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Chandauli News: सरकारी अस्पतालों से रेफर होने के बाद दलाल बिना पंजीकृत अस्पतालों में कराते हैं भर्ती

Tue, 09 Sep 2025 10:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 10:52 PM IST
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After being referred from government hospitals
जिला महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समय पर इलाज न मिलने और इमरजेंसी में गर्भवती महिलाएं रेफर कर दी जाती हैं। मजबूरी में वह अवैध अस्पतालों में चली जाती हैं। कई बार दलाल इन्हें निजी अस्पतालों में पहुंचाते हैं। इसके लिए उन्हें मोटा कमीशन भी मिलता है।
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बिना मानक या गैर पंजीकृत अस्पतालों लापरवाही से कई जच्चा-बच्चा की मौत भी हो चुकी है। पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला अस्पताल परिसर में मातृ शिशु विंग विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के इलाज के लिए स्थापित है।
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यहां रोजाना 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है, वहीं 10 से 12 महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। इनमें अधिकांश सीजर ऑपरेशन होते हैं। बावजूद इसके कई बार समन्वय और सुविधा के अभाव में मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी गर्भवती महिलाओं को अक्सर रेफर कर दिया जाता है, जिससे वे अन्य प्राइवेट और अवैध अस्पतालों पर निर्भर हो जाती हैं।


हाल ही में बबुरी थाना क्षेत्र के पांडेयपुर बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान 23 वर्षीय निशा की मौत हो गई। ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव बढ़ने से महिला ने दम तोड़ दिया। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी और शव रखकर सड़क पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने चिकित्सक पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की।

नौगढ़ तहसील के बाघी गांव की आदिवासी महिला मीरा (32) की भी प्रसव के बाद मौत हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होने के बाद परिजन संसाधन और जानकारी के अभाव में उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले गए। वहां ऑपरेशन से बच्चे का जन्म तो हो गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर दोबारा रेफर कर दिया गया। इस बार वह बड़े अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ बैठी।




जिला अस्पताल परिसर में बने मातृ शिशु विंग में 24 घंटे इमरजेंसी संचालित की जाती है। प्रतिदिन 10 से 12 प्रसव कराए जाते हैं। गंभीर स्थिति में ही मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। -डॉ. के. सी. सिंह, मुख्य चिकित्सक, मातृ शिशु विंग, चंदौली
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