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चित्रकूट में राम भरत मिलन देख भावुक हुए लीला प्रेमी
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:03 AM IST
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कंदवा। अरंगी गांव में चल रही रामलीला के सातवें दिन मंगलवार की रात के चित्रकूट गमन और राम भरत मिलन, अयोध्या आगमन तथा नंदीग्राम की लीला हुई। भाइयों के मिलन को देखकर लीला प्रेमी भावुक हो गए। श्रद्धालुओं ने जय श्री राम और हर हर महादेव के नारे लगाए।
मंगलवार की लीला की शुरूआत में भरत के ननिहाल से वापस लौटते हैं। महल और अयोध्या को सूना देखकर भरत राम सीता और लक्ष्मण के बारे में पूछते हैं तो कैकेयी कहती हैं कि महाराज तो स्वर्ग सिधार गए और महाराज की आज्ञा से राम को वनवास जाना पड़ा। इतना सुनते ही भरत गुस्से से भड़क उठते हैं । भरत कैकेयी से कहते हैं कि माता तुमने तो कुल का नाश कर दिया । शत्रुघभन मंथरा को देखते ही बरस पड़ते हैं और उसके बाल पकड़कर उसके कूबड़ पर पैर से मारते हैं । इसके बाद भरत राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। निषादराज भरत को कामदगिरी के निकट भगवान राम के होने की जानकारी देते हैं। भरत जब वहां पहुंचते हैं तो श्रीराम को देखते ही उनके चरणों में गिर जाते हैं। राम भरत को बहुत समझाते हैं लेकिन भरत को संतोष नहीं होता। अंत में राम अपना खड़ाऊँ भरत को दे देते हैं। राम की खड़ाऊ को भरत अपने सिर पर बांध लेते हैं और राम से विदा मांगते हैं।
मंगलवार की लीला की शुरूआत में भरत के ननिहाल से वापस लौटते हैं। महल और अयोध्या को सूना देखकर भरत राम सीता और लक्ष्मण के बारे में पूछते हैं तो कैकेयी कहती हैं कि महाराज तो स्वर्ग सिधार गए और महाराज की आज्ञा से राम को वनवास जाना पड़ा। इतना सुनते ही भरत गुस्से से भड़क उठते हैं । भरत कैकेयी से कहते हैं कि माता तुमने तो कुल का नाश कर दिया । शत्रुघभन मंथरा को देखते ही बरस पड़ते हैं और उसके बाल पकड़कर उसके कूबड़ पर पैर से मारते हैं । इसके बाद भरत राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। निषादराज भरत को कामदगिरी के निकट भगवान राम के होने की जानकारी देते हैं। भरत जब वहां पहुंचते हैं तो श्रीराम को देखते ही उनके चरणों में गिर जाते हैं। राम भरत को बहुत समझाते हैं लेकिन भरत को संतोष नहीं होता। अंत में राम अपना खड़ाऊँ भरत को दे देते हैं। राम की खड़ाऊ को भरत अपने सिर पर बांध लेते हैं और राम से विदा मांगते हैं।
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