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भीषण गर्मी के कारण पशुओं में मिल्क ड्राप का संकट
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चकिया। गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान तथा हीट स्ट्रोक का सीधा असर दुधारू पशुओं के दूध देने पर पड़ा है। गर्मी के चलते पशुओ में मिल्क ड्राप संकट उत्पन्न हो गया है। हरे चारे की कमी तथा लू के कारण दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता पर असर पड़ा है। पशु चिकित्सकों ने दुधारू पशुओं को ठंडे स्थान पर रखने तथा उन्हें ठंडा पानी पिलाने की सलाह दी है।
भीषण गर्मी तथा लू के चलते पशुओं में मिल्क ड्राप का संकट गहरा रहा है। वाराणसी दुग्ध संघ की रिपोर्ट के मुताबिक दूधारू पशुओं में 20 से 30 प्रतिशत तक दूध देने की क्षमता कम हो गई है। इसके चलते शादी-विवाह के मौसम में दूध की कमी हो गई है। इसके कारण दूध एवं दूध से निर्मित प्रोडक्ट के दाम में उछाल देखा जा रहा है। पशुपालक मिल्क ड्राप के संकट के लिए गर्मी, हीट स्ट्रोक के साथ ही हरे चारे की अनुपलब्धता को जिम्मेदार बता रहे हैं। पशुपालक वाराणसी दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, अनिल कुमार सिंह, अतिबल सिंह, शिवकुमार सिंह कहते हैं कि गर्मी के कारण दुधारू पशुओं में मिल्क ड्राप का संकट होना स्वाभाविक है। इसके लिए पशुओं को ठंडे छायादार स्थान पर रखने तथा हरा चारा खिलाना जरूरी है। पशु चिकित्सक डॉ. अनूप कुमार मिश्रा ने कहा कि लू से पशुओं की दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके कारणों में उन्हें हरा चारा तथा छायादार स्थान न मिलना प्रमुख कारण है। उन्होंने पशुओं को छायादार स्थान पर रखने, ठंडे पानी को पिलाने तथा हरा चारा देने की जरूरत पर बल दिया।
भीषण गर्मी तथा लू के चलते पशुओं में मिल्क ड्राप का संकट गहरा रहा है। वाराणसी दुग्ध संघ की रिपोर्ट के मुताबिक दूधारू पशुओं में 20 से 30 प्रतिशत तक दूध देने की क्षमता कम हो गई है। इसके चलते शादी-विवाह के मौसम में दूध की कमी हो गई है। इसके कारण दूध एवं दूध से निर्मित प्रोडक्ट के दाम में उछाल देखा जा रहा है। पशुपालक मिल्क ड्राप के संकट के लिए गर्मी, हीट स्ट्रोक के साथ ही हरे चारे की अनुपलब्धता को जिम्मेदार बता रहे हैं। पशुपालक वाराणसी दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, अनिल कुमार सिंह, अतिबल सिंह, शिवकुमार सिंह कहते हैं कि गर्मी के कारण दुधारू पशुओं में मिल्क ड्राप का संकट होना स्वाभाविक है। इसके लिए पशुओं को ठंडे छायादार स्थान पर रखने तथा हरा चारा खिलाना जरूरी है। पशु चिकित्सक डॉ. अनूप कुमार मिश्रा ने कहा कि लू से पशुओं की दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके कारणों में उन्हें हरा चारा तथा छायादार स्थान न मिलना प्रमुख कारण है। उन्होंने पशुओं को छायादार स्थान पर रखने, ठंडे पानी को पिलाने तथा हरा चारा देने की जरूरत पर बल दिया।
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