{"_id":"5c2e5d99bdec2257043b871e","slug":"61546542489-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उपकार करने वाला शिष्य ही महान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उपकार करने वाला शिष्य ही महान
विज्ञापन
कमालपुर। बरहन सति स्वामी अड़गड़ानंद महिला महाविद्यालय में गुरुवार को स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि दूसरों का उपकार करने वाला ही सच्चा शिष्य होता है और वहीं महान है। अनंत काल से शिष्य गुरुओं का सम्मान करते हैं। हम इस परंपरा का निर्वहन आज भी कर रहे हैं। श्रीस्वामी वहां उपस्थित श्रद्धालुओं, अनुयायियों और भक्तों को कथा सुना रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि त्रेता युग में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न गुरु की पाठशाला में ज्ञान अर्जित किए। योगेश्वर श्रीकृष्ण भी गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की लेकिन शिष्यों से कोई भूल नहीं हुई। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि भूल हुई तो गुरुओं से हुई। राजगुरु शुक्ला चार्य की कथा सुनाई। कहा कि देवयानी के पिता चक्रवर्ती सम्राट थे जो कि शुक्राचार्य के शिष्य थे। उन्होंने कहा कि पुत्र मोह बहुत कष्टदायक होता है इससे परिवार का नाश होता है। उन्होंने अपने शिष्य के पुत्री को ही दासी बना दिया और अयाति राजा को वृद्ध होने का श्राप दे दिया। इस के आगे उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य की कहानी बताते हुए कहा कि उनके शिष्य अर्जुन धर्नुविद्या में पास हो गए जब शिकार के लिए जंगल में गए तो कोल भील के लड़का एकलव्य ने अर्जुन का छक्का छुड़ा दिया। जब यह बात गुरु द्रोण को पता चली तो एकलव्य के पास जाकर पूछा कि तुम्हारे गुरु कौन हैं। जब एकलव्य ने गुरु द्रोण को बताया तो उन्होंने गुरु दक्षिणा के रूप में दाहिने हाथ का अंगूठा ही मांग लिया। इसी तरह उन्होंने कर्ण और परशुराम की कथा सुनाई। स्वामी जी ने कथा के दौरान कहा कि दूसरों का हित करना, जो तुम्हारा अपकार करे, तुम उसका उपकार करो। भय लगने पर जो सच बोलता है वही महान है। कथा के अंत में भगवान दो चार नहीं एक होते हैं सद्गुरु की पाठशाला एक होती है। सोहन बाबा लाले बाबा ने भी प्रवचन दिया। इससे पहले कालेज की छात्राओं ने स्वागत किया। फूलों की वर्षा की गई। इस मौके पर सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह पूर्व सदस्य छत्रबली सिंह, प्रधान दयाल शरण यादव ,गुरु प्रकाश यादव ,प्रदीप गुप्ता, पंचम सोनकर, प्रेम चन्द्र सिंह, विंदू कुशवाहा, बंसलोचन यादव मौजूद रहे।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने कहा कि त्रेता युग में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न गुरु की पाठशाला में ज्ञान अर्जित किए। योगेश्वर श्रीकृष्ण भी गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की लेकिन शिष्यों से कोई भूल नहीं हुई। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि भूल हुई तो गुरुओं से हुई। राजगुरु शुक्ला चार्य की कथा सुनाई। कहा कि देवयानी के पिता चक्रवर्ती सम्राट थे जो कि शुक्राचार्य के शिष्य थे। उन्होंने कहा कि पुत्र मोह बहुत कष्टदायक होता है इससे परिवार का नाश होता है। उन्होंने अपने शिष्य के पुत्री को ही दासी बना दिया और अयाति राजा को वृद्ध होने का श्राप दे दिया। इस के आगे उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य की कहानी बताते हुए कहा कि उनके शिष्य अर्जुन धर्नुविद्या में पास हो गए जब शिकार के लिए जंगल में गए तो कोल भील के लड़का एकलव्य ने अर्जुन का छक्का छुड़ा दिया। जब यह बात गुरु द्रोण को पता चली तो एकलव्य के पास जाकर पूछा कि तुम्हारे गुरु कौन हैं। जब एकलव्य ने गुरु द्रोण को बताया तो उन्होंने गुरु दक्षिणा के रूप में दाहिने हाथ का अंगूठा ही मांग लिया। इसी तरह उन्होंने कर्ण और परशुराम की कथा सुनाई। स्वामी जी ने कथा के दौरान कहा कि दूसरों का हित करना, जो तुम्हारा अपकार करे, तुम उसका उपकार करो। भय लगने पर जो सच बोलता है वही महान है। कथा के अंत में भगवान दो चार नहीं एक होते हैं सद्गुरु की पाठशाला एक होती है। सोहन बाबा लाले बाबा ने भी प्रवचन दिया। इससे पहले कालेज की छात्राओं ने स्वागत किया। फूलों की वर्षा की गई। इस मौके पर सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह पूर्व सदस्य छत्रबली सिंह, प्रधान दयाल शरण यादव ,गुरु प्रकाश यादव ,प्रदीप गुप्ता, पंचम सोनकर, प्रेम चन्द्र सिंह, विंदू कुशवाहा, बंसलोचन यादव मौजूद रहे।
विज्ञापन