{"_id":"5c0d6779bdec22416d12d5c6","slug":"201544382329-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जान जोखिम में डाल शिक्षा ग्रहण करने को विवश नौनिहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जान जोखिम में डाल शिक्षा ग्रहण करने को विवश नौनिहाल
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पड़ाव। नियामताबाद ब्लॉक के कटेसर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की छत जर्जर हो चुकी है। बाउंड्रीवाल टूटी पड़ी है। जान जोखिम में डालकर नौनिहाल यहां पढ़ाई कर रहे हैं। कमरों में लगे खिड़की-दरवाजे टूटे पड़े हैं और स्कूल तक पहुंचने का मार्ग क्षतिग्रस्त है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद भी निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल काफी पहले से क्षतिग्रस्त है। एक कमरे का दरवाजा व खिड़कियां भी टूटी पड़ी हैं। विद्यालय के अन्य कमरे भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। इससे बच्चे दूसरे कमरों में पढ़ने को विवश हैं। प्रधानाचार्य अजय सिंह ने बताया कि स्कूल में लगभग चार सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। बावजूद इसके विद्यालय का भवन जर्जर हालत में है, कई कमरों के दरवाजे भी टूटे पड़े हैं और शौचालय की दशा काफी खराब है। विद्यालय आने-जाने वाले रास्ते पर जानलेवा गड्ढ़े बन गए हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है लेकिन आज तक किसी ने इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया है।
गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल काफी पहले से क्षतिग्रस्त है। एक कमरे का दरवाजा व खिड़कियां भी टूटी पड़ी हैं। विद्यालय के अन्य कमरे भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। इससे बच्चे दूसरे कमरों में पढ़ने को विवश हैं। प्रधानाचार्य अजय सिंह ने बताया कि स्कूल में लगभग चार सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। बावजूद इसके विद्यालय का भवन जर्जर हालत में है, कई कमरों के दरवाजे भी टूटे पड़े हैं और शौचालय की दशा काफी खराब है। विद्यालय आने-जाने वाले रास्ते पर जानलेवा गड्ढ़े बन गए हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है लेकिन आज तक किसी ने इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया है।
विज्ञापन