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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Artists who shine on the big screen wander around the district to perform

World Theatre Day 2025: चंदौली में नहीं बन सका प्रेक्षागृह..., छलका कलाकारों का दर्द; मंच के लिए भटकते हैं

Thu, 27 Mar 2025 12:48 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 27 Mar 2025 12:48 AM IST
सार

जिले के कलाकारों का कहना है कि यहां दो बार चंदौली महोत्सव का आयोजन किया गया। तीसरी बार चंदौली महोत्सव के नाम पर मारकंडेय महादेव में उत्सव करा दिया गया। इससे कलाकारों को मंच नहीं मिल रहा है।

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Artists who shine on the big screen wander around the district to perform
प्रेक्षागृह की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

World Theatre Day 2025: कला और संस्कृति की राजधानी वाराणसी से सटे चंदौली में आज तक प्रेक्षागृह का निर्माण नहीं हो सका है। इसके चलते अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए कलाकार इधर-उधर भटकते हैं। कला के प्रदर्शन के लिए सरकारी आयोजन भी नहीं होते हैं।

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जिले में वर्ष 2019 में प्रेक्षागृह का निर्माण कराया गया, लेकिन यह केंद्रीय विद्यालय की ओर से किया गया है। आम लोगों के लिए कोई प्रेक्षागृह नहीं बनाया गया है। कलाकारों का कहना है कि मंच मिलने पर कलाकारों की प्रतिभा में और निखर आ सकता है। वाराणसी से अलग होकर वर्ष 1997 में चंदौली जिला बना।
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जिला बनने के लगभग 28 साल बीतने के बाद भी जिले में आज तक प्रेक्षागृह का निर्माण नहीं हो सका है। कलाकारों में जिले में कोई रंगमंच न होने से निराशा है। विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को जिले के कलाकारों का दर्द छलक गया। कलाकारों के अनुसार रंगमंच दर्शकों से सीधे संवाद का सशक्त माध्यम है।

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इसी संवाद को बढ़ाने के लिए यूनेस्को ने वर्ष 1961 में निर्णय लिया था कि 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाएगा। जिले में भी रंगमंच काफी समृद्ध रहा है, लेकिन प्रशासनिक तौर पर आज तक कुछ नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि यहां के कलाकारों ने आवाज नहीं उठाई है। जिले बनने से पहले से यहां प्रेक्षागृह के निर्माण की मांग हो रही है।

वरिष्ठ रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि कलाकारों के लिए प्रेक्षागृह बनाया जाना चाहिए। इससे यहां के कलाकार आगे बढ़ सकते हैं। उचित मंच न मिलने से कलाकार भटक रहे हैं। रंगकर्मी देवेश कुमार ने कहा कि मुगलसराय में 1960 में इंडियन इंस्टीट्यूट स्थित तत्कालीन रेलवे सिनेमा घर में प्रथम नाटक का मंचन किया गया था।

उसके बाद कुछ दिन तक यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन बाद में वह भी बंद हो गया। अंजू चौहान का कहना है कि विभिन्न संगठन रंगमंच के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन प्रस्तुति के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि नगर में एक प्रेक्षागृह बनाया जाना चाहिए। ताकि कलाकारों को मंच मिल सके।

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