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प्रकाश पर्व पर गुरु से की महामारी से मुक्ति की अरदास

Sun, 02 May 2021 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 12:22 AM IST
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Ardas of liberation from the pandemic of the Guru on the occasion of Prakash Parv
संवाद न्यूज एजेंसी
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पीडीडीयू नगर । सिख धर्म के नौवें गु्रु साहिब गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाश पर्व के अवसर पर नगर स्थित गुरुद्वारे में बृहस्पतिवार से आयोजित अखंड पाठ की समाप्ति शनिवार शाम को हुई। श्रद्धालुओं ने गुरु से महामारी से मुक्ति की अरदास लगाई। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर दीवान भी सजाया गया। जिसमें कथा-कीर्तन के साथ गुरु साहिब के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस दौरान कोविड-19 के प्रोटोकाल का विशेष ध्यान रखा गया। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान रंजीत सिंह शम्मी, जनरल सेक्रेटरी सरदार महेंद्र सिंह पत्रकार, संरक्षक रामेंद्र सिंह, गुरुदयाल सिंह, सतपाल सिंह सूरी,अमरिक सिंह मौजूद रहे।
पीडीडीयू नगर। धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान बहुत ऊंचा है। उन्होंने जान तो दे दी, परंतु सत्य का त्याग नहीं किया। दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब व गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं। गुरु तेगबहादुर जी प्रयाग, बनारस, पटना, असम आदि क्षेत्रों में गए, जहां उन्होंने आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक, उन्नयन के लिए रचनात्मक कार्य किए। ये बातें गुरुतेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाश पर्व पर सिख श्रद्धालुओं ने साझा की।
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गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रबंधक सरदार रणजीत सिंह शम्मी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का नाम विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों के तौर पर लिया जाता है। कमेटी के सेक्रेटरी सरदार महेंद्र सिंह ने बताया कि गुरुजी का बलिदान न केवल धर्म पालन के लिए नहीं अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था। सरदार सतपाल सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में वीरता का परिचय दिया था। उन्होंने आध्यात्मिकता, धर्म का ज्ञान बांटा साथ ही रूढ़ियों, अंधविश्वासों की आलोचना कर नये आदर्श स्थापित किए। सरदार अमरीक सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने सहनशीलता, कोमलता और सौम्यता की मिसाल के साथ यह संदेश दिया कि किसी भी इंसान को न तो डराना चाहिए और न ही डरना चाहिए।
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