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एनीमिया पर चरचा
चंदौली अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2015 01:51 AM IST
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राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत गुरुवार को महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज में एक
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दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें सदर ब्लाक की आंगनबाड़ी और आशा
कार्यकर्ताओं सहित एएनएम और ग्राम प्रधानों को एनीमिया से होने वाले
नुकसान व कुपोषण दूर करने के उपायों की जानकारी दी गई।
सीडीओ जगदीश सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर सीडीओ ने कहा कि कुपोषण एक गंभीर समस्या है। इसके रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं संचालित कर रहीं हैं।
प्रत्येक जनपदों में डीएम और सीडीओ द्वारा दो-दो गांवों को गोद लेकर वहां कुपोषण दूर करने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है। कहा कि राज्य सरकार ने यह घोषणा की है कि कुपोषण रोकने की दिशा में सबसे अच्छा प्रयास करने वाले जनपद को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरएन सिंह ने एनीमिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह खून की कमी से होने वाली बीमारी है।
इसके कारण प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। एनीमिया तीन प्रकार का होता है। इसकी रोकथाम के लिए आशाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाआें को आयरन की सौ गोलियां प्रदान की जाती हैं। समस्या गंभीर होने पर दो सौ गोलियां वितरित करने का प्रावधान है। बताया कि गर्भवती महिलाएं आयरन और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करके एनिमिया से बच सकती हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा राय ने बताया कि कुपोषण रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर प्रयास कर रहे हैं।इस अवसर पर पीडी शशिमौली मिश्रा, डा. एचआर मौर्य, सीडीपीओ सदर एसके राय आदि उपस्थित रहे।
सीडीओ जगदीश सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर सीडीओ ने कहा कि कुपोषण एक गंभीर समस्या है। इसके रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं संचालित कर रहीं हैं।
प्रत्येक जनपदों में डीएम और सीडीओ द्वारा दो-दो गांवों को गोद लेकर वहां कुपोषण दूर करने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है। कहा कि राज्य सरकार ने यह घोषणा की है कि कुपोषण रोकने की दिशा में सबसे अच्छा प्रयास करने वाले जनपद को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरएन सिंह ने एनीमिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह खून की कमी से होने वाली बीमारी है।
इसके कारण प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। एनीमिया तीन प्रकार का होता है। इसकी रोकथाम के लिए आशाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाआें को आयरन की सौ गोलियां प्रदान की जाती हैं। समस्या गंभीर होने पर दो सौ गोलियां वितरित करने का प्रावधान है। बताया कि गर्भवती महिलाएं आयरन और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करके एनिमिया से बच सकती हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा राय ने बताया कि कुपोषण रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर प्रयास कर रहे हैं।इस अवसर पर पीडी शशिमौली मिश्रा, डा. एचआर मौर्य, सीडीपीओ सदर एसके राय आदि उपस्थित रहे।