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कवि गोष्ठी के माध्यम से डॉ. रत्नाकर पांडेय को याद किया
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:17 AM IST
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नई बाजार। बिजौरा गांव में मुन्ना पांडेय के आवास पर साहित्य प्रेमियों ने काव्य गोष्ठी के माध्यम से ख्यातिलब्ध साहित्यकार और पत्रकार डॉ. रत्नाकर पांडेय को याद किया। गोष्ठी में साहित्यकारों ने डॉ. रत्नाकर पांडेय को महान व्यक्तित्व का स्वामी बताया।
सरस्वती सदन वाराणसी से आए विजय मिश्र बुद्धिहीन ने है दौर अनिश्चय में जीना, अनचाहे जहर घूंट पीना, भांप वक्त नजाकत का, होठों को पड़ता है सीना सुनाया। अजय कुमार पांडेय उर्फ झून्ना भैया ने निर्मल नीर दिया सरिता को, सागर कर दी खारी, उजला रंग दिया बगुले को, कोयल कर दी काली सुनाया। विजय कुमार पांडेय ने चाहता परमसुख तो, भज ले हरिनाम को, परम पावन, परम सुंदर परम मंगल धाय को, एल उमाशंकर ने हम शापों के अभ्यासी हैं, वरदानों से भर जाएंगे, सारी उम्र हुए अपमानित, नगरी नगरी द्वारे द्वारे सुनाया। पंडित अंबिका प्रसाद ने रत्नाकर पांडेय रचित गंगा तोरी लहरिया पर हिया ललचे, तो मोहन तिवारी ने रत्नाकर पांडेय रचित इंद्रा प्रियदर्शिनी के अंश सुनाए। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुुरूआत पंडित रत्नाकर पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर हुई। इस मौके पर अकलू पाठक, राजेश मास्टर, हीरा पाठक, हरवंश गुप्ता, कल्लू माड़वाडी, हाजी डॉ. जलालुद्दीन रहे।
सरस्वती सदन वाराणसी से आए विजय मिश्र बुद्धिहीन ने है दौर अनिश्चय में जीना, अनचाहे जहर घूंट पीना, भांप वक्त नजाकत का, होठों को पड़ता है सीना सुनाया। अजय कुमार पांडेय उर्फ झून्ना भैया ने निर्मल नीर दिया सरिता को, सागर कर दी खारी, उजला रंग दिया बगुले को, कोयल कर दी काली सुनाया। विजय कुमार पांडेय ने चाहता परमसुख तो, भज ले हरिनाम को, परम पावन, परम सुंदर परम मंगल धाय को, एल उमाशंकर ने हम शापों के अभ्यासी हैं, वरदानों से भर जाएंगे, सारी उम्र हुए अपमानित, नगरी नगरी द्वारे द्वारे सुनाया। पंडित अंबिका प्रसाद ने रत्नाकर पांडेय रचित गंगा तोरी लहरिया पर हिया ललचे, तो मोहन तिवारी ने रत्नाकर पांडेय रचित इंद्रा प्रियदर्शिनी के अंश सुनाए। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुुरूआत पंडित रत्नाकर पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर हुई। इस मौके पर अकलू पाठक, राजेश मास्टर, हीरा पाठक, हरवंश गुप्ता, कल्लू माड़वाडी, हाजी डॉ. जलालुद्दीन रहे।
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