फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   A son of Chandauli displayed indomitable courage on the battlefield of Kargil.

Chandauli News: कारगिल के रण में चंदौली के लाल ने दिखाया था अदम्य साहस

Sun, 26 Jul 2026 01:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:31 AM IST
विज्ञापन
A son of Chandauli displayed indomitable courage on the battlefield of Kargil.
मेा.इकबाल आबिद, विजय कारगिल दिवस की खबर के लिए, संवाद
पीडीडीयू नगर। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान की अमर गाथा है। वर्ष 1999 में कारगिल की दुर्गम चोटियों पर हुए निर्णायक युद्ध ने पूरी दुनिया को भारतीय सैनिकों के शौर्य का परिचय कराया।
विज्ञापन

इस अभियान का हिस्सा रहे पीडीडीयू नगर के कसाब महाल निवासी वायुसेना से सेवानिवृत्त मोहम्मद इकबाल आबिद की आंखों में साथियों की शहादत की पीड़ा और चेहरे पर विजय का गर्व एक साथ दिखाई देता है।
विज्ञापन

आबिद बताते हैं कि 15 जून 1999 की रात करीब 12 बजे गुजरात के जामनगर स्थित पेसिव एयर डिफेंस (पीएडी) स्टेशन पर अचानक सायरन गूंज उठा।
रात के सन्नाटे में बजा यह सायरन किसी सामान्य अभ्यास का हिस्सा नहीं था। कुछ ही मिनटों में पूरा एयरबेस सक्रिय हो गया। सभी जवान अपने-अपने युद्धक दायित्वों के लिए तैयार होकर कमांडिंग ऑफिसर एसएस कार्निक के कार्यालय पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहां उन्हें बताया गया कि कारगिल में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक सैन्य अभियान शुरू हो चुका है और अब हर पल महत्वपूर्ण है।
इसके बाद पूरा एयरबेस युद्धक्षेत्र में बदल गया था। आबिद बताते हैं कि जवानों ने बिना समय गंवाए 27 लड़ाकू विमान, एमआई-8 हेलीकॉप्टर, एएन-32 और डोर्नियर ट्रांसपोर्ट विमानों को मिशन के लिए तैयार करना शुरू कर दिया। सूरज निकलने से पहले ही एक के बाद एक विमान कारगिल की ओर उड़ान भरने लगे।
कोई विमान हथियार और गोला-बारूद पहुंचा रहा था तो कोई सेना की टुकड़ियों को अग्रिम मोर्चे तक ले जा रहा था। कई बार वही विमान शहीद जवानों के पार्थिव शरीर लेकर लौटते थे।
उन क्षणों को याद करते हुए आबिद भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि सैनिक के लिए सबसे कठिन समय वह होता है, जब वह अपने साथी को तिरंगे में लिपटा देखता है, लेकिन अगले ही पल उसे फिर उसी जोश के साथ मिशन पर निकलना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि कारगिल का युद्ध केवल गोलियों का नहीं बल्कि धैर्य, रणनीति और मनोबल की भी लड़ाई थी। दुर्गम पहाड़ियां, कम ऑक्सीजन, खराब मौसम और ऊंचाई पर बैठे दुश्मन के बावजूद भारतीय सेना और वायुसेना ने अद्भुत समन्वय का परिचय दिया।
भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों ने दुश्मन की चौकियों को ध्वस्त किया और थल सेना के लिए आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया।
यही कारण रहा कि लगभग असंभव दिखाई देने वाली जीत भारत के नाम हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed