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जल ही जीवन है, इसे मिलकर हम सभी बचाएं: सीडीओ
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:06 AM IST
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चंदौली।मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन जनजागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया गया। इसमें जल संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई और इसे बचाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
इस अवसर पर सीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि जल ही जीवन है, इसे बचाने की जिम्मेदारी सभी की है। इसे जागरूकता लाकर ही बचाया जा सकता है। पानी अनमोल है जो हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है इसके बिना कोई प्राणी जीवित नहीं रह सकता है। मनुष्य के साथ ही पेड़-पौधों व पशु-पक्षी भी जल पर आश्रित हैं। सरकार एक सप्ताह तक लोगों को जागरूक करने के लिए भू-जल सप्ताह मना रही है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव व पानी की अत्यधिक मांग और जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता के परिणाम स्वरूप जलापूर्ति एवं उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। कई वर्षों से वर्षा की कमी के कारण कुछ स्थानों पर भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है। ऐसे में प्रबंधन व संरक्षण की आवश्यकता बढ़ गयी है। विशेषकर जल संचय की परम्परागत तकनीकों को अपनाने, भूजल सम्पदा का अपव्यय न हो। इस पर गहन विचार करने की आवश्यकता है।तमाम स्रोतों से भूजल से धरती को निकाल रहे हैं। इसके चलते भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। किसानों को भी कम पानी वाली फसलों की खेती करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पानी को बचाया जा सके। डा. एमएस यादव ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए कि वर्षा के पानी को संचय करें वह दूषित नहीं होता। रेन वाटर हावेस्टिंग योजना का क्रियान्वयन सभी सरकारी व गैर सरकारी इमारतों पर होना चाहिए। कुदरत के इस अमूल्य तोहफे को हम सभी को मिलकर एक-एक बूंद बचाना होगा, तभी यह धरती खुशहाल व हरी-भरी बनी रहेगी। इस अवसर पर बीएल सरोज, सत्येंद्र कुमार सिंह, टीके सिन्हा, अभय कुमार श्रीवास्तव, मुरारी यादव, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि जल ही जीवन है, इसे बचाने की जिम्मेदारी सभी की है। इसे जागरूकता लाकर ही बचाया जा सकता है। पानी अनमोल है जो हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है इसके बिना कोई प्राणी जीवित नहीं रह सकता है। मनुष्य के साथ ही पेड़-पौधों व पशु-पक्षी भी जल पर आश्रित हैं। सरकार एक सप्ताह तक लोगों को जागरूक करने के लिए भू-जल सप्ताह मना रही है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव व पानी की अत्यधिक मांग और जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता के परिणाम स्वरूप जलापूर्ति एवं उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। कई वर्षों से वर्षा की कमी के कारण कुछ स्थानों पर भू-जल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है। ऐसे में प्रबंधन व संरक्षण की आवश्यकता बढ़ गयी है। विशेषकर जल संचय की परम्परागत तकनीकों को अपनाने, भूजल सम्पदा का अपव्यय न हो। इस पर गहन विचार करने की आवश्यकता है।तमाम स्रोतों से भूजल से धरती को निकाल रहे हैं। इसके चलते भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। किसानों को भी कम पानी वाली फसलों की खेती करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पानी को बचाया जा सके। डा. एमएस यादव ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए कि वर्षा के पानी को संचय करें वह दूषित नहीं होता। रेन वाटर हावेस्टिंग योजना का क्रियान्वयन सभी सरकारी व गैर सरकारी इमारतों पर होना चाहिए। कुदरत के इस अमूल्य तोहफे को हम सभी को मिलकर एक-एक बूंद बचाना होगा, तभी यह धरती खुशहाल व हरी-भरी बनी रहेगी। इस अवसर पर बीएल सरोज, सत्येंद्र कुमार सिंह, टीके सिन्हा, अभय कुमार श्रीवास्तव, मुरारी यादव, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।
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