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Chandauli News: पांच साल पहले गायब बालक आगरा में मिला, सबूत के अभाव में घर नहीं पहुंचा
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पीडीडीयू नगर। काली महाल से पांच साल पहले खेलते समय लापता हुआ चार वर्षीय बालक आगरा पुलिस को मिल गया। पुलिस की सूचना पर पिता विनोद और माता शकीना ने आगरा पहुंच कर बेटे की पहचान भी कर ली। चाइल्ड लाइन उसे लेकर पीडीडीयू नगर आई, लेकिन अब बेटा मां-बाप को नहीं पहचान रहा है। ऐसे में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस सबूत जुटाने में जुटी है।
नगर के काली महाल से पांच साल पहले चार वर्षीय बालक खेलते समय लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद भी बच्चे का पता नहीं चलने पर मजदूर पिता विनोद उर्फ गुड्डू ने मुगलसराय कोतवाली में तहरीर दी। कुछ दिन पहले उनका बेटा आगरा पुलिस को मिल गया। पुलिस की सूचना पर पिता विनोद और मां शकीना ने आगरा पहुंच कर बेटे की पहचान भी कर ली। चाइल्ड लाइन उसे लेकर पीडीडीयू नगर आई, लेकिन अब बेटा मां-बाप को नहीं पहचान रहा है। बेटे के आने के बाद भी घर न पहुंचने मां-बाप परेशान हैं। मजदूरी कर पेट पालने वाले विनोद उर्फ गुड्डू ने शकीना के साथ शादी की है। शकीना का चार वर्षीय बेटा अरमान पांच साल पहले काली महाल चौराहे पर खेल रहा था। इसी बीच वह गायब हो गया। परिवार वालों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। थक हारकर विनोद ने इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। पुलिस बच्चे के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बाद में यह मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस के पास चला गया। पुलिस ने प्रदेश के सभी थानों को उसकी फोटो भेज दी। इस बीच लगभग 10 महीने पहले आगरा के समीप कासगंज में बालक एक होटल पर बर्तन माजते हुआ दिखा। इस पर वहां की चाइल्ड लाइन ने उसे पकड़ किया और काउंसिलिंग की। उसे बाल सुधार गृह में भेजा गया। इस बीच अपहृत बालक की फोटो का मिलान किया गया तो पांच साल पहले गायब अरमान से उसकी शक्ल मिलती दिखी। इस पर आगरा पुलिस ने चंदौली पुलिस को सूचना दी। सूचना के आधार पर बीते आठ जून को गुड्डू, शकीना ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस के निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के साथ आगरा गए। वहां बच्चे ने मां-बाप को पहचानने से इन्कार कर दिया। काफी जद्दोजहद के बाद बच्चे को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) की टीम अपने साथ चंदौली ले आई, लेकिन सबूत के अभाव में बच्चे को परिवार को नहीं सौंपा। अब बच्चा चंदौली के बाल सुधार गृह में है। वहीं बेटे के मिलने के बाद भी शकीना और विनोद उसे गोद में खिलाने के लिए परेशान हैं। एएचटीयू के प्रभारी निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उनका कहना था कि हम सभी चाहते हैं कि बच्चा अपने मां-बाप के पास चला जाए। इसके लिए चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।
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नगर के काली महाल से पांच साल पहले चार वर्षीय बालक खेलते समय लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद भी बच्चे का पता नहीं चलने पर मजदूर पिता विनोद उर्फ गुड्डू ने मुगलसराय कोतवाली में तहरीर दी। कुछ दिन पहले उनका बेटा आगरा पुलिस को मिल गया। पुलिस की सूचना पर पिता विनोद और मां शकीना ने आगरा पहुंच कर बेटे की पहचान भी कर ली। चाइल्ड लाइन उसे लेकर पीडीडीयू नगर आई, लेकिन अब बेटा मां-बाप को नहीं पहचान रहा है। बेटे के आने के बाद भी घर न पहुंचने मां-बाप परेशान हैं। मजदूरी कर पेट पालने वाले विनोद उर्फ गुड्डू ने शकीना के साथ शादी की है। शकीना का चार वर्षीय बेटा अरमान पांच साल पहले काली महाल चौराहे पर खेल रहा था। इसी बीच वह गायब हो गया। परिवार वालों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। थक हारकर विनोद ने इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। पुलिस बच्चे के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बाद में यह मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस के पास चला गया। पुलिस ने प्रदेश के सभी थानों को उसकी फोटो भेज दी। इस बीच लगभग 10 महीने पहले आगरा के समीप कासगंज में बालक एक होटल पर बर्तन माजते हुआ दिखा। इस पर वहां की चाइल्ड लाइन ने उसे पकड़ किया और काउंसिलिंग की। उसे बाल सुधार गृह में भेजा गया। इस बीच अपहृत बालक की फोटो का मिलान किया गया तो पांच साल पहले गायब अरमान से उसकी शक्ल मिलती दिखी। इस पर आगरा पुलिस ने चंदौली पुलिस को सूचना दी। सूचना के आधार पर बीते आठ जून को गुड्डू, शकीना ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस के निरीक्षक राघवेंद्र सिंह के साथ आगरा गए। वहां बच्चे ने मां-बाप को पहचानने से इन्कार कर दिया। काफी जद्दोजहद के बाद बच्चे को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) की टीम अपने साथ चंदौली ले आई, लेकिन सबूत के अभाव में बच्चे को परिवार को नहीं सौंपा। अब बच्चा चंदौली के बाल सुधार गृह में है। वहीं बेटे के मिलने के बाद भी शकीना और विनोद उसे गोद में खिलाने के लिए परेशान हैं। एएचटीयू के प्रभारी निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उनका कहना था कि हम सभी चाहते हैं कि बच्चा अपने मां-बाप के पास चला जाए। इसके लिए चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।
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