{"_id":"5ad8f1fb4f1c1b5d098b573b","slug":"171524167163-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कबाड़ वाहनों में नौनिहलों की जिंदगी दावं पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कबाड़ वाहनों में नौनिहलों की जिंदगी दावं पर
Updated Fri, 20 Apr 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
अ
मुगलसराय। जिले में संचालित निजी विद्यालयों में चल रहे स्कूली वाहन मानकों को ताक पर रखकर बच्चों को ढो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की मनमानी से कबाड़ हो चुके वाहनों से बच्चों को घर और स्कूल छोड़ा जा रहा है। परिवहन विभाग और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से नौनिहालों की जिंदगी दावं पर है। करीब पांच सौ निजी विद्यालयों के एक हजार से अधिक वाहन चल रहे हैं। जबकि परिवहन विभाग के अनुसार 450 स्कूली वाहन संचालित हैं इसमें भी 92 वाहन अनफिट हैं।
अब जब शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है तो कबाड़ हो चुुके वाहनों-विक्रम, आटो, मिनी बसों में बच्चों को ठूंसकर घर और स्कूल पहुंचाया जा रहा है। परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों के लिए मानक भी तय है लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है। परिवहन विभाग और यातायात विभाग की उदासीनता के चलते जनपद में लगभग हजारों वाहन रोजना स्कूली बच्चों को ढोते हैं। जबकि 450 ऐसे स्कूल वाहन हैं, जिनका पंजीकरण एआरटीओ दफ्तर में कराया गया है। जिसमें 92 वाहन अनफिट हैं। स्कूल वाहनों का फिटनेस हर साल कराना होता है, जिसका प्रमाण पत्र आरआई जारी करते हैं।
वाहन में फर्स्ट ऐड बॉक्स होना चाहिए, शीशों पर छड़ की रेलिंग लगी हो, चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, परिचय-पत्र और वाहन के कागजात होने चाहिए, विद्यालय की ओर से बस संचालन के लिए प्रदत्त प्रमाण पत्र हो, स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए, वाहन पर प्रबंधक का पता और दूरभाष नंबर और फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
विज्ञापन
-लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन विजय प्रकाश सिंह ने छह माह के अंदर एक भी वाहन का चालान नहीं किया गया है। फिलहाल चालान काटने का कोई रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। विजय प्रकाश सिंह, प्रवर्तन, एआरटीओ
-वाहन चालकों और स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वे अपने वाहनों की जांच कराकर फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त प्राप्त कर लें। 92 वाहनों का फिटनेस न होने पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। दिलीप गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन
विज्ञापन
मुगलसराय। जिले में संचालित निजी विद्यालयों में चल रहे स्कूली वाहन मानकों को ताक पर रखकर बच्चों को ढो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की मनमानी से कबाड़ हो चुके वाहनों से बच्चों को घर और स्कूल छोड़ा जा रहा है। परिवहन विभाग और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से नौनिहालों की जिंदगी दावं पर है। करीब पांच सौ निजी विद्यालयों के एक हजार से अधिक वाहन चल रहे हैं। जबकि परिवहन विभाग के अनुसार 450 स्कूली वाहन संचालित हैं इसमें भी 92 वाहन अनफिट हैं।
अब जब शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है तो कबाड़ हो चुुके वाहनों-विक्रम, आटो, मिनी बसों में बच्चों को ठूंसकर घर और स्कूल पहुंचाया जा रहा है। परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों के लिए मानक भी तय है लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है। परिवहन विभाग और यातायात विभाग की उदासीनता के चलते जनपद में लगभग हजारों वाहन रोजना स्कूली बच्चों को ढोते हैं। जबकि 450 ऐसे स्कूल वाहन हैं, जिनका पंजीकरण एआरटीओ दफ्तर में कराया गया है। जिसमें 92 वाहन अनफिट हैं। स्कूल वाहनों का फिटनेस हर साल कराना होता है, जिसका प्रमाण पत्र आरआई जारी करते हैं।
विज्ञापन
वाहन में फर्स्ट ऐड बॉक्स होना चाहिए, शीशों पर छड़ की रेलिंग लगी हो, चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, परिचय-पत्र और वाहन के कागजात होने चाहिए, विद्यालय की ओर से बस संचालन के लिए प्रदत्त प्रमाण पत्र हो, स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए, वाहन पर प्रबंधक का पता और दूरभाष नंबर और फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
विज्ञापन
-लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन विजय प्रकाश सिंह ने छह माह के अंदर एक भी वाहन का चालान नहीं किया गया है। फिलहाल चालान काटने का कोई रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। विजय प्रकाश सिंह, प्रवर्तन, एआरटीओ
-वाहन चालकों और स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वे अपने वाहनों की जांच कराकर फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त प्राप्त कर लें। 92 वाहनों का फिटनेस न होने पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। दिलीप गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन