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Chandauli News: कायाकल्प में भ्रष्टाचार के आरोप की होगी जांच
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कंदवा। डीएम के जांच कराने के निर्देश के बावजूद अधिकारियों ने पांच महीने तक कायाकल्प में भ्रष्टाचार के मामले को दबाए रखा। अब उप निदेशक (पंचायत) वाराणसी मंडल एके सिंह ने सख्त टिप्पणी करते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को जल्द से जल्द जांच कराने का निर्देश दिया है।
जलालपुर गांव के सनी सिंह ने 29 फरवरी 2024 को डीएम को पत्रक देकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उन्होंने गांव में कायाकल्प के नाम पर 1.95 लाख, टेबल डेस्क के नाम पर दो लाख, हैंडपंप रीबोर के नाम पर दो लाख, नाली और इंटरलाकिंग के नाम पर चार लाख और अमृत सरोवर के निर्माण समेत अन्य मदों में करीब 13 लाख रुपए फर्जी भुगतान की शिकायत डीएम से की थी। इस पर डीएम निखिल टीकाराम फुंडे ने 15 मार्च 2024 को सहायक निदेशक मत्स्य और अधिशासी अभियंता चंद्रप्रभा प्रखंड को जांच अधिकारी नामित कर जांच का निर्देश दिया था।
इसके बावजूद अधिकारियों ने मामले की जांच नहीं की। इसके बाद सनी सिंह ने उप निदेशक (पंचायत) वाराणसी मंडल से मामले की शिकायत की। इस पर उप निदेशक ने जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा को जांच कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा है कि जांच अधिकारी नियुक्त होने के पांच महीने बाद भी जांच न होने से शासन/प्रशासन और विभाग की छवि धूमिल हो रही है। इससे जनमानस में गलत संदेश जा रहा है। जबकि शासनादेश 1997 के बिंदु 4 (2) में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जिला पंचायत राज अधिकारी 30 दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को प्रस्तुत करेंगे।
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मामले में डीएम की ओर से नामित अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। इससे स्पष्ट है कि जांच अधिकारी उदासीनता और शिथिलता बरत रहे हैं। इस संबंध में डीपीआरओ नीरज सिन्हा का कहना है कि मामले की जांच के लिए 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है।
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जलालपुर गांव के सनी सिंह ने 29 फरवरी 2024 को डीएम को पत्रक देकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उन्होंने गांव में कायाकल्प के नाम पर 1.95 लाख, टेबल डेस्क के नाम पर दो लाख, हैंडपंप रीबोर के नाम पर दो लाख, नाली और इंटरलाकिंग के नाम पर चार लाख और अमृत सरोवर के निर्माण समेत अन्य मदों में करीब 13 लाख रुपए फर्जी भुगतान की शिकायत डीएम से की थी। इस पर डीएम निखिल टीकाराम फुंडे ने 15 मार्च 2024 को सहायक निदेशक मत्स्य और अधिशासी अभियंता चंद्रप्रभा प्रखंड को जांच अधिकारी नामित कर जांच का निर्देश दिया था।
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इसके बावजूद अधिकारियों ने मामले की जांच नहीं की। इसके बाद सनी सिंह ने उप निदेशक (पंचायत) वाराणसी मंडल से मामले की शिकायत की। इस पर उप निदेशक ने जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा को जांच कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा है कि जांच अधिकारी नियुक्त होने के पांच महीने बाद भी जांच न होने से शासन/प्रशासन और विभाग की छवि धूमिल हो रही है। इससे जनमानस में गलत संदेश जा रहा है। जबकि शासनादेश 1997 के बिंदु 4 (2) में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जिला पंचायत राज अधिकारी 30 दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को प्रस्तुत करेंगे।
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मामले में डीएम की ओर से नामित अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। इससे स्पष्ट है कि जांच अधिकारी उदासीनता और शिथिलता बरत रहे हैं। इस संबंध में डीपीआरओ नीरज सिन्हा का कहना है कि मामले की जांच के लिए 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है।