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पीसीएफ की लापरवाही से 4.36 करोड़ का राजस्व नुकसान
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:56 AM IST
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पीडीडीयू नगर। पीसीएफ, सहकारी समिति और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही से 25 हजार कुंतल गेहूं तो सड़ ही रहा है, सरकार को भी करोड़ों रुपये का चुना लगा है। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल के निर्देश के बाद भी लापरवाही से खरीद के बाद समितियों से गेहूं का उठान अब तक नहीं हो सका और गेहूं अब बारिश में भींगकर सड़ने लगा है। जबकि 15 जून तक गेहूं एफसीआई गोदामों में गेहूं रखवाना था।
इस साल तकरीबन 40 से अधिक गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए थे। इस साल पीसीएफ ने सीजन में 1745 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों से गेहूं की खरीद की थी। 2.70 लाख कुंतल गेहूं की समितियों पर खरीद की थी। जिसमें 25 हजार कुंतल गेहूं सड़ने के कगार पर पहुंच चुका है। इस हिसाब से पीसीएफ की लापरवाही के चलते सरकार को 4.36 करोड़ 25 हजार का नुकसान हुआ है। यह तो अनुमानित आंकड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी 56 हजार कुंतल गेहूं का उठान नहीं हो सका है। ऐसे में देखा जाए तो पीसीएफ ने राज्य सरकार को करीब 10 करोड़ा का चूना लगाया है। इसके बाद भी उच्चाधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
गेहूं खरीद होने के बाद इसे एफसीआई के गोदाम व्यासनगर, मंडुवाडीह भेजा जा रहा था। इसके अलावा बिहार के मोहनिया में भी गेहूं को भेजा गया। इसके बाद भी पूरी तरह से गेहूं का उठान नहीं हो सका। खरीद होने के बाद इसे एफसीआई के गोदामों पर भेजने की जिम्मेदारी पीसीएफ (प्रदेश कोआपरेटिव फेडरेशन) की थी। लेकिन पीसीएफ के अधिकारियों की लापरवाही से 15 जून के ढाई महीने बाद भी उठान नहीं हो सका। पीसीएफ प्रभारी शशिकांत भारती का कहना है कि एफ सी आई में जैसे जगह खाली मिल रही है वैसे वैसे गेहूं का उठान किया जा रहा है।
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इस साल तकरीबन 40 से अधिक गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए थे। इस साल पीसीएफ ने सीजन में 1745 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों से गेहूं की खरीद की थी। 2.70 लाख कुंतल गेहूं की समितियों पर खरीद की थी। जिसमें 25 हजार कुंतल गेहूं सड़ने के कगार पर पहुंच चुका है। इस हिसाब से पीसीएफ की लापरवाही के चलते सरकार को 4.36 करोड़ 25 हजार का नुकसान हुआ है। यह तो अनुमानित आंकड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी 56 हजार कुंतल गेहूं का उठान नहीं हो सका है। ऐसे में देखा जाए तो पीसीएफ ने राज्य सरकार को करीब 10 करोड़ा का चूना लगाया है। इसके बाद भी उच्चाधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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गेहूं खरीद होने के बाद इसे एफसीआई के गोदाम व्यासनगर, मंडुवाडीह भेजा जा रहा था। इसके अलावा बिहार के मोहनिया में भी गेहूं को भेजा गया। इसके बाद भी पूरी तरह से गेहूं का उठान नहीं हो सका। खरीद होने के बाद इसे एफसीआई के गोदामों पर भेजने की जिम्मेदारी पीसीएफ (प्रदेश कोआपरेटिव फेडरेशन) की थी। लेकिन पीसीएफ के अधिकारियों की लापरवाही से 15 जून के ढाई महीने बाद भी उठान नहीं हो सका। पीसीएफ प्रभारी शशिकांत भारती का कहना है कि एफ सी आई में जैसे जगह खाली मिल रही है वैसे वैसे गेहूं का उठान किया जा रहा है।
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