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बिना मान्यता के चल रहे 45 विद्यालयों को भेंजी गई नोटिस
Updated Wed, 19 Jul 2017 12:27 AM IST
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कंदवा। बरहनी विकास खंड क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे 45 विद्यालयों को शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजी है। सोलह जुलाई के अंक में अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद इस तरह की कार्रवाई की गई है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से बिना मान्यता के स्कूल चलाने वालों में हड़कंप मच गया है।
मंगलवार को बरहनी के खंड शिक्षा अधिकारी प्रदीप सिंह ने जांच कर 45 विद्यालयों को नोटिस जारी कर सारे कागजात मांगे हैं। तीन दिन में मान्यता और विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है तो दस हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। क्षेत्र में कान्वेंट और नर्सरी विद्यालय के नाम पर सैकड़ों विद्यालय खुले हैं। इनमें फीस भी इतनी ज्यादा है कि इन विद्यालयों में गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाना दिन में सपने देखने जैसा है। ऐसे निजी विद्यालयों में छात्रों की ड्रेस वाराणसी के हाई फाई पब्लिक स्कूलों की तरह हैं। वहीं पुस्तकों पर भी मनमानी वसूली कि जाती है। प्रदेश में शासन सत्ता बदलने के साथ ही निजी विद्यालयों पर लगाम कसनी शुरू हो गई है। बीएसए के निर्देश के क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी प्रदीप सिंह ने 45 विद्यालयों के संचालकों को नोटिस भेजकर तीन दिन में स्कूल बंद कर लिखित जवाब बीआरसी में जमा करने को कहा है ।ऐसा न करने वाले विद्यालयों के प्रबंधकों को 10,000 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। बीते मई माह में भी 39 विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया था। उस समय किसी भी विद्यालय ने कागजात जमा नहीं किया और गर्मी का अवकाश हो गया। गर्मी की छुट्टी समाप्त होते ही बिना मान्यता वाले विद्यालय धड़ल्ले से संचालित होने लगे हैं। अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में नोटिस- बेअसर ,चल रहे स्कूल - शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद खंड शिक्षाधिकारी ने 45 विद्यालयों को नोटिस जारी कर कागजात जमा करने को कहा है। इस संबंध में बीईओ बरहनी प्रदीप सिंह ने कहा कि बिना मान्यता के किसी विद्यालय को नहीं चलने दिया जाएगा।
मंगलवार को बरहनी के खंड शिक्षा अधिकारी प्रदीप सिंह ने जांच कर 45 विद्यालयों को नोटिस जारी कर सारे कागजात मांगे हैं। तीन दिन में मान्यता और विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है तो दस हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। क्षेत्र में कान्वेंट और नर्सरी विद्यालय के नाम पर सैकड़ों विद्यालय खुले हैं। इनमें फीस भी इतनी ज्यादा है कि इन विद्यालयों में गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाना दिन में सपने देखने जैसा है। ऐसे निजी विद्यालयों में छात्रों की ड्रेस वाराणसी के हाई फाई पब्लिक स्कूलों की तरह हैं। वहीं पुस्तकों पर भी मनमानी वसूली कि जाती है। प्रदेश में शासन सत्ता बदलने के साथ ही निजी विद्यालयों पर लगाम कसनी शुरू हो गई है। बीएसए के निर्देश के क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी प्रदीप सिंह ने 45 विद्यालयों के संचालकों को नोटिस भेजकर तीन दिन में स्कूल बंद कर लिखित जवाब बीआरसी में जमा करने को कहा है ।ऐसा न करने वाले विद्यालयों के प्रबंधकों को 10,000 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। बीते मई माह में भी 39 विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया था। उस समय किसी भी विद्यालय ने कागजात जमा नहीं किया और गर्मी का अवकाश हो गया। गर्मी की छुट्टी समाप्त होते ही बिना मान्यता वाले विद्यालय धड़ल्ले से संचालित होने लगे हैं। अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में नोटिस- बेअसर ,चल रहे स्कूल - शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद खंड शिक्षाधिकारी ने 45 विद्यालयों को नोटिस जारी कर कागजात जमा करने को कहा है। इस संबंध में बीईओ बरहनी प्रदीप सिंह ने कहा कि बिना मान्यता के किसी विद्यालय को नहीं चलने दिया जाएगा।
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