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बारिश में भींग गया किसानों का 1500 कुंतल धान
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नवीन मंडी में बारिश से भींग रहा किसानों का धान
- फोटो : CHANDAULI
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चंदौली। किसानों को जिसका डर था वही हुआ। किसानों से खरीद के लिए नवीन कृषि मंडी में बने क्रय केंद्रों पर खुले में रखा गया लगभग 1500 कुंतल धान खतरे में पड़ गया है। क्रय एजेंसियों ने खरीदे अपने धान को तो बचा लिए मगर किसानों का धान भींग गया। बृहस्पतिवार की रात व शुक्रवार की सुबह बारिश के दौरान किसानों ने तिरपाल और पॉलिथीन से जैसे-तैसे ढंककर कुछ धान को बचाने का प्रयास किया, लेकिन धान बारिश में भींग रहा है। मौसम इसी प्रकार रहा तो धान सड़कर बर्बाद जाएगा। मेहनत की गाढ़ी कमाई लेकर क्रय केंद्र पहुंचे किसानों की उपज सुरक्षित स्थान के अभाव में खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन की ओर से ढंकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
मुख्यालय स्थित नवीन मंडी परिसर में किसानों के धान को खरीदने के लिए कुल चार क्रय केंद्र बनाए गए हैं। हजारों कुंतल सरकारी धान को क्रय केंद्रों के प्रभारियों ने सुरक्षित तो बचा लिया, लेकिन किसानों का लगभग 1500 कुंतल धान बारिश में भींग रहा है। किसानों की चिंता न जनप्रतिनिधियों को है और न ही प्रशासनिक मशीनरी को। हाल तो यह है कि जसुरी स्थित जिलाधिकारी के नाम से खेत से कटाई के बाद मंडी परिसर में रखा जिलाधिकारी का धान भी भींग गया। इसे दिनभर राजस्व विभाग के कर्मचारी लगकर सुरक्षित स्थान पर रखते नजर आए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब अधिकारी अपना ही धान सुरक्षित नहीं रख सकते हैं तो किसानों के धान को कितना सुरक्षित रख पाएंगे। वहीं मंडी परिसर में किसान भी अपने धानों को सुरक्षित करने में दिनभर लगे रहे। मंडी परिसर स्थित क्रय केंद्रों प्रभारियों ने खरीद किए धान को सुरक्षित रख लिया है।
बारिश से खेती किसानी पर संकट के बादल
चंदौली। जिले में धान की फसल की कटाई का अंतिम दौर चल रहा है। लेकिन बहस्पतिवार की रात और शुक्रवार को पूरे दिन हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्रय केंद्र सुचारु रुप से संचालित नहीं होने से किसानों की उपज खेत खलिहानों में पड़ी है। वहीं पानी से भींग जाने के कारण धान के खराब होने की संभावना प्रबल हो गई है। उधर मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि शनिवार को भी हल्की बारिश के आसार हैं। ऐसे में किसानों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डा. कृष्ण मुरारी पांडेय ने बताया कि शनिवार को पूरे दिन आकाश में बादल छाए रहेंगे। वहीं हल्की बारिश का भी अनुमान है। बताया कि अधिकतम तापमान 20.9 से 24.4 डिग्री तथा न्यूनतम 9.0 से 12.3 डिग्री सेंटीग्रेड के मध्य रहेगा। वहीं मौसम में 66 से 94 फीसदी आर्द्रता होगी। इस दौरान मध्यम गति से उत्तरी, पूर्वी तथा पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना है। बताया कि मौसम को दखते हुए किसान रबी की बुआई को ठप रखें और आसमान साफ होने के बाद ही खेत की जुताई करें। इस समय फसलों की सिंचाई करने से नुकसान हो सकता है।
सब्जी के खेती में कीट लगने की संभावना
चंदौली। बारिश के चलते खरीफ की फसल के साथ ही सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है। आलू की फसल खराब होगी। कृषि वैज्ञानिक डा. समीर पांडेय ने बताया कि सब्जियों में कीट लग सकता है। ऐसे में किसान कुछ दिन तक फसल की सिंचाई ठप रखे। बारिश से टमाटर की फसल को कीट के प्रकोप से बचाने के लिए इमिडाक्लोरपिड का 0.5 मिली प्रति लीटर के दर से छिड़काव करें। वहीं गोभी वर्गीय सब्जियों में कीट एवं बीमारियों के प्रकोप से बचाने के लिए सिक्सर (मेंकोजेब, इमिडाक्लोरपिड) का एक मिली प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।
इसी तरह मौसम रहा तो किसान हो जाएंगे बर्बाद
चंदौली। मौसम बिगड़ने के बाद बृहस्पतिवार की रात व शुक्रवार की सुबह हुई बारिश से करीब 1500 क्विंटल धान भींग गया। अगर मौसम इसी तरह रहा तो वह किसी काम का नहीं रह जाएगा। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसके बाबत धरौली गांव निवासी किसान प्रदीप सिंह ने कहा कि धान खुले आसमान के नीचे रखा गया है। बारिश होने के कारण भींग गया है। धान के रख रखाव की उचित व्यवस्था करने की गुहार भी लगाई, लेकिन विभाग ने नजर अंदाज किया। बिसौरी गांव निवासी कृष्णमोहन सिंह ने कहा ने करीब 100 क्विंटल धान खुले में रखा था जो बारिश के पानी में भींग गया है। क्रय केंद्रों की लापरवाही से खरीदारी नहीं होने से नुकसान हुआ है। किसानों के सारी पूंजी को ही बर्बाद कर दिया। फगुुईया गांव निवासी कैलाश यादव ने कहा कि बारिश के कारण किसानों की पूरी कमाई बरबाद होने के कगार पर पहुंच गई है। मौसम में सुधार नहीं हुआ तो किसान बर्बाद हो जाएगें। हथियानी गांव निवासी रामकेश सिंह यादव ने कहा बारिश ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दिया है। सरकार इसका समाधान नहीं कर रही है।
13 मिमी हुई बारिश, नुकसान
चकिया। पश्चिमी विक्षोभ के चलते जाड़े के आरम्भिक चरण में ही गुरूवार की देर रात हुई 13 मिलीमीटर की भारी बरसात ने किसानों का चैन छीन लिया है। खलिहानो में धान की कटाई के बाद रखे गेहूँ के बोझ तथा कटे हुए धान के ढेर पूरी तरह पानी में डूब गया है। इस बरसात से सिर्फ 15 नवम्बर के पूर्व बोयी गई दलहनी तथा तिलहनी फसलों को फायदा पहुंचा है। सिंचाई विभाग के मुताबिक गुरूवार की देर रात जलभग 13 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक डा. आरपी सिंह के अनुसार जाड़े की बरसात सामान्य दिनो में किसानों को फायदा पहुंचाती थी लेकिन पराली न जलाने के संकट के कारण गेहूँ की बुवाई तथा धान की कटाई, मड़ाई में देरी हो गई है। जिससे धान और आगे बोई जाने वाली गेहूं की फसल के प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।
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मुख्यालय स्थित नवीन मंडी परिसर में किसानों के धान को खरीदने के लिए कुल चार क्रय केंद्र बनाए गए हैं। हजारों कुंतल सरकारी धान को क्रय केंद्रों के प्रभारियों ने सुरक्षित तो बचा लिया, लेकिन किसानों का लगभग 1500 कुंतल धान बारिश में भींग रहा है। किसानों की चिंता न जनप्रतिनिधियों को है और न ही प्रशासनिक मशीनरी को। हाल तो यह है कि जसुरी स्थित जिलाधिकारी के नाम से खेत से कटाई के बाद मंडी परिसर में रखा जिलाधिकारी का धान भी भींग गया। इसे दिनभर राजस्व विभाग के कर्मचारी लगकर सुरक्षित स्थान पर रखते नजर आए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब अधिकारी अपना ही धान सुरक्षित नहीं रख सकते हैं तो किसानों के धान को कितना सुरक्षित रख पाएंगे। वहीं मंडी परिसर में किसान भी अपने धानों को सुरक्षित करने में दिनभर लगे रहे। मंडी परिसर स्थित क्रय केंद्रों प्रभारियों ने खरीद किए धान को सुरक्षित रख लिया है।
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बारिश से खेती किसानी पर संकट के बादल
चंदौली। जिले में धान की फसल की कटाई का अंतिम दौर चल रहा है। लेकिन बहस्पतिवार की रात और शुक्रवार को पूरे दिन हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्रय केंद्र सुचारु रुप से संचालित नहीं होने से किसानों की उपज खेत खलिहानों में पड़ी है। वहीं पानी से भींग जाने के कारण धान के खराब होने की संभावना प्रबल हो गई है। उधर मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि शनिवार को भी हल्की बारिश के आसार हैं। ऐसे में किसानों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डा. कृष्ण मुरारी पांडेय ने बताया कि शनिवार को पूरे दिन आकाश में बादल छाए रहेंगे। वहीं हल्की बारिश का भी अनुमान है। बताया कि अधिकतम तापमान 20.9 से 24.4 डिग्री तथा न्यूनतम 9.0 से 12.3 डिग्री सेंटीग्रेड के मध्य रहेगा। वहीं मौसम में 66 से 94 फीसदी आर्द्रता होगी। इस दौरान मध्यम गति से उत्तरी, पूर्वी तथा पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना है। बताया कि मौसम को दखते हुए किसान रबी की बुआई को ठप रखें और आसमान साफ होने के बाद ही खेत की जुताई करें। इस समय फसलों की सिंचाई करने से नुकसान हो सकता है।
सब्जी के खेती में कीट लगने की संभावना
चंदौली। बारिश के चलते खरीफ की फसल के साथ ही सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है। आलू की फसल खराब होगी। कृषि वैज्ञानिक डा. समीर पांडेय ने बताया कि सब्जियों में कीट लग सकता है। ऐसे में किसान कुछ दिन तक फसल की सिंचाई ठप रखे। बारिश से टमाटर की फसल को कीट के प्रकोप से बचाने के लिए इमिडाक्लोरपिड का 0.5 मिली प्रति लीटर के दर से छिड़काव करें। वहीं गोभी वर्गीय सब्जियों में कीट एवं बीमारियों के प्रकोप से बचाने के लिए सिक्सर (मेंकोजेब, इमिडाक्लोरपिड) का एक मिली प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।
इसी तरह मौसम रहा तो किसान हो जाएंगे बर्बाद
चंदौली। मौसम बिगड़ने के बाद बृहस्पतिवार की रात व शुक्रवार की सुबह हुई बारिश से करीब 1500 क्विंटल धान भींग गया। अगर मौसम इसी तरह रहा तो वह किसी काम का नहीं रह जाएगा। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसके बाबत धरौली गांव निवासी किसान प्रदीप सिंह ने कहा कि धान खुले आसमान के नीचे रखा गया है। बारिश होने के कारण भींग गया है। धान के रख रखाव की उचित व्यवस्था करने की गुहार भी लगाई, लेकिन विभाग ने नजर अंदाज किया। बिसौरी गांव निवासी कृष्णमोहन सिंह ने कहा ने करीब 100 क्विंटल धान खुले में रखा था जो बारिश के पानी में भींग गया है। क्रय केंद्रों की लापरवाही से खरीदारी नहीं होने से नुकसान हुआ है। किसानों के सारी पूंजी को ही बर्बाद कर दिया। फगुुईया गांव निवासी कैलाश यादव ने कहा कि बारिश के कारण किसानों की पूरी कमाई बरबाद होने के कगार पर पहुंच गई है। मौसम में सुधार नहीं हुआ तो किसान बर्बाद हो जाएगें। हथियानी गांव निवासी रामकेश सिंह यादव ने कहा बारिश ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दिया है। सरकार इसका समाधान नहीं कर रही है।
13 मिमी हुई बारिश, नुकसान
चकिया। पश्चिमी विक्षोभ के चलते जाड़े के आरम्भिक चरण में ही गुरूवार की देर रात हुई 13 मिलीमीटर की भारी बरसात ने किसानों का चैन छीन लिया है। खलिहानो में धान की कटाई के बाद रखे गेहूँ के बोझ तथा कटे हुए धान के ढेर पूरी तरह पानी में डूब गया है। इस बरसात से सिर्फ 15 नवम्बर के पूर्व बोयी गई दलहनी तथा तिलहनी फसलों को फायदा पहुंचा है। सिंचाई विभाग के मुताबिक गुरूवार की देर रात जलभग 13 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक डा. आरपी सिंह के अनुसार जाड़े की बरसात सामान्य दिनो में किसानों को फायदा पहुंचाती थी लेकिन पराली न जलाने के संकट के कारण गेहूँ की बुवाई तथा धान की कटाई, मड़ाई में देरी हो गई है। जिससे धान और आगे बोई जाने वाली गेहूं की फसल के प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।