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बेची जा रहीं नि:शुल्क किताबें
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Thu, 19 May 2016 01:55 AM IST
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मुगलसराय बाजार में बिक रही हिंदी कलरव किताबें।
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परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को नि:शुल्क बांटी जाने वाली कलरव नामक पुस्तक किताब की दूकानों पर 20-20 रुपये में बिक रही है। विद्या भारती से संचालित विद्यालयों और निजी क्षेत्र के कुछ अन्य स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं में हिंदी की इसी पुस्तक से पढ़ाई होती है।
परिषदीय विद्यालयों में आठवीं तक के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से यह पुस्तकें बाजार तक पहुंच गई हैं। कुछ निजी विद्यालयों ने भी इसे पाठ्यक्रम में रखा है।
सरस्वती शिशु मंदिर में कक्षा तीन, चार, पांच में हिंदी की कलरव पुस्तक पढ़ाई जाती है। शासन द्वारा भी सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क बंटने वाली किताबों के अलावा निजी विद्यालयों के लिए सशुल्क पुस्तक प्रकाशित की जाती है लेकिन नगर के दूकानदार सशुल्क पुस्तकों की जगह परिषदीय विद्यालयों की नि:शुल्क किताब बेच रहे हैं।
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हाल यह है कि कई बार दुकानदार पुरानी किताबें भी अभिभावकों को थमा रहे हैं। सरस्वती शिशु मंदिर में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने दूकान से जो किताब खरीदी है, उसका नंबर एफ-486790210371 है। इस पर साफ साफ लिखा है कि वर्ष 2012-13 में नि:शुल्क वितरण के लिए है। दूकानदार की ओर से बेची गई किताब पर जहां नि:शुल्क वितरण के लिए लिखा है, उसे काला कर दिया गया है, ताकि अभिभावक भ्रम में रहें और किसी तरह के विवाद की स्थिति न आए।
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परिषदीय विद्यालयों में आठवीं तक के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से यह पुस्तकें बाजार तक पहुंच गई हैं। कुछ निजी विद्यालयों ने भी इसे पाठ्यक्रम में रखा है।
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सरस्वती शिशु मंदिर में कक्षा तीन, चार, पांच में हिंदी की कलरव पुस्तक पढ़ाई जाती है। शासन द्वारा भी सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क बंटने वाली किताबों के अलावा निजी विद्यालयों के लिए सशुल्क पुस्तक प्रकाशित की जाती है लेकिन नगर के दूकानदार सशुल्क पुस्तकों की जगह परिषदीय विद्यालयों की नि:शुल्क किताब बेच रहे हैं।
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हाल यह है कि कई बार दुकानदार पुरानी किताबें भी अभिभावकों को थमा रहे हैं। सरस्वती शिशु मंदिर में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने दूकान से जो किताब खरीदी है, उसका नंबर एफ-486790210371 है। इस पर साफ साफ लिखा है कि वर्ष 2012-13 में नि:शुल्क वितरण के लिए है। दूकानदार की ओर से बेची गई किताब पर जहां नि:शुल्क वितरण के लिए लिखा है, उसे काला कर दिया गया है, ताकि अभिभावक भ्रम में रहें और किसी तरह के विवाद की स्थिति न आए।