साल पहले सैयदराजा स्थित गायत्री शक्तिपीठ में रात गुजारी थी। 2023 में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हिंदू राष्ट्र के संकल्प से प्रभावित होकर भरत तिवारी बिहार से मध्य प्रदेश स्थित बागेश्वर धाम तक पैदल यात्रा पर निकला था। इसी यात्रा के दौरान वह 7 फरवरी को सैयदराजा पहुंचा था। मंदिर के ट्रस्टी ने उसे खाना खिलाया था और उससे रात को रुकने के लिए कहा था। सुबह कार और बस से भेजने के ट्रस्टी के अनुरोध को उसने ठुकरा दिया था। कहा था कि गाड़ी पर बैठ जाएंगे तो संकल्प टूट जाएगा और फिर वह पैदल ही आगे बढ़ गया।
गायत्री शक्तिपीठ के पूर्व ट्रस्टी बब्बन सिंह ने भरत तिवारी ने बताया कि बैग लेकर गायत्री शक्तिपीठ आया था। उसके बैग पर भगवा ध्वज और बागेश्वर धाम की तस्वीर लगी थी। भरत तिवारी के विचार और उसकी सादगी ने मंदिर परिवार को प्रभावित कर दिया था। वह पूरे उत्साह के साथ कहता था कि देश में पहली बार ऐसा संत आया है जो राष्ट्र को जोड़ने का प्रयास कर रहा है और भारतवासियों को इस अभियान का समर्थन करना चाहिए। उसकी बातों में दृढ़ विश्वास और संकल्प झलकता था। मंदिर प्रबंधन ने भरत तिवारी को रात्रि विश्राम के लिए शक्तिपीठ में ही ठहराया। भोजन की व्यवस्था कराई गई और देर रात तक धर्म, राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा की। बब्बन सिंह ने बताया कि अगली सुबह स्नान-ध्यान के बाद भरत तिवारी यात्रा पर निकलने की तैयारी करने लगा। हमलोगों ने आग्रह किया कि वह नाश्ता या भोजन करके आगे बढ़े, लेकिन उसने विनम्रता से मना कर दिया। उसने कहा कि वह सुबह भोजन नहीं करता, क्योंकि पैदल यात्रा में दिक्कत होती है। केवल रात में किसी मंदिर या धर्मशाला में रुककर भोजन करता है। उसने बताया था कि वह प्रतिदिन लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करता है। मंदिर से विदा होते समय ट्रस्ट के लोगों ने उसे माला पहनाई थी। इसका एक रील भी भरत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की थी। बब्बन सिंह ने बताया कि वह वाराणसी स्थित अपने आवास के लिए कार से जा रहे थे तो चंदौली से आगे सड़क पर भरत तिवारी पैदल चलता हुआ दिखाई दिया था। कार रोककर उसे पड़ाव तक छोड़ने की बात कही तो उसने जवाब दिया, “बाबा, गाड़ी पर बैठ गया तो मेरा संकल्प टूट जाएगा। आज जब भरत तिवारी की मौत की खबर सामने आई है तो गायत्री शक्तिपीठ से जुड़े लोग तीन वर्ष पुरानी उस मुलाकात को याद कर रहे हैं। बब्बन सिंह ने बताया कि उन्हें बाद में जानकारी हुई कि उनका एनकाउंटर हो गया है।
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गायत्री शक्तिपीठ के पूर्व ट्रस्टी बब्बन सिंह ने भरत तिवारी ने बताया कि बैग लेकर गायत्री शक्तिपीठ आया था। उसके बैग पर भगवा ध्वज और बागेश्वर धाम की तस्वीर लगी थी। भरत तिवारी के विचार और उसकी सादगी ने मंदिर परिवार को प्रभावित कर दिया था। वह पूरे उत्साह के साथ कहता था कि देश में पहली बार ऐसा संत आया है जो राष्ट्र को जोड़ने का प्रयास कर रहा है और भारतवासियों को इस अभियान का समर्थन करना चाहिए। उसकी बातों में दृढ़ विश्वास और संकल्प झलकता था। मंदिर प्रबंधन ने भरत तिवारी को रात्रि विश्राम के लिए शक्तिपीठ में ही ठहराया। भोजन की व्यवस्था कराई गई और देर रात तक धर्म, राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा की। बब्बन सिंह ने बताया कि अगली सुबह स्नान-ध्यान के बाद भरत तिवारी यात्रा पर निकलने की तैयारी करने लगा। हमलोगों ने आग्रह किया कि वह नाश्ता या भोजन करके आगे बढ़े, लेकिन उसने विनम्रता से मना कर दिया। उसने कहा कि वह सुबह भोजन नहीं करता, क्योंकि पैदल यात्रा में दिक्कत होती है। केवल रात में किसी मंदिर या धर्मशाला में रुककर भोजन करता है। उसने बताया था कि वह प्रतिदिन लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करता है। मंदिर से विदा होते समय ट्रस्ट के लोगों ने उसे माला पहनाई थी। इसका एक रील भी भरत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की थी। बब्बन सिंह ने बताया कि वह वाराणसी स्थित अपने आवास के लिए कार से जा रहे थे तो चंदौली से आगे सड़क पर भरत तिवारी पैदल चलता हुआ दिखाई दिया था। कार रोककर उसे पड़ाव तक छोड़ने की बात कही तो उसने जवाब दिया, “बाबा, गाड़ी पर बैठ गया तो मेरा संकल्प टूट जाएगा। आज जब भरत तिवारी की मौत की खबर सामने आई है तो गायत्री शक्तिपीठ से जुड़े लोग तीन वर्ष पुरानी उस मुलाकात को याद कर रहे हैं। बब्बन सिंह ने बताया कि उन्हें बाद में जानकारी हुई कि उनका एनकाउंटर हो गया है।
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