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पांच वर्षों में 245 एचआईवी के मरीज मिले

Sat, 01 Dec 2018 12:27 AM IST
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:27 AM IST
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पांच वर्षों में 245 एचआईवी के मरीज मिले

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चंदौली। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता और जागरूकता की अलख अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाने से एड्स जैसी गंभीर बीमारी पर अंकुश लगाने में मुश्किल हो रही है। एचआईवी संक्रमित लोगों में ज्यादातर मजदूर वर्ग है। जिले में पांच वर्षों में 245 लोग एचआईवी ग्रस्त पाए गए। इसमें 28 लोग गंभीर बीमारी से जूझते हुए अपनी जान गवां बैठे। वर्तमान सत्र में 30 लोगों की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई, इसमें दो की मौत हो गई है।
पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय के आकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 में 4791 जांच हुई तो एचआईवी से ग्रसित 66 मामले आए, 2015 में 5843 की जांच हुई तो इसमें एचआईवी से ग्रसित 42 मामले आए। 2016 में 4898 के खून के जांच में एचआईवी से ग्रसित 43 मामले आए। 2017 में 5241 के खून की जांच में एचआईवी से ग्रसित 64 मामले आए। वर्ष 2018 में अप्रैल से नवंबर तक के 4211 लोगों के खून की जांच हुई तो इसमें 30 लोग एचआईवी से ग्रसित पाए गए हैं।
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जांच और परामर्श नि:शुल्क जिला चिकित्सालय में एचआईवी की जांच और परामर्श की सुविधा नि:शुल्क है। लिंक एआरटी सेंटर प्लस की स्थापना की गई है। लेकिन जागरूकता के अभाव में एचआइवी पीड़ितों को राहत नहीं मिल रही है। आईसीटीसी सेंटर के परामर्शदाता चंदशेखर मजूमदार ने कहा दवा समय और सावधानी के साथ पीड़ित प्रयोग करें तो उसे राहत मिल सकती है। एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों को टीबी के खतरा होने का संभावना अधिक रहती है। इस रोग से ग्रसित रोगियों में टीबी का खतरा ज्यादा रहता है।
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श्रमिक वर्ग में ज्यादा संक्रमण मुख्य चिकित्सा अधिकारी पी के मिश्रा के अनुसार एचआईवी संक्रमित लोगों में सबसे अधिक मजदूर वर्ग हैं। काम की तलाश में गया जनपदों में जाकर अज्ञानतावश एचआईवी से ग्रसित हो जा रहे हैं। शुरुआती दौर में जांच के दौरान व्यक्तित पाजटिव पाया जाता है। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ईएमओ डा. संजय कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में परीक्षण के बाद में एचआईवी का पता नहीं चलता है। सर्दी जुकाम बुखार लंबे समय तक रहता है। सामान दवा से ठीक नहीं होता है। एसे मरीज को एचआईवी पॉजिटिव होने की संभावना अधिक होती है। वजन का कम होना, लगातार खांसी आना, सिर दर्द, थकान है।
यहां होती है जांच
पंडित कमलापित त्रिपाठी राजकीय संयुक्त जिला चिकित्सलय में एआरटी लिंक सेंटर स्थापित किया गया है। यहां से मरीजों की दवाओं के साथ ही खून की जांच होती है। इसके अतरिक्त सकलडीहा, धानापुर, बरहनी, नियामताबाद स्थित सरकारी अस्पतालों के अलावा मुगलसराय के पीपी सेंटर में आईसीटीसी केंद्र स्थापित है। जहां खून की जांच के साथ ही रोगियों को परामर्श दी जाती है।

संसाधनों का है अभाव
जिला अस्पताल में अब लिंक एआरटी सेंटर की जगह एआरटी सेंटर की आवश्यकता है। वहीं संसाधनों का भी आभाव हो गया। लगभग 300 मरीजों से अधिक मरीज होने पर एआरटी सेंटर होना चाहिए। लिंक सेंटर से 300 से अधिक मरीज है। मरीजों की बढ़ रही संख्या से स्टाप की कमी और संसाधनों का अभाव हो गया है।
पांच वर्ष का आकंड़ा
वर्ष -----जांच -------मरीज-----मृतक
2014--4791--------66----------04
2015--5843--------42----------06
2016--3898--------43----------11
2017--5241--------64----------05
2018--4211--------30----------02
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